National Unity Day or Rashtriya Ekta Diwas: सरदार पटेल को समर्पित एकता का संदेश!

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क्या आप जानते हैं इस दिन का असली महत्व? जानिए क्यों मनाया जाता है सरदार पटेल की जयंती पर! National Unity Day Friday, 31 October, 2025 | National Unity Day or Rashtriya Ekta Diwas | National Unity Day 2025

भारत विविधताओं का देश है — भाषा, संस्कृति, धर्म, रीति-रिवाजों में गहरा भिन्नता वाला देश। इस विविधता के बीच “अनेकता में एकता” की अवधारणा ही भारत की शक्ति रही है। इसी विचार का उत्सव है National Unity Day 2025 जिसे हर साल 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।

31 अक्टूबर का यह दिवस विशेष रूप से Sardar Vallabhbhai Patel की जन्मतिथि पर मनाया जाता है — इसलिए इसे राष्ट्र­ीय एकता दिवस या राष्ट्र­ीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas / National Unity Day) कहा जाता है। भारत सरकार ने 2014 से इस दिन को राष्ट्र­ीय स्तर पर निर्धारित किया था।

2025 में यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह वर्ष पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष है। इस अवसर पर देशभर में विशेष आयोजनों के माध्यम से उनकी भूमिका, विचार और एकता का संदेश पुनर्जीवित किया जाएगा।

this is the image of Rashtriya Ekta Diwas 2025

राष्ट्रीय एकता दिवस: इतिहास एवं पृष्ठभूमि

आरंभ और सरकारी प्रस्तावना

भारत सरकार ने 24 अक्टूबर 2014 को निर्णय लिया कि सरदार पटेल की जयंती को ‘राष्ट्र­ीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाए। इसके पीछे विचार यह था कि यह दिन देश को यह अवसर देगा कि हम अपनी देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की दिशा में नये संकल्प लें, और इन क्षेत्रों में वर्तमान चुनौतियों का सामना करने की हमारी सामर्थ्य को पुनर्स्मरण करें।

सरकार ने यह निर्देश दिया कि सभी सरकारी कार्यालय, जनसंस्था और शिक्षण संस्थाएँ इस अवसर पर एक प्रतिज्ञा (pledge) आयोजित करें, और साथ ही “Run for Unity” (एकता दौड़), परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन सुनिश्चित करें।

इस तरह यह दिन सिर्फ एक स्मरण दिवस नहीं है, बल्कि एक सक्रिय आंदोलन का दिन है — जिसमें सभी नागरिक मिलकर यह प्रण करते हैं कि वे देश की एकता और अखंडता के लिए योगदान देंगे।

भारत के विभाजन और रियासतों की समस्या

जब भारत को 1947 में आज़ादी मिली, तब ब्रिटिश भारत और रियासतें (प्रिंसली स्टेट्स) नामक स्वतंत्र क्षेत्रों का मिश्रण था। स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा ब्रिटिश भारत की सत्ता भारतीय सरकार को सौंप दी गई, लेकिन रियासतों को यह विकल्प दिया गया कि वे भारत या पाकिस्तान के साथ विलय करें या स्वतंत्र रहें।

उनमें से अनेक रियासतें भू-राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से जटिल पुरानी सीमाओं से बँधी थीं। यदि ये रियासतें स्वतंत्र रहतीं, तो भारत का खण्डित स्वरूप बन सकता था। इसके अतिरिक्त, विभाजन के समय भारत–पाकिस्तान विभाजन ने पहले से ही देश में कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी थीं।

सरदार पटेल ने अपने दृढ़ और दूरदर्शी नेताओं के संवाद, समझौता और दृढ़ता के साथ इन रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने का कार्य किया। इस प्रकार, उन्हें “भारत का लौह पुरुष” कहा गया।

पहला वर्ष से आज तक: तर्क एवं विकास

2014 के बाद से यह दिवस हर वर्ष मनाया जाता रहा है। समय के साथ, इस दिन का स्वरूप विकसित हुआ है — सिर्फ सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रहकर, यह जनसाधारण, सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से एक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है।

सरकार ने सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार (Sardar Patel National Unity Award) की स्थापना भी की है, जिसे उन नागरिकों या संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए विशिष्ट योगदान किया हो।

संक्षिप्त रूप से, राष्ट्रीय एकता दिवस का इतिहास यह दर्शाता है कि यह केवल स्मरण का दिन ही नहीं, बल्कि भारत में एकता, आत्मविश्वास और नागरिकता की भावना को नियमित रूप से ताज़ा करने का माध्यम है।

Sardar Vallabhbhai Patel: जीवनी और योगदान

राष्ट्रीय एकता दिवस की मूल प्रेरणा Sardar Vallabhbhai Patel के जीवन और दृष्टिकोण में निहित है। इस खंड में हम उनके प्रारंभिक जीवन, राजनीतिक सक्रियता और विशेष रूप से उस भूमिका की चर्चा करेंगे जिसने भारत को एकीकृत किया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

  • जन्म: पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद (गुजरात) में हुआ।
  • प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने करमसद और पेटलाद में प्राप्त की। बाद में कानून की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड गए और लंदन के Middle Temple से वकालत की डिग्री प्राप्त की।
  • उन्होंने अहमदाबाद में वकालत शुरू की और शीघ्र ही मुकदमेबाजी की क्षेत्र में प्रतिष्ठित वकील बन गए।

राजनीतिक सक्रियता और स्वतंत्रता आंदोलन

  • पटेल गांधी जी के संपर्क में आने के बाद स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। विशेष रूप से खेडा सत्याग्रह (1918) और बर्डोली सत्याग्रह (1928) उनके प्रभावशाली आंदोलनों में से थे।
  • बर्डोली सत्याग्रह ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दिलाई, और उनकी संगठन क्षमता और जनसमर्थन ने उन्हें राष्ट्रीय नेता बना दिया।
  • आज़ादी से पहले, उन्होंने कांग्रेस और अन्य संगठनों में विधि और संगठनात्मक भूमिका निभायी।

आज़ादी के बाद: भारत एकीकरण का महा-कार्य

स्वतंत्रता के समय भारत में लगभग 560 से अधिक रियासतें थीं। इन रियासतों को यह विकल्प दिया गया था कि वे भारत, पाकिस्तान या स्वतंत्रता की राह चुनें।

सरदार पटेल ने गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए इन रियासतों को भारतीय संघ में संगठित करने का दायित्व संभाला। उन्होंने राजनयिक कौशल, समझौता, दबाव और लॉजिक को मिलाकर अधिकांश रियासतों को भारत में प्रवेश कराने का सफल प्रयास किया।

उनके प्रयासों से हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ जैसी जटिल रियासतों को भी भारत में समाहित किया गया। इस कार्य ने भारत की राजनीतिक भूमि को एक सूत्र में बाँध दिया और नई भारत की नींव रखी।

प्रतीक और सम्मान

  • पटेल को “भारत का लौह पुरुष” कहा जाता है — उनकी दृढ़ता और दृढ निश्चय के कारण।
  • राज्य सरकारों ने कई स्मारक और योजनाएँ उनके नाम पर स्थापित की हैं।
  • सबसे उल्लेखनीय है Statue of Unity (एकता प्रतिमा) — जो 182 मीटर ऊँची है और गुजरात में केवड़िया में स्थित है। यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है और यह भारत की एकता का प्रतीक बनी हुई है।
  • उन्होंने कई हिस्सों में विकास परियोजनाएँ और प्रशासनिक सुधारों का मार्गदर्शन किया।

सरदार पटेल न केवल एक राष्ट्रकर्ता थे, बल्कि एक नेता जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि आज़ादी के बाद भारत केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही न प्राप्त करे, बल्कि एक संरचित, संगठित और संरक्षित राष्ट्र बने।

राष्ट्रीय एकता दिवस: उद्देश्य, महत्व एवं संदेश

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं है — यह एक संकल्प और चेतना जागरण का दिन है। इस खंड में हम उद्देश्य, महत्व और संदेश की चर्चा करेंगे।

उद्देश्य

  • एकता, अखंडता और सुरक्षा की पुनर्स्मृति करना। सरकार के प्रारंभिक बयान में यह कहा गया है कि यह दिन “हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की दिशा में हमारे राष्ट्र की अंतर्निहित शक्ति और लचीलापन” को पुनः पुष्टि करने का अवसर देगा।
  • प्रतिज्ञा के माध्यम से नागरिकों को यह संदेश देना कि वे व्यक्तिगत रूप से राष्ट्र की एकता की रक्षा करेंगे।
  • युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में एकता, सहिष्णुता, देशभक्ति की भावनाएँ उत्पन्न करना।
  • स्मरण और प्रेरणा — यह दिन पटेल के योगदान को याद दिलाता है, और हमें यह प्रेरणा देता है कि हम आज भी उनकी सोच को जीवित रखें।
  • राष्ट्रवाद और नागरिक जिम्मेदारी को पुष्ट करना — यह दिन हमें याद दिलाता है कि एकता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हमें रोजमर्रा के व्यवहार में करना चाहिए।

महत्व

  • भारत एक विशाल लोकतंत्र है जिसमें अनेक विभाजनकारी ताकतें समय-समय पर सक्रिय होती हैं — भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्रवाद आदि। ऐसे में यह दिन हमें याद दिलाता है कि विभिन्नताओं के बावजूद हम एक हैं
  • यह दिन राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सामंजस्य और संहति के महत्व पर जोर देता है।
  • यह कार्यक्रम विभिन्न सामाजिक दलों, शैक्षिक संस्थाओं, नागरिकों और सत्ता-संस्थाओं को जोड़ता है — जिससे एक साझा राष्ट्रीय भावनात्मक बंधन बनता है।
  • यह दिन हमें यह संदेश देता है कि विरोध और मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें संपर्क, संवाद और सहिष्णुता से सुलझाना चाहिए।
  • 2025 की 150वीं जयंती के अवसर पर, इस दिन की महत्ता और भी बढ़ जाती है — यह स्मरण करता है कि एक राष्ट्र की एकता की चुनौतियाँ आज भी मौजूद हैं, और हमें सतत सतर्क रहना है।

संदेश

  • अनेकता में एकता: भारत की विविधता ही हमारी पहचान है; यह हमें अलग नहीं करती, बल्कि एक जोड़ती है।
  • सहिष्णुता और आदर: एकता तब ही पनपेगी जब हम भिन्नता का आदर करें — चाहे भाषा हो, धर्म हो या रीति-रिवाज हो।
  • नागरिक जिम्मेदारी: हर नागरिक को यह बोध होना चाहिए कि देश की एकता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
  • सशक्त राष्ट्र का निर्माण: एकता ही वह आधार है जिस पर देश का विकास, सुरक्षा और समृद्धि संभव है।
  • प्रतिज्ञा का महत्व: वह प्रतिज्ञा जो हर नागरिक इस दिन लेता है — वह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का मार्गदर्शक होना चाहिए।

31 अक्टूबर पर आयोजन और गतिविधियाँ!

राष्ट्रीय एकता दिवस को मनाने के लिए भारत भर में अनेक कार्यक्रम और गतिविधियाँ होती हैं। नीचे उनकी सूची और विवरण दिए गए हैं:

प्रतिज्ञा (Pledge)

सरकार यह व्यवस्था करती है कि सभी सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक संस्थाओं में एक प्रतिज्ञा समारोह हो। उस प्रतिज्ञा का मूल स्वरूप निम्नलिखित है:

“मैं सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता / करती हूँ कि मैं राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करूँगा / करूँगी और अपने देशवासियों के बीच इस संदेश को फैलाने के लिए अथक प्रयास करूँगा / करूँगी। मैं यह प्रतिज्ञा अपने देश के एकीकरण की भावना से लेता / लेती हूँ, जो Sardar Vallabhbhai Patel की दूरदर्शिता और कार्यों से संभव हुआ। मैं अपने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना योगदान देने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प लेता / लेती हूँ।”

यह प्रतिज्ञा जनता को यह याद दिलाती है कि एकता की रक्षा सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में होनी चाहिए।

एकता दौड़ (Run for Unity)

यह एक लोकप्रिय और सक्रिय पहल है — आम नागरिक, छात्र और कर्मचारी एक साथ दौड़ते हैं, देशभक्ति के जज़्बे के साथ। इस दौड़ में विभिन्न प्रदेशों की जनता भाग लेती है।

दौड़ का उद्देश्य है लोगों को शारीरिक रूप से सक्रिय करना, एक संदेश देना कि एकता सिर्फ आयोजनों तक सीमित नहीं है बल्कि जीवनशैली होनी चाहिए।

परेड, मार्च-पास्ट, जागरूकता रैलियाँ

  • पुलिस, NCC, सेनाएं, Central Armed Police Forces (CAPF) आदि परेड करती हैं।
  • रंगीन रैलियाँ निकाली जाती हैं जिसमें जनसमूह, छात्र, सामाजिक संस्थाएँ भाग लेते हैं।
  • बैनर, झंडे, पोस्टर, स्लोगन आदि के माध्यम से एकता का संदेश फैलाया जाता है।
  • शैक्षिक संस्थानों में व्याख्यान, विशेष कक्षाएँ, संगोष्ठियाँ आयोजित होते हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

  • विभिन्न राज्यों की नृत्य, गीत, नाटक प्रस्तुतियाँ होती हैं जिसमें भारत की विविध संस्कृति का प्रदर्शन किया जाता है।
  • प्रश्नोत्तरी, निबंध, पेंटिंग प्रतियोगिता आदि कार्यक्रम आयोजित होते हैं — ताकि लोगों को एकता और विविधता के महत्व का मानवीय और बौद्धिक अनुभव हो।
  • कला एवं शिल्प (Art & Craft) कार्यक्रम: प्रतिभागी भारत की विविधता को दर्शाने वाली कलाकृतियाँ बनाते हैं।
  • प्रदर्शनी: पटेल के जीवन और भारत की एकता की यात्रा पर आधारित फोटोज़, दस्तावेज़ और मॉडल प्रदर्शनी लगाई जाती है।

एकता उद्यान (Unity Garden)

  • इस पहल में नागरिक एक स्थान पर मिलकर पौधे लगाते हैं — हर कोई अपने प्रदेश या क्षेत्र का एक पौधा लाता है।
  • यह प्रतीकात्मक है — जिस प्रकार विविध पौधे एक बगीचे में एक दूसरे के साथ खिलते हैं, वैसे ही विविधता में एकता का संदेश।
  • यह सामूहिक बागवानी कार्यक्रम लोगों को प्रकृति के प्रति जोड़ता है और सौंदर्य व संतोष का अनुभव देता है।

सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार

सरकार उन व्यक्तियों या संस्थाओं को यह पुरस्कार देती है जिन्होंने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया हो। यह सम्मान 31 अक्टूबर को दिया जाता है।

विशेष श्रद्धांजलि और समारोह

  • Statue of Unity पर विशेष कार्यक्रम होते हैं — प्रधानमंत्री, राज्य प्रमुख आदि वहाँ जाकर श्रद्धांजलि देते हैं।
  • अन्य स्थानों पर पटेल की प्रतिमाओं के सामने पुष्पांजलि, व्याख्यान, डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग आदि आयोजित होते हैं।

2025 में राष्ट्रीय एकता दिवस की विशेष महत्ता

2025 के राष्ट्रीय एकता दिवस की महत्ता कई कारणों से अधिक है:

150वीं जयंती का वर्ष

2025, Sardar Vallabhbhai Patel की 150वीं जन्मशती का वर्ष है। यह अवसर उनकी जीवन यात्रा, योगदान और विचारों को विशेष महत्व देने का है।

इस वर्ष, सरकार और समाज मिलकर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करेंगे — विशेष स्मारक, शैक्षिक अभियानों, मीडिया एवं जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से उनकी विरासत को उजागर किया जाएगा।

आधुनिक चुनौतियाँ और एकता की आवश्यकता

भारत एक विकसित और जटिल राष्ट्र बन गया है। आर्थिक असमानताएँ, सामाजिक विभाजन, धर्मांधता, राजनीतिक कट्टरता, क्षेत्रवाद आदि अनेक चुनौतियाँ हैं। ऐसे समय में, पटेल का संदेश — “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” — अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

इस वर्ष, समाज को यह याद दिलाना आवश्यक है कि राष्ट्रीय एकता सिर्फ स्वप्न नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और ज़िम्मेदारी है।

मुख्य कार्यक्रम और चर्चा

  • इस वर्ष Statue of Unity पर विशेष कार्यक्रमों की योजना है — प्रधानमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्तियों द्वारा श्रद्धांजलि दिन और परेड कार्यक्रम।
  • मीडिया में लेख, रिपोर्ट, वृत्तचित्र एवं सोशल मीडिया अभियानों का जोर होगा — जिससे नई पीढ़ी पटेल की विचारधारा से परिचित हो।
  • शैक्षिक संस्थानों में विशेष आयोजन और प्रतियोगिताएँ होंगी, जिसमें छात्र-छात्राएँ एकता और राष्ट्रीय एकीकरण विषयों पर कार्य करेंगे।
  • सामाजिक संगठनों और नागरिक समितियाँ स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेंगी — इंटरनेट, भारत जोड़ो अभियानों के माध्यम से।

प्रतीकात्मक विषय और संदेश

2025 की थीम संभवतः “युवाओं में एकता” या “आधुनिक भारत और समरसता” हो सकती है — ताकि नई पीढ़ी को जोड़ने का संदेश पहुंचे। इस वर्ष, पटेल की विचारधारा को डिजिटल माध्यमों, कला, संगीत और नवाचार के ज़रिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

हम व्यक्तिगत रूप से कैसे मनाएँ — सुझाव और विचार

राष्ट्रीय एकता दिवस का प्रभाव तभी स्थायी बनेगा जब हम व्यक्तिगत स्तर पर इस दिन को महसूस करें और अपनाएँ। निम्न सुझावों को अपनाकर आप इस दिन को यादगार और प्रभावशाली बना सकते हैं:

घर और आस-पड़ोस में कार्यक्रम

  • प्रतिज्ञा समारोह: परिवार और पड़ोस के लोगों के साथ एक छोटे से समागम में ऊपर दिए गए प्रतिज्ञा पाठ करें।
  • एकता दौड़ / वॉक / साइकल राइड: अपने घर या निकटतम पार्क में एक छोटी दौड़, वॉक या साइकल राइड आयोजित करें।
  • संयुक्त भोज: विभिन्न राज्यों के व्यंजन साझा करें, अपनी पाक परंपराएँ साझा करें, एकता को स्वादों से जोड़ें।
  • संस्कृति एवं कहानियाँ: अपने घर में बच्चों या युवाओं को पटेल की जीवन गाथा सुनाएँ, उनके योगदान पर चर्चा करें।
  • एकता उद्यान: यदि संभव हो, एक छोटा-सा बगीचा बनाएं, पौधे लगाएँ।

स्कूल / कॉलेज / सामाजिक समूह

  • यूनिटी रन आयोजित करना — छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों को आमंत्रित करें।
  • निबंध / पेंटिंग / पोस्टर प्रतियोगिता — “एकता और विविधता” विषय पर।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम — विभिन्न प्रदेशों के नृत्यों और गीतों का प्रदर्शन।
  • संवाद सत्र — छात्रों को विभाजन, एकता और भारत की चुनौतियों पर भावनात्मक और तार्किक बातचीत करें।
  • प्रदर्शनी — पटेल के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम और भारत के रियासतों के एकीकरण की कहानी प्रदर्शित करें।

सोशल मीडिया एवं डिजिटल अभियान

  • हैशटैग अभियान (#RashtriyaEktaDiwas, #NationalUnityDay आदि)
  • पटेल के उद्धरण साझा करना — उनके विचार और संदेश सोशल मीडिया में प्रचारित करना
  • डिजिटल पोस्टर, वीडियो, मीम्स — एकता और देशभक्ति को सरल और आकर्षक रूप देना
  • ऑनलाइन संवाद — webinars, ज़ूम सेमिनार, ऑनलाइन विमर्श

दैनिक जीवन में एकता का अभ्यास

  • भिन्नता का सम्मान करें — भाषा, विचार, धर्म के भिन्न लोगों से संवाद करें, समझदारी का प्रयास करें।
  • सामूहिक कार्य — सामाजिक या सामुदायिक कार्यों में भाग लें — “एक भारत एक प्रयास” की भावना से।
  • शिक्षा और जानकारी फैलाएँ — मित्रों, परिवारजनों को देश की एकता, पटेल की भूमिका के बारे में बताएँ।
  • अहिंसा और संवाद — विवादों में हिंसा की बजाय संवाद की राह चुनें।

समापन: हमारी भूमिका और प्रतिबद्धता

राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है। यह हमें यह याद दिलाता है कि:

  • भारत की शक्ति उसकी विविधता में है।
  • हम सबका योगदान जरूरी है — चाहे वह अध्ययन, सेवा, संवाद या जागरूकता हो।
  • एकता केवल शपथ नहीं, बल्कि व्यवहार में होनी चाहिए।
  • पटेल का दृष्टिकोण — “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” — आज भी प्रासंगिक है।
  • 2025 की 150वीं जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम इस दिन को सिर्फ समारोह तक सीमित न रखें, बल्कि इसे जीवन दर्शन बनाएं।

अगर हम सब मिलकर — छोटे-छोटे कदमों से — एकता, सहिष्णुता, समझदारी और देशभक्ति को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ, तो हम वह भारत बनायेंगे जिसके सपने पटेल ने देखे थे।

आइए, इस 31 अक्टूबर 2025 को हम सभी एक साथ वचन लें— न केवल एकता दिवस की प्रतिज्ञा पढ़ने की, बल्कि उसका पालन करने की

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