Central Excise Day, 24 February: महत्व, विषयवस्तु और मुख्य विवरण!

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस 2026: 24 फरवरी – इतिहास, विषयवस्तु, महत्व और उद्धरण! | Central Excise Day, 24 February

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के विकास की रफ्तार को गति देने में कर प्रणाली की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है? Central Excise Day, 24 February केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक संरचना से जुड़ा एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अध्याय है। भारत में प्रत्येक वर्ष 24 फरवरी को केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाया जाता है, जो न केवल 1944 में लागू हुए केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम की याद दिलाता है, बल्कि उन समर्पित अधिकारियों के योगदान को भी सम्मानित करता है जो कर प्रशासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने में निरंतर प्रयासरत हैं। वर्ष 2026 में यह दिवस नई जागरूकता, कर अनुपालन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ मनाया जाएगा। आखिर क्यों यह दिन आज भी इतना प्रासंगिक है? कैसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क देश के राजस्व और विकास से जुड़ा है? इन सभी रोचक तथ्यों को जानने के लिए आगे पढ़ें।

this is the image of Central Excise Day 24 February

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस क्या है?

Central Excise Day भारत सरकार द्वारा मनाया जाने वाला एक आधिकारिक दिवस है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के योगदान को मान्यता देना है। यह दिन करदाताओं को कर प्रणाली के प्रति जागरूक करने और अधिकारियों को ईमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करने का अवसर प्रदान करता है।

हालांकि कुछ स्रोतों में तिथि को लेकर भ्रम दिखाई देता है, परंतु यह दिवस प्रत्येक वर्ष 24 फरवरी को ही मनाया जाता है। इसी दिन 1944 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम लागू किया गया था। यह अधिनियम स्वतंत्र भारत की कर प्रणाली के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क का अर्थ

केंद्रीय उत्पाद शुल्क भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर है। इसे अंग्रेज़ी में “Excise Duty” कहा जाता है। यह कर देश के भीतर निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाता था और लंबे समय तक सरकार के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

वर्ष 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद अधिकांश अप्रत्यक्ष करों को उसमें समाहित कर दिया गया। इसके बावजूद पेट्रोलियम उत्पाद, डीजल, पेट्रोल, तंबाकू और शराब जैसे कुछ उत्पाद अभी भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क के दायरे में आते हैं। इन वस्तुओं से प्राप्त राजस्व आज भी केंद्र सरकार की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग का ऐतिहासिक विकास

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग भारत के सबसे पुराने सरकारी विभागों में से एक है। इसकी स्थापना ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1855 में की गई थी। उस समय इसका उद्देश्य व्यापार और विनिर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण और राजस्व संग्रह था।

वर्ष 1944 में “केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम” लागू किया गया। इस अधिनियम ने उत्पाद शुल्क से संबंधित विभिन्न कानूनों को एकीकृत किया। प्रारंभ में इसमें 67 वस्तुओं को कर के दायरे में रखा गया था, जिनकी संख्या समय के साथ बढ़कर लगभग 1000 तक पहुँच गई।

वर्ष 1973 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार प्रदान किया गया। बाद में 2013 में सेवा कर से संबंधित मामलों में भी यह अधिकार सौंपा गया। वर्ष 1996 में अधिनियम में कई संशोधन किए गए ताकि कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

सीबीईसी से सीबीआईसी तक

केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) लंबे समय तक देश में अप्रत्यक्ष कर प्रशासन का प्रमुख निकाय रहा। बाद में इसका नाम बदलकर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) कर दिया गया, ताकि इसके विस्तृत दायित्वों को स्पष्ट किया जा सके।

आज CBIC सीमा शुल्क, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (GST) तथा तस्करी-रोधी गतिविधियों से संबंधित नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार है। यह संस्था देश की कर प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-संचालित बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस का उद्देश्य

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  1. केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के योगदान को सम्मान देना।
  2. करदाताओं को कर अनुपालन के महत्व के प्रति जागरूक करना।
  3. अधिकारियों को ईमानदारी से कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित करना।
  4. विनिर्माण क्षेत्र में भ्रष्टाचार और तस्करी पर नियंत्रण को बढ़ावा देना।
  5. राष्ट्रीय विकास में कर राजस्व की भूमिका को रेखांकित करना।

यह दिन यह भी याद दिलाता है कि कर भुगतान केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में नागरिकों का योगदान है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क का आर्थिक महत्व

केंद्रीय उत्पाद शुल्क लंबे समय तक भारत सरकार के लिए राजस्व संग्रह का प्रमुख साधन रहा है। इससे प्राप्त आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जाता है।

बीते वर्षों में बेहतर सेवा वितरण और पारदर्शिता के कारण राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह राजस्व गरीबी उन्मूलन, साक्षरता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में सहायक रहा है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग देश के औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विनिर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देता है।

जीएसटी के बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क की भूमिका

1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद अधिकांश अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर दिया गया। इसके बावजूद केंद्रीय उत्पाद शुल्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

आज भी पेट्रोलियम उत्पादों, तंबाकू और शराब जैसे कुछ विशेष उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाया जाता है। इनसे प्राप्त राजस्व सरकार के लिए महत्वपूर्ण है और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।

इस प्रकार, जीएसटी के युग में भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क का महत्व बना हुआ है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस 2026 का विषय

Central Excise Day 2026 का आधिकारिक विषय अभी घोषित नहीं किया गया है। सामान्यतः इस दिवस का फोकस कर अनुपालन में सुधार, कर प्रणाली का सरलीकरण, तकनीकी उन्नयन और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने पर रहता है।

वर्ष 2026 में यह संभावना है कि कर नियमों के सरलीकरण, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन (Make in India) और पारदर्शी कर प्रशासन जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाए। विषय की आधिकारिक घोषणा होते ही संबंधित मंचों पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

उत्सव और गतिविधियाँ

Central Excise Day पर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य जागरूकता फैलाना और अधिकारियों के योगदान को सम्मानित करना होता है।

  1. कार्यशालाएँ और सेमिनार: इन कार्यक्रमों में कर कानूनों, अनुपालन और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की जाती है। अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि इसमें भाग लेते हैं।
  2. पुरस्कार समारोह: उत्कृष्ट सेवा देने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है। इससे कर्मचारियों में उत्साह और प्रेरणा बढ़ती है।
  3. जागरूकता अभियान: व्यापारियों और निर्माताओं को कर नियमों के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। निष्पक्ष व्यापार और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सामाजिक विकास

केंद्रीय उत्पाद शुल्क से प्राप्त राजस्व का उपयोग कई सामाजिक योजनाओं में किया जाता है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

कर राजस्व के माध्यम से सरकार बुनियादी ढाँचे का विकास करती है, नई परियोजनाएँ शुरू करती है और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को मजबूत बनाती है। इस प्रकार, केंद्रीय उत्पाद शुल्क देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस के प्रेरणादायक उद्धरण – Central Excise Day

इस अवसर पर कुछ विचार और उद्धरण जो ईमानदारी, राष्ट्र निर्माण और कर अनुपालन की भावना को प्रोत्साहित करते हैं:

  • अमीर बनने का सपना देखने के बजाय सफल होने का सपना देखना बेहतर है, क्योंकि सफलता आत्मविश्वास और उपलब्धि लाती है।
  • आइए भारत को समृद्ध बनाने के लिए मिलकर प्रयास करें।
  • सरकार जनता का विकल्प नहीं, बल्कि जनता के कार्यों का माध्यम है।
  • यदि शुल्क बहुत अधिक बढ़ा दिए जाएँ, तो तस्करी की संभावना बढ़ सकती है।
  • हम नीति और विचारों पर मतभेद रख सकते हैं, परंतु ईमानदारी पर नहीं।

ये उद्धरण हमें याद दिलाते हैं कि कर प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी ही राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है।

FAQ: Central Excise Day, 24 February

प्रश्न 1: Central Excise Day कब मनाया जाता है?

उत्तर: यह दिवस प्रत्येक वर्ष 24 फरवरी को मनाया जाता है।

प्रश्न 2: यह दिवस क्यों मनाया जाता है?

उत्तर: 24 फरवरी 1944 को केंद्रीय उत्पाद शुल्क और नमक अधिनियम लागू हुआ था। उसी की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।

प्रश्न 3: उत्पाद शुल्क का भुगतान कौन करता है?

उत्तर: किसी वस्तु के निर्माता या उत्पादक उत्पाद शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

प्रश्न 4: क्या जीएसटी लागू होने के बाद उत्पाद शुल्क समाप्त हो गया है?

उत्तर: नहीं, पेट्रोलियम, तंबाकू और शराब जैसे कुछ उत्पाद अभी भी केंद्रीय उत्पाद शुल्क के दायरे में आते हैं।

प्रश्न 5: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड क्या है?

उत्तर: यह वह संस्था है जो सीमा शुल्क, जीएसटी और अन्य अप्रत्यक्ष करों से संबंधित नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन करती है।

निष्कर्ष: Central Excise Day, 24 February

Central Excise Day 2026 केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह देश की कर प्रणाली, आर्थिक स्थिरता और प्रशासनिक पारदर्शिता का प्रतीक है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि कर भुगतान राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और ईमानदारी से किया गया प्रत्येक योगदान देश को मजबूत बनाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अधिकारी दिन-रात मेहनत करके देश की आर्थिक नींव को सुदृढ़ बनाए रखते हैं। उनका योगदान शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से करोड़ों नागरिकों तक पहुँचता है।

24 फरवरी 2026 को जब हम केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस मनाएँ, तो यह संकल्प लें कि हम अपने कर दायित्वों का ईमानदारी से पालन करेंगे और भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में अपना योगदान देंगे।

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