5 दिसम्बर को अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस क्या है? आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस! | International Volunteer Day Friday 5 December, 2025 | International Volunteer Day for Economic and Social Development
हर साल 5 दिसंबर को दुनिया भर में “आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस (International Volunteer Day for Economic and Social Development)” मनाया जाता है। इसे संक्षेप में अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस (International Volunteer Day (IVD) कहा जाता है। यह दिन उन लाखों लोगों को सम्मान देने के लिए है जो बिना किसी स्वार्थ के अपना समय, ऊर्जा और कौशल समाज की भलाई के लिए लगाते हैं। इस दिन को मनाने का मकसद स्वयंसेवा की भावना को बढ़ावा देना, सरकारों को स्वयंसेवी कामों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करना और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने में स्वयंसेवकों के योगदान को दुनिया के सामने लाना है।
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस का इतिहास | History of International Volunteer Day
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस की शुरुआत 17 दिसंबर 1985 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव A/RES/40/212 के द्वारा हुई थी। पहली बार इसे 1986 में मनाया गया। तब से हर साल 5 दिसंबर को यह दिन पूरी दुनिया में स्वयंसेवकों के योगदान को याद करने और सराहने का अवसर बन गया है। इसकी देख-रेख और प्रचार-प्रसार संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम (United Nations Volunteers – UNV) करता है। हर साल UNV एक विशेष थीम के साथ वैश्विक अभियान चलाता है।
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस 2025 की थीम | International Volunteer Day 2025 theme
इस साल यानी 2025 की थीम है – “प्रत्येक योगदान मायने रखता है” (Every Contribution Counts) यह थीम हमें याद दिलाती है कि स्वयंसेवा का कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। एक घंटा समय देना, किसी की मदद करना, मुस्कान बांटना या बड़ा प्रोजेक्ट चलाना – सबका अपना महत्व है। हर छोटा-बड़ा योगदान मिलकर दुनिया को बेहतर बनाता है।
खास बात यह है कि 5 दिसंबर 2025 को ही “सतत विकास के लिए स्वयंसेवकों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष – IVY2026” का आधिकारिक शुभारंभ भी होगा। यह एक साल भर चलने वाली वैश्विक मुहिम होगी जो यह दिखाएगी कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में स्वयंसेवक कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस की पिछले कुछ सालों की थीम्स | International Volunteer Day themes over the years
- 2024 – ठोस सामुदायिक स्वयंसेवी गतिविधियों के माध्यम से समुदायों की भलाई पर जोर
- 2023 – “यदि सभी ने ऐसा किया” (If Everyone Did)
- 2022 – “एक साथ, अभी कार्य करें” (Solidarity through Volunteering)
- 2021 – “हमारे साझा भविष्य के लिए अभी स्वयंसेवा करें”
- 2020 – “हम स्वयंसेवा के माध्यम से एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं” (कोविड काल में स्वयंसेवकों को धन्यवाद)
- 2019 – “समावेशी भविष्य के लिए”
- 2018 – “स्वयंसेवक लचीले समुदायों का निर्माण करते हैं”
- 2017 – “स्वयंसेवक पहले कार्य करें। यहां। हर जगह।”
- 2016 – “वैश्विक सराहना – स्वयंसेवकों की मदद करें”
- 2015 – “आपकी दुनिया बदल रही है। क्या आप बदल रहे हैं? स्वयंसेवक बनें!”
हर थीम ने अलग-अलग पहलू को उजागर किया – कभी एकजुटता, कभी समावेशिता, कभी युवाओं की भूमिका, तो कभी संकट के समय स्वयंसेवकों की तत्परता।
हमें स्वयंसेवा क्यों करनी चाहिए? | Why should we volunteer?
स्वयंसेवा सिर्फ दूसरों की मदद करना नहीं है, यह खुद को भी समृद्ध करने का तरीका है। जब हम दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो हमें खुशी, संतुष्टि और नई सीख मिलती है। साथ ही यह हमें अपने समाज से जोड़ती है, नई दोस्ती बनाती है और नेतृत्व कौशल विकसित करती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में हर सात में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में स्वयंसेवा करता है। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि स्वयंसेवा की भावना कितनी जीवंत है।
5 दिसंबर 2025 को आप कैसे हिस्सा ले सकते हैं? | How can you participate on December 5, 2025?
इस दिन को खास बनाने के लिए कई आसान तरीके हैं। आप कोई एक या कई काम चुन सकते हैं:
- अपनी सेवाएं दें अपने आस-पास किसी एनजीओ, स्कूल, अस्पताल, वृद्धाश्रम या पर्यावरण संगठन में कुछ घंटे या एक दिन के लिए स्वयंसेवा करें। अगर समय नहीं है तो ऑनलाइन स्वयंसेवा (जैसे अनुवाद, ग्राफिक डिजाइन, मेंटरशिप) भी बहुत बड़ी मदद होती है।
- स्वयंसेवकों को धन्यवाद कहें अपने मोहल्ले के सफाई कर्मी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता या किसी भी स्वयंसेवक को व्यक्तिगत रूप से या सोशल मीडिया पर धन्यवाद कहें। एक सादा “शुक्रिया” भी उन्हें बहुत प्रेरणा देता है।
- कार्यक्रमों में शामिल हों कई शहरों में 5 दिसंबर को स्वयंसेवी मेला, सेमिनार, वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर आदि आयोजित होते हैं। इनमें हिस्सा लेकर आप ऊर्जा और प्रेरणा दोनों ले सकते हैं।
- दान करें अगर समय नहीं दे पा रहे हैं तो किसी विश्वसनीय स्वयंसेवी संगठन को आर्थिक मदद करें। छोटी राशि भी बड़े काम आती है।
- प्रेरक कहानियां शेयर करें अपने जान-पहचान के स्वयंसेवकों की कहानियां Facebook, Instagram, X (Twitter) or WhatsApp पर शेयर करें। Hashtag #IVD2025 और #EveryContributionCounts है का इस्तेमाल करें। इससे और लोग भी प्रेरित होंगे।
स्वयंसेवा के कुछ वास्तविक उदाहरण | Some real examples of volunteering
- कोविड-19 के दौरान लाखों स्वयंसेवकों ने मास्क बांटे, भोजन पहुंचाया, वैक्सीनेशन सेंटर में मदद की।
- जलवायु परिवर्तन के खिलाफ युवा हर शुक्रवार स्कूल छोड़कर सड़कों पर प्रदर्शन करते हैं और पेड़ लगाते हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूह चलाकर दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती हैं।
- आपदा के समय (बाढ़, भूकंप) सबसे पहले स्थानीय स्वयंसेवक ही पीड़ितों तक पहुंचते हैं।
ये सब उदाहरण बताते हैं कि स्वयंसेवा कोई बड़ी डिग्री या पैसा नहीं मांगती, बस दिल में दूसरों के लिए जगह चाहिए।
स्वयंसेवा का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव | The social and economic impact of volunteering
स्वयंसेवा केवल मदद करने का माध्यम नहीं है; यह सामाजिक बदलाव का एक शक्तिशाली साधन भी है। स्वयंसेवक समुदायों में आशा और सहमति का संचार करते हैं, कमजोर भागों तक सेवाएँ पहुँचाते हैं और स्थानीय नेतृत्व तथा सामुदायिक लचीलेपन को मजबूत करते हैं। आर्थिक रूप से भी स्वयंसेवा का बड़ा योगदान होता है — यह कौशल विकसित करता है, रोज़गार के अवसर बढ़ाता है और सामाजिक पूँजी को सुदृढ़ करता है, जो दीर्घकालीन विकास में सहायक होता है।
सरकारों और संस्थाओं की भूमिका | The role of governments and institutions
सरकारों, नीतिनिर्माताओं और संस्थानों को स्वयंसेवा को नीति और कार्यक्रमों में शामिल करना चाहिए। स्वयंसेवा को आधिकारिक योजनाओं में जगह देने से न केवल स्वयंसेवकों को समर्थन मिलता है बल्कि उनकी पहलों का प्रभाव भी बढ़ता है। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, मान्यता और कानूनी संरचनाएँ स्वयंसेवकों को सशक्त बनाती हैं।
समुदाय स्तर पर छोटे-छोटे कदम जैसे स्थानीय सफाई अभियान, रक्तदान शिविर, बुज़ुर्गों के लिए सहायता समूह, या बच्चों के लिए पढ़ाई सहायता — ये सभी कदम सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव लाते हैं। IVD हमें यही सिखाता है कि समर्पण और निरंतरता से छोटे प्रयास भी दीर्घकालिक परिणाम देते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस की तैयारी कैसे करें | How to prepare for International Volunteer Day?
- योजना बनाएं: IVD से पहले स्थानीय साझेदारों, स्वयंसेवियों और समुदाय के साथ मिलकर गतिविधियों की सूची बनाएं।
- जिम्मेदारियाँ बाँटें: कार्यों को स्पष्ट रूप से बाँटें ताकि आयोजन सुचारु रूप से चले।
- संसाधन इकट्ठा करें: आवश्यक सामग्री, दान और प्रचार सामग्री जुटाएँ।
- मान्यता दें: स्वयंसेवकों को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करें।
- कहानी साझा करें: कार्यक्रम के बाद अनुभूतियों और सफलताओं को सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में साझा करें।
स्वयंसेवा करने वालों के लिए लाभ | Benefits for those who volunteer
स्वयंसेवा करने वाले न केवल दूसरों की मदद करते हैं, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी कई लाभ मिलते हैं। उदाहरण के लिए, स्वयंसेवा से सामाजिक नेटवर्क बनते हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है और नए कौशल सीखने को मिलता है। युवाओं के लिए स्वयंसेवा रोजगार के अवसर खोल सकती है और रिज़्यूमे को मजबूत करती है। बुज़ुर्गों के लिए यह सामाजिक जुड़ाव का एक जरिया है। मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी स्वयंसेवा तनाव कम कर सकती है और व्यक्ति को उद्देश्य की भावना देती है।
स्वयंसेवा के प्रकार और रूप | Types and forms of volunteering
स्वयंसेवा के कई रूप होते हैं — कुछ सीधे समुदाय के साथ जुड़ने वाले हैं और कुछ दूरस्थ (रिमोट) काम के माध्यम से किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए:
- शिक्षा: बच्चों को पढ़ाना, ट्यूशन देना, लिटरेसी प्रोग्राम।
- स्वास्थ्य: हेल्थ कैंप, वैक्सीनेशन सहायता, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन।
- पर्यावरण: वृक्षारोपण, सफाई अभियान, जल संरक्षण परियोजनाएँ।
- आपदा राहत: राहत सामग्री वितरण, बचाव और पुनर्वास सहयोग।
- प्रशासनिक और तकनीकी समर्थन: एनजीओ के लिए डेटा एंट्री, सोशल मीडिया प्रबंधन, फंडरेज़िंग सहायता।
दूरस्थ स्वयंसेवा का चलन बढ़ा है — आप ऑनलाइन कौशल जैसे अनुवाद, कंटेंट लेखन या कोडिंग के ज़रिये भी योगदान दे सकते हैं।
निष्कर्ष: International Volunteer Day
International Volunteer Day हमें यह याद दिलाता है कि परिवर्तन केवल बड़े प्रयासों से नहीं, बल्कि हर छोटे योगदान से भी संभव है। स्वयंसेवकों की निस्वार्थ भावना, उनकी लगन और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दुनिया को अधिक दयालु, सुरक्षित और समावेशी बनाती है।
चाहे आप प्रत्यक्ष रूप से किसी समुदाय में काम करें, किसी अभियान का हिस्सा बनें, किसी संगठन को दान दें या केवल प्रेरक संदेश साझा करें — आपका हर कदम मायने रखता है। स्वयंसेवा न केवल समाज को लाभ देती है, बल्कि स्वयंसेवक को भी आत्मविश्वास, कौशल और संतुष्टि प्रदान करती है।
IVD 2025 की थीम “प्रत्येक योगदान मायने रखता है” हमें एक बार फिर यह प्रेरणा देती है कि हम सब मिलकर ही मजबूत समुदाय और बेहतर भविष्य बना सकते हैं। इसलिए, आइए स्वयंसेवा की इस भावना को केवल एक दिन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाकर हर दिन किसी न किसी रूप में सकारात्मक योगदान दें। Happy International Volunteer Day 2025!
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