अटल विहारी वाजपेयी की जयंती पर राष्ट्रीय सुशासन दिवस – इसके उद्देश्य, महत्व और प्रभाव! | National Good Governance Day on the birth anniversary of Atal Bihari Vajpayee | National Good Governance Day 2025 | Good Governance Day theme 2025 | National Good Governance Day -13 December
भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में शासन की गुणवत्ता केवल नीतियों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से मापी जाती है। शासन तभी सफल माना जाता है जब वह नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे, पारदर्शी हो, जवाबदेह हो और समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चले। इन्हीं मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत में प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को National Good Governance Day मनाया जाता है। यह दिवस न केवल प्रशासनिक सुधारों की समीक्षा का अवसर प्रदान करता है, बल्कि नागरिकों और सरकार दोनों को सुशासन के प्रति अपनी साझा जिम्मेदारी का स्मरण भी कराता है।
राष्ट्रीय सुशासन दिवस का महत्व और तिथि | Significance and Date of National Good Governance Day
राष्ट्रीय सुशासन दिवस भारत में हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह तिथि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के रूप में भी जानी जाती है। वाजपेयी जी ने अपने राजनीतिक जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों, पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास को विशेष महत्व दिया। उनके इन्हीं विचारों और कार्यों को सम्मान देने के लिए इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की परंपरा शुरू की गई।
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता, प्रभावशीलता और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही यह दिन सरकार और नागरिकों को सुशासन के मूल सिद्धांतों जैसे सहभागिता, कानून का शासन और समानता की निरंतर याद दिलाता है।
सुशासन क्या है? | What is good governance?
सुशासन निर्णय लेने की वह प्रक्रिया है और वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक निर्णयों को लागू किया जाता है। विश्व बैंक की “शासन और विकास, 1992” नामक रिपोर्ट के अनुसार, सुशासन वह तरीका है जिससे किसी देश के आर्थिक और सामाजिक संसाधनों के प्रबंधन में विकास के लिए शक्ति का प्रयोग किया जाता है।
‘अच्छे’ शासन की असली कसौटी यह है कि वह मानवाधिकारों के वादे को किस हद तक पूरा करता है: नागरिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक अधिकार। सरल शब्दों में, सुशासन वह शासन है जो जनता की भलाई पर केंद्रित हो, जहां निर्णय पारदर्शी हों और सभी को समान अवसर मिलें।
मेरे ज्ञान के आधार पर, सुशासन का विचार प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे कौटिल्य के अर्थशास्त्र से भी जुड़ा है, जहां राजा को प्रजा की सेवा करने वाला बताया गया है। आधुनिक संदर्भ में, यह लोकतंत्र की मजबूती और विकास की कुंजी है।
सुशासन के प्रमुख सिद्धांत | Key principles of good governance
विश्व बैंक के अनुसार, सुशासन की 8 प्रमुख विशेषताएं हैं। इन्हें बिंदुवार समझते हैं:
- सहभागितापूर्ण: सुशासन के लिए लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे वह प्रत्यक्ष रूप से हो या प्रतिनिधियों या संस्थानों के माध्यम से। इसमें पुरुष एवं महिलाएं, समाज के कमजोर वर्ग, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक आदि शामिल हैं। भागीदारी का तात्पर्य संघ एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी है।
- सर्वसम्मति उन्मुख: सुशासन में समुदाय के सर्वोत्तम हितों और सतत विकास लक्ष्यों पर आम सहमति बनाने के लिए सामाजिक हितों में मध्यस्थता करना शामिल है। इससे सुनिश्चित होता है कि भले ही प्रत्येक व्यक्ति वह न पाए जो वह चाहता है, लेकिन सभी को सामान्य न्यूनतम संसाधन उपलब्ध हों, जो किसी अन्य के लिए हानिकारक न हो।
- जवाबदेही: किसी संगठन या संस्था को उन लोगों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए जो उसके निर्णयों या कार्यों से प्रभावित होंगे। सरकारी संस्थानों, निजी क्षेत्रों और नागरिक समाज संगठनों द्वारा सार्वजनिक एवं संस्थागत हितधारकों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- पारदर्शी: पारदर्शिता का अर्थ है कि निर्णय नियमों के अनुसार लिए जाते हैं, और उनसे प्रभावित लोगों को जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इसका अर्थ मुक्त मीडिया और सूचना की समग्र पहुंच भी है। सूचनाओं की प्राप्ति आम जनता के लिए सुलभ होनी चाहिए और यह उनके समझने और निगरानी योग्य होनी चाहिए।
- उत्तरदायी: संस्थानों को उचित समय सीमा के भीतर सभी हितधारकों की सेवा करनी चाहिए। सुशासन का उद्देश्य लोगों की बेहतरी है और यह सरकार द्वारा लोगों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित किए बगैर नहीं किया जा सकता।
- प्रभावी और कुशल: सुशासन यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रियाएं और संस्थाएं उपलब्ध संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हुए सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करें। अधिकतम उत्पादन के लिए समुदाय के संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।
- न्यायसंगत और समावेशी: किसी समाज की भलाई इस बात पर निर्भर करती है कि उसके सभी सदस्यों, विशेष रूप से कमजोर समूहों को, अपनी भलाई में सुधार या उसे बनाए रखने के अवसरों में शामिल किया जाए। सुशासन एक समतामूलक समाज को बढ़ावा देता है।
- कानून का शासन: इसके लिए निष्पक्ष, तटस्थ कानूनी ढांचे की आवश्यकता होती है, जिसे एक स्वतंत्र न्यायपालिका और भ्रष्टाचार मुक्त पुलिस बल का समर्थन प्राप्त हो। ‘कानून के शासन’ के बिना राजनीति, मत्स्य न्याय (Matsya Nyaya) के सिद्धांत का पालन करेगी, जिसका अर्थ है ताकतवर कमजोर पर हावी होगा।
ये सिद्धांत सुशासन की आधारशिला हैं और इन्हें अपनाने से शासन अधिक प्रभावी बनता है।
अटल बिहारी वाजपेयी और सुशासन | Atal Bihari Vajpayee and good governance
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में प्रवेश किया। उनके कार्यकाल में कई परिवर्तनकारी पहलें देखी गईं, जैसे:
- किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card): किसानों को आसान ऋण उपलब्ध कराना।
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana (PMGSY): ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण।
- सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan (SSA): सभी बच्चों को शिक्षा सुनिश्चित करना।
- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (National Rural Health Mission (NRHM): ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना।
ये पहलें देश में शासन व्यवस्था को बदलने वाली थीं। वाजपेयी जी एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्हें उनके राजनैतिक कौशल, काव्यात्मक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाता है।
सुशासन का महत्व | Importance of Good Governance
सुशासन का महत्व बहुआयामी है। यहां कुछ प्रमुख बिंदु:
- आर्थिक विकास: सुशासन के अंतर्गत की गई पहल कार्यबल में पुरुषों और महिलाओं दोनों को समान अधिकार और संरक्षण प्रदान करती है, जिससे 2025 तक भारत की जीडीपी में 770 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हो सकती है।
- सामाजिक विकास: स्वच्छ भारत और स्किल इंडिया कार्यक्रम हाशिए पर पड़े समूहों को शिक्षा और रोजगार कौशल प्रदान करके सशक्त बनाते हैं। आधार का एकीकरण लीकेज को रोकता है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer (DBT) कल्याणकारी योजनाओं में बिचौलियों को खत्म करता है।
- लोकतंत्र को मजबूत बनाना: MyGov जैसे प्लेटफॉर्म नागरिकों को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति देते हैं और ई-गवर्नेंस भ्रष्टाचार को कम करने में मदद करता है।
- जवाबदेही: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारदर्शिता के लिए नागरिकों को सरकारी जानकारी तक पहुंच का अधिकार सुनिश्चित करता है, जबकि PFMS सार्वजनिक व्यय में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निधि प्रवाह पर नजर रखता है।
- असमानता कम करना: प्रधानमंत्री जन धन योजना (Prime Minister Jan Dhan Yojana (PMJDY) उन लोगों के लिए वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है जिनके पास बैंक खाता नहीं है। MGNREGA ग्रामीण परिवारों को गारंटीशुदा मजदूरी पर आधारित रोजगार प्रदान करता है।
- विश्वास का निर्माण: ई-कोर्ट्स परियोजना दक्षता और सुलभता के लिए अदालती प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करती है, जबकि CPGRAMS नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक मंच प्रदान करता है।
सुशासन से समाज में विश्वास बढ़ता है और विकास तेज होता है। मेरे ज्ञान से, संयुक्त राष्ट्र भी सुशासन को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का हिस्सा मानता है।
भारत में सुशासन की पहलें | Good Governance Initiatives in India
भारत में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की गई हैं। प्रमुख हैं:
- सुशासन सूचकांक (GGI): राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा उठाए गए कदमों के प्रभाव का आकलन करता है।
- प्रगति (PRAGATI): सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन के लिए।
- सूचना का अधिकार, 2005: शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP): सरकारी सेवाओं को स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाना।
- ई-कोर्ट प्रणाली: अदालती प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाना।
- सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS): निधि प्रवाह की निगरानी।
- मिशन कर्मयोगी: सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण।
ये पहलें शासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाती हैं।
सुशासन के मार्ग में चुनौतियां | Challenges in the path of Good Governance
सुशासन के रास्ते में कई बाधाएं हैं। बिंदुवार:
- भ्रष्टाचार: विश्व बैंक के अनुसार, भ्रष्टाचार के कारण भारत को सालाना अपने सकल घरेलू उत्पाद का 0.5% नुकसान होता है। भ्रष्टाचार संबंधी धारणा सूचकांक 2023 में भारत 180 देशों में से 93वें स्थान पर रहा।
- जवाबदेही का अभाव: इससे सरकार पर नागरिकों का भरोसा कम होता है, राजनीतिक उदासीनता बढ़ती है।
- राजनीति का अपराधीकरण: एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, 543 लोकसभा सदस्यों में से 251 (46%) के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।
- कानूनों का अप्रभावी कार्यान्वयन: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की अप्रभावी प्रवर्तन से निराशा फैलती है।
- महिला सशक्तीकरण की कमी: सरकारी संस्थानों में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं।
- न्याय में देरी: न्यायालयों में कर्मियों की कमी से समय पर न्याय नहीं मिलता।
- प्रशासनिक प्रणाली का केंद्रीकरण: पंचायती राज संस्थाएं निधियों की कमी से प्रभावित।
- अन्य चुनौतियां: पर्यावरण सुरक्षा, सतत विकास, वैश्वीकरण और बाजार अर्थव्यवस्था की चुनौतियां।
ये चुनौतियां शासन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
सुशासन में सुधार के प्रयास | Efforts to Improve Good Governance
सुधार के लिए कई प्रयास हो रहे हैं:
- गुड गवर्नेंस इंडेक्स (Good Governance Index (GGI): शासन की स्थिति निर्धारित करने के लिए।
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan): सेवाओं को सस्ती और पारदर्शी बनाना।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005): पारदर्शिता बढ़ाना।
- अन्य: नीति आयोग की स्थापना, Make in India, लोकपाल आदि।
ये प्रयास चुनौतियों का सामना करने में मदद करते हैं।
2025 में सुशासन दिवस के समारोह | Celebration of Good Governance Day in 2025
2025 में, सुशासन दिवस को विशेष रूप से मनाया जा रहा है। पीएम मोदी 25 दिसंबर को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करेंगे, जो 232 करोड़ की लागत से 65 एकड़ में बना है। भाजपा इसे पखवाड़े के रूप में मना रही है, राज्य भर में कार्यशालाएं होंगी। 19 से 25 दिसंबर तक सुशासन सप्ताह चलेगा, जहां गांवों में कैम्प लगाकर जनशिकायतों का समाधान किया जाएगा। अक्टूबर में “सुशासन और अभिलेख 2025” प्रदर्शनी आयोजित हुई। ये समारोह वाजपेयी की 101वीं जयंती को उत्सव के रूप में मना रहे हैं।
2025 के लिए प्रमुख विषय और फोकस क्षेत्र:
- डिजिटल सशक्तिकरण: सभी नागरिकों के लिए ई-गवर्नेंस और डिजिटल पहुंच को बढ़ावा देना।
- सेवा वितरण: सरकारी सेवाओं को तेज़, अधिक सुलभ और कुशल बनाना।
- सार्वजनिक शिकायतें: जमीनी स्तर पर नागरिकों की शिकायतों का समाधान करना|
- समग्र विकास : जिला/ब्लॉक विकास को समग्र राष्ट्रीय प्रगति से जोड़ना (विकसित भारत)।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष: National Good Governance Day
राष्ट्रीय सुशासन दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि भारत के प्रशासनिक भविष्य का मार्गदर्शक है। यह हमें याद दिलाता है कि सुशासन सरकार की जिम्मेदारी के साथ-साथ नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागिता के माध्यम से ही एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण संभव है। इस अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम शासन को वास्तव में जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता के साथ बनाएँगे।
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