महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2026 | International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation 2026

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हर लड़की का अधिकार: महिला जननांग विकृति के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संकल्प! | International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation 2026 | Female Genital Mutilation – FGM

महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) एक ऐसी हानिकारक प्रथा है जो लाखों लड़कियों और महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती है। यह न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, अधिकारों और गरिमा का भी गंभीर उल्लंघन करती है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रायोजित महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 6 फरवरी को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य इस प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाना, इसे पूरी तरह समाप्त करने के प्रयासों को मजबूत करना और महिलाओं एवं लड़कियों के अधिकारों की रक्षा करना है।

this is the image of Female Genital Mutilation awareness

2026 में यह दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि हम 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals – SDGs) की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसमें लैंगिक समानता और महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त करने का लक्ष्य शामिल है। इस दिवस का विषय है – “2030 की ओर: निरंतर प्रतिबद्धता और निवेश के बिना महिला जननांग विकृति का अंत संभव नहीं।” यह विषय हमें याद दिलाता है कि केवल जागरूकता ही काफी नहीं है; इसके लिए निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्तीय संसाधन, सामुदायिक भागीदारी और पीड़ितों की आवाज को सुनना जरूरी है।

महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस क्या है?

यह एक वार्षिक जागरूकता दिवस है जिसे संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा समर्थित किया जाता है। पहली बार 2003 में इसकी शुरुआत हुई थी और 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 6 फरवरी को आधिकारिक रूप से इस दिवस के रूप में घोषित किया। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य FGM को पूरी तरह समाप्त करना है।

हर साल 6 फरवरी को विश्व भर में कार्यक्रम, सेमिनार, सोशल मीडिया अभियान और सामुदायिक चर्चाएं आयोजित की जाती हैं। 2026 में भी यह दिवस 6 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन का उद्देश्य है:

  • FGM के हानिकारक प्रभावों को उजागर करना।
  • महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना।
  • 2030 तक इस प्रथा को समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई को तेज करना।
  • पीड़ितों की आवाज को मजबूत करना और उन्हें सहायता प्रदान करना।

वर्तमान में विश्व स्तर पर अनुमानित 23 करोड़ (230 मिलियन) महिलाएं और लड़कियां FGM की शिकार हो चुकी हैं। हर साल लगभग 40 लाख लड़कियां इस प्रथा से प्रभावित होती हैं। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो 2030 तक अतिरिक्त 22.7 करोड़ लड़कियां खतरे में पड़ सकती हैं।

स्त्री जननांग विकृति (FGM) क्या है?

स्त्री जननांग विकृति एक गैर-चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें लड़कियों या महिलाओं के बाहरी जननांगों (external female genitalia) को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया जाता है या उनमें चोट पहुंचाई जाती है। यह प्रक्रिया किसी भी चिकित्सकीय कारण से नहीं की जाती, बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक या सामाजिक मान्यताओं के नाम पर की जाती है।

FGM के मुख्य प्रकार हैं:

  1. क्लिटोरिडेक्टॉमी – क्लिटोरिस (भगशेफ) का आंशिक या पूर्ण हटाना।
  2. एक्सिशन – क्लिटोरिस और लेबिया मिनोरा का हटाना।
  3. इन्फिबुलेशन – सबसे गंभीर प्रकार, जिसमें लेबिया को सिल दिया जाता है और केवल छोटा छेद छोड़ा जाता है।
  4. अन्य प्रकार – जननांगों में चुभन, काटना या अन्य नुकसान पहुंचाना।

यह प्रथा मुख्य रूप से 5 वर्ष की आयु से पहले या किशोरावस्था में की जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इसे पूरी तरह हानिकारक मानता है और कहता है कि इसमें कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं है।

FGM के स्वास्थ्य प्रभाव

FGM के प्रभाव अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों होते हैं। ये प्रभाव शारीरिक, यौन और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ते हैं।

अल्पकालिक प्रभाव:

  • तीव्र दर्द
  • अत्यधिक रक्तस्राव
  • संक्रमण (जिससे सेप्सिस या टेटनस हो सकता है)
  • सदमा (shock)
  • मूत्र या मल त्याग में समस्या

दीर्घकालिक प्रभाव:

  • लगातार श्रोणि दर्द
  • मूत्र पथ संक्रमण
  • मासिक धर्म संबंधी समस्याएं
  • यौन संबंधों में दर्द (डिस्पेरुनिया)
  • प्रसव के दौरान जटिलताएं (जिससे मां और बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ता है)
  • मनोवैज्ञानिक आघात – चिंता, अवसाद, PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर)
  • नवजात शिशु मृत्यु दर में वृद्धि

ये प्रभाव जीवन भर बने रहते हैं और पीड़ित की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करते हैं।

वैश्विक प्रसार और आंकड़े

FGM मुख्य रूप से 29 देशों में प्रचलित है, जिनमें अधिकांश अफ्रीका और मध्य पूर्व के हैं। लेकिन यह एशिया, लैटिन अमेरिका और प्रवासी समुदायों (यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) में भी पाई जाती है।

कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े:

  • आज जीवित 23 करोड़ से अधिक महिलाएं FGM की शिकार हैं।
  • हर साल 40 लाख लड़कियां खतरे में हैं।
  • 2030 तक यदि प्रगति नहीं तेज हुई तो 27 मिलियन अतिरिक्त लड़कियां प्रभावित हो सकती हैं।
  • 20 लाख से अधिक लड़कियां 5 वर्ष से कम उम्र में इस प्रक्रिया से गुजरती हैं।
  • अमेरिका में FGM प्रभावित महिलाओं की संख्या 1990 के मुकाबले तीन गुना बढ़ गई है।

WHO के अनुसार, यह प्रथा हजारों वर्ष पुरानी है लेकिन साक्ष्य बताते हैं कि इसे एक पीढ़ी में समाप्त किया जा सकता है।

इतिहास

महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) के खिलाफ जागरूकता फैलाने और इसे पूरी तरह समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस। यह दिवस हर साल 6 फरवरी को मनाया जाता है।

इस दिवस की शुरुआत 6 फरवरी 2003 को हुई, जब नाइजीरिया की प्रथम महिला स्टेला ओबासांजो ने अफ्रीकी महाद्वीप में “FGM के प्रति शून्य सहिष्णुता” की आधिकारिक घोषणा की। यह घोषणा इंटर-अफ्रीकन कमिटी ऑन ट्रेडिशनल प्रैक्टिसेज अफेक्टिंग द हेल्थ ऑफ वुमेन एंड चिल्ड्रन (IAC) द्वारा इथियोपिया में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान की गई थी। स्टेला ओबासांजो, जो FGM के खिलाफ अभियान की प्रवक्ता भी थीं, ने अफ्रीकी प्रथम महिलाओं की ओर से इस दिन को “शून्य सहिष्णुता दिवस” के रूप में नामित किया। IAC ने इसे अफ्रीका में हानिकारक पारंपरिक प्रथाओं के खिलाफ एक बड़ा कदम माना।

इस घोषणा के बाद, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उप-आयोग ने 6 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर FGM के खिलाफ शून्य सहिष्णुता के दिवस के रूप में अपनाया। यह कदम FGM को मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में मान्यता देने और वैश्विक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण था।

2012 में इस दिवस को और मजबूती मिली, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव A/RES/67/146 पारित किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से 6 फरवरी को आधिकारिक रूप से महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों, नागरिक समाज, विकास साझेदारों और अन्य हितधारकों को FGM के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने और ठोस कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना था। यह प्रस्ताव 2030 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ जुड़ा हुआ है, जिसमें लक्ष्य 5.3 के तहत सभी हानिकारक प्रथाओं, विशेषकर FGM, को समाप्त करना शामिल है।

2008 से UNFPA और UNICEF का संयुक्त कार्यक्रम FGM उन्मूलन के लिए सबसे बड़ा वैश्विक प्रयास चल रहा है, जिसने लाखों लड़कियों को सुरक्षा प्रदान की है। इस दिवस ने कार्यकर्ताओं, जैसे ब्रिस्टल की फाहमा मोहम्मद (2014 में Change.org याचिका), को भी प्रेरित किया, जिनके प्रयासों से कई देशों में नीतियां बदलीं।

आज यह दिवस प्रगति का जश्न मनाने, चुनौतियों पर चर्चा करने और 2030 तक FGM-मुक्त विश्व बनाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर है। यह इतिहास अफ्रीकी नेतृत्व से शुरू होकर वैश्विक आंदोलन तक पहुंचा है, जो बताता है कि सामूहिक प्रयास से हानिकारक प्रथाओं को समाप्त किया जा सकता है।

प्रमुख कार्यकर्ता और अभियान

FGM के खिलाफ कई युवा और महिलाएं आगे आई हैं।

फाहमा मोहम्मद – ब्रिस्टल (यूके) की 17 वर्षीय छात्रा ने 2014 में Change.org पर याचिका दायर की। उन्होंने ब्रिटेन के शिक्षा सचिव से स्कूलों में FGM जागरूकता के लिए पत्र भेजने का अनुरोध किया। याचिका को 2.3 लाख से अधिक समर्थन मिला। इसके परिणामस्वरूप शिक्षा सचिव ने सभी प्रधानाध्यापकों को दिशानिर्देश भेजे, जिसमें FGM का विशेष उल्लेख था।

अन्य अभियान:

  • #EndFGM
  • #Invest2EndFGM
  • इक्वालिटी नाउ (Equality Now) – सरकारों को जवाबदेह ठहराने का नेटवर्क।
  • यूएनएफपीए-यूनिसेफ संयुक्त कार्यक्रम (2008 से) – सबसे बड़ा वैश्विक प्रयास।

ये अभियान सामुदायिक स्तर पर मानदंड बदलने, स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और कानूनी सुधारों पर केंद्रित हैं।

मानव अधिकारों का उल्लंघन

FGM महिलाओं और लड़कियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। यह उनके:

  • शारीरिक अखंडता के अधिकार
  • स्वास्थ्य के अधिकार
  • समानता के अधिकार
  • शिक्षा और विकास के अधिकार

का हनन करता है।

यूनिसेफ की पूर्व कार्यकारी निदेशक कैरोल बेलामी ने कहा कि FGM महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है और यह उनके स्वास्थ्य, प्रसव क्षमता और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

संयुक्त राष्ट्र के अभियान “एवरी वुमन, एवरी चाइल्ड” में कहा गया है कि FGM लैंगिक असमानता का चरम रूप है और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव है।

2026 का विषय: “2030 की ओर: निरंतर प्रतिबद्धता और निवेश के बिना महिला जननांग विकृति का अंत संभव नहीं”

महिला जननांग विकृति (FGM) के प्रति शून्य सहिष्णुता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 6 फरवरी को मनाया जाता है। 2026 में इस दिवस का मुख्य विषय है “Towards 2030: No end to female genital mutilation without sustained commitment and investment”, जिसे हिंदी में “2030 की ओर: निरंतर प्रतिबद्धता और निवेश के बिना महिला जननांग विकृति का अंत संभव नहीं” कहा जा सकता है। यह विषय संयुक्त राष्ट्र, यूएनएफपीए और यूनिसेफ के संयुक्त कार्यक्रम द्वारा अपनाया गया है।

यह विषय 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर केंद्रित है, जहां लक्ष्य 5.3 के तहत FGM को पूरी तरह समाप्त करना शामिल है। वर्तमान में विश्व भर में 23 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां FGM की शिकार हैं। हर साल लगभग 44 लाख लड़कियां इस हानिकारक प्रथा के खतरे में हैं। पिछले 30 वर्षों में प्रगति हुई है – अब कोई लड़की 30 साल पहले की तुलना में एक-तिहाई कम संभावना से FGM का शिकार होती है – लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। 2030 तक लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रगति की गति को 10-27 गुना तेज करना होगा।

विषय इस बात पर जोर देता है कि केवल जागरूकता या कानून ही काफी नहीं। इसके लिए निरंतर राजनीतिक प्रतिबद्धता, लचीला और पर्याप्त वित्तीय निवेश, सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई, सरवाइवर-लीड मूवमेंट्स और सरकारों, नागरिक समाज, युवाओं तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की साझेदारी जरूरी है। प्रत्येक $1 का निवेश FGM रोकने में $10 का लाभ देता है, जबकि उपचार पर सालाना 1.4 बिलियन डॉलर खर्च होता है।

2026 में यूएनएफपीए-यूनिसेफ कार्यक्रम सभी से आह्वान करता है कि हम प्रतिबद्धताओं को नवीनीकृत करें, हासिल प्रगति की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि हर महिला-लड़की FGM से मुक्त जीवन जी सके। #Invest2EndFGM और #EndFGM जैसे हैशटैग से अभियान को मजबूत करें। यह विषय हमें याद दिलाता है – 2030 तक FGM मुक्त विश्व संभव है, लेकिन इसके लिए आज से लगातार प्रयास और संसाधन जरूरी हैं।

2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य और चुनौतियां

सतत विकास लक्ष्यों में FGM को समाप्त करने का लक्ष्य है। लेकिन प्रगति धीमी है। पिछले 30 वर्षों में आधी प्रगति पिछले दशक में हुई, लेकिन गिरावट की दर को 27 गुना तेज करना होगा।

चुनौतियां:

  • संसाधनों की कमी
  • लैंगिक समानता के खिलाफ बढ़ता विरोध
  • सामाजिक और लैंगिक मानदंड
  • स्थानीय संगठनों के लिए वित्तीय अनिश्चितता
  • महामारी और संकटों का प्रभाव

आवश्यकता:

  • राजनीतिक नेतृत्व
  • वित्तीय निवेश
  • सामुदायिक कार्रवाई
  • पीड़ितों की आवाज सुनना
  • साक्ष्य-आधारित कार्यक्रम

निवेश का लाभ: प्रत्येक $1 निवेश पर $10 का रिटर्न। वहीं स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार पर सालाना 1.4 बिलियन डॉलर खर्च होता है।

यूएनएफपीए-यूनिसेफ संयुक्त कार्यक्रम

यूएनएफपीए (संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष – United Nations Population Fund) और यूनिसेफ (संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – United Nations Children’s Fund) का संयुक्त कार्यक्रम महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) के उन्मूलन पर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे लंबा चलने वाला वैश्विक प्रयास है। इसे UNFPA-UNICEF Joint Programme on the Elimination of Female Genital Mutilation कहा जाता है। यह कार्यक्रम 2008 में शुरू हुआ और आज भी सक्रिय है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य FGM को 2030 तक पूरी तरह समाप्त करना है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का हिस्सा है, विशेषकर लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के अंतर्गत। FGM एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जो लाखों लड़कियों और महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और यौन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। वर्तमान में विश्व भर में 230 मिलियन से अधिक महिलाएं और लड़कियां इस प्रथा की शिकार हैं।

कार्यक्रम मुख्य रूप से 18 देशों पर केंद्रित है: बुर्किना फासो, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इथियोपिया, गाम्बिया, गिनी, गिनी-बिसाऊ, इंडोनेशिया, केन्या, माली, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, सोमालिया, सूडान, युगांडा और यमन। ये देश अफ्रीका और एशिया में FGM के उच्च प्रसार वाले क्षेत्र हैं।

कार्यक्रम की रणनीतियां:

  • सामुदायिक स्तर पर सामाजिक और लैंगिक मानदंडों को बदलना।
  • सरकारों, स्थानीय संगठनों, धार्मिक नेताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और महिलाओं के साथ साझेदारी।
  • रोकथाम, सुरक्षा सेवाएं, शिक्षा और जागरूकता अभियान।
  • कानूनी सुधारों का समर्थन और चिकित्सकीयकरण (medicalization) को रोकना।
  • महिलाओं और लड़कियों की आवाज को केंद्र में रखना, विशेषकर FGM से बची महिलाओं को सशक्त बनाना।

2008 से अब तक के परिणाम प्रभावशाली हैं:

  • लगभग 72 लाख लड़कियों और महिलाओं को रोकथाम और सुरक्षा सेवाएं मिलीं।
  • 20,000 से अधिक समुदायों ने FGM छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा की।
  • 36,000 से अधिक सामुदायिक और फ्रंटलाइन कार्यकर्ता शामिल हुए।
  • कई देशों में प्रथा की दर में कमी आई, जैसे केन्या और युगांडा में।

कार्यक्रम को बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नॉर्वे, स्पेन, स्वीडन, यूके, यूएसए और यूरोपीय संघ जैसे दाताओं से सहायता मिलती है। यह UNFPA और UNICEF की साझेदारी में WHO के साथ भी काम करता है।

2026 में भी यह कार्यक्रम 6 फरवरी (शून्य सहिष्णुता दिवस) पर #Invest2EndFGM और #EndFGM जैसे हैशटैग के साथ कार्रवाई का आह्वान करता है। चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे संसाधनों की कमी और विरोध, लेकिन निरंतर निवेश और सामुदायिक भागीदारी से 2030 का लक्ष्य संभव है। यह कार्यक्रम दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर हानिकारक प्रथाओं को समाप्त किया जा सकता है।

महिला जननांग विकृति के बारे में 5 बातें जो आपको जाननी चाहिए

हर साल 6 फरवरी को दुनिया भर में महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Zero Tolerance for Female Genital Mutilation) मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र, यूएनएफपीए (UNFPA), यूनिसेफ (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे संगठन इस दिन के माध्यम से इस हानिकारक प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं। यह प्रथा लाखों लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों, स्वास्थ्य और गरिमा का उल्लंघन करती है।

यह एक क्रूर, अनावश्यक और पूरी तरह से हानिकारक प्रथा है, जिसे विश्व स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन माना जाता है। 2030 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में शामिल है, लेकिन अभी भी प्रगति धीमी है। आज के समय में लगभग 23 करोड़ (230 मिलियन) से अधिक महिलाएं और लड़कियां इस प्रथा की शिकार हो चुकी हैं, और हर साल लाखों लड़कियां खतरे में हैं।

नीचे महिला जननांग विकृति (FGM) के बारे में 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं, जो हर व्यक्ति को जाननी चाहिए। ये तथ्य UNFPA, UNICEF, WHO और अन्य विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित हैं:

1. महिला जननांग विकृति (FGM) क्या है और यह वैश्विक समस्या क्यों है?

महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) वह प्रक्रिया है जिसमें गैर-चिकित्सीय कारणों से महिलाओं या लड़कियों के बाहरी जननांगों (external female genitalia) को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया जाता है या उनमें चोट पहुंचाई जाती है। इसमें कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक रूप से हानिकारक है।

यह प्रथा मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में प्रचलित है, लेकिन अब प्रवासन के कारण यह 92 देशों में फैल चुकी है, जिसमें यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अन्य भाग भी शामिल हैं। यह किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है – यह सांस्कृतिक, सामाजिक और कभी-कभी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी होती है। लेकिन कोई भी प्रमुख धर्म इसे अनिवार्य नहीं मानता।

यह प्रथा अक्सर लड़कियों को “शुद्ध” बनाने, विवाह योग्य बनाने या सामुदायिक स्वीकृति दिलाने के नाम पर की जाती है। लेकिन वास्तव में यह लैंगिक असमानता और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का चरम रूप है।

2. FGM महिलाओं और लड़कियों के मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन है

संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन FGM को लड़कियों एवं महिलाओं के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हैं। यह उनके निम्नलिखित अधिकारों का हनन करता है:

  • शारीरिक अखंडता (bodily integrity) का अधिकार
  • स्वास्थ्य और चिकित्सा का अधिकार
  • समानता और भेदभाव से मुक्ति का अधिकार
  • यौन और प्रजनन स्वास्थ्य का अधिकार

यह प्रथा महिलाओं को नियंत्रित करने और उनकी स्वायत्तता छीनने का एक तरीका है। UNICEF की पूर्व कार्यकारी निदेशक कैरोल बेलामी ने कहा था कि FGM महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है, जो उनके स्वास्थ्य, प्रसव क्षमता और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

यह प्रथा लड़कियों को बचपन से ही हिंसा का शिकार बनाती है और उनके पूरे जीवन को प्रभावित करती है।

3. FGM के गंभीर और आजीवन स्वास्थ्य प्रभाव होते हैं

FGM से तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। अल्पकालिक प्रभाव:

  • तीव्र दर्द और सदमा
  • अत्यधिक रक्तस्राव
  • संक्रमण (सेप्सिस, टेटनस आदि)
  • मूत्र या मल त्याग में कठिनाई

दीर्घकालिक प्रभाव:

  • लगातार श्रोणि दर्द
  • बार-बार मूत्र पथ संक्रमण
  • मासिक धर्म में जटिलताएं
  • यौन संबंधों में दर्द (डिस्पेरुनिया)
  • प्रसव के दौरान जटिलताएं (मां और बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ना)
  • मनोवैज्ञानिक आघात – चिंता, अवसाद, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)

WHO के अनुसार, FGM से प्रभावित माताओं के बच्चों में नवजात मृत्यु का खतरा अधिक होता है। यह प्रथा महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता को हमेशा के लिए खराब कर देती है।

4. FGM अब भी बहुत बड़ी संख्या में हो रही है, लेकिन प्रगति भी हो रही है

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार:

  • 23 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां FGM की शिकार हैं।
  • 2024 में 44 लाख लड़कियां खतरे में थीं – यानी रोजाना 12,000 से अधिक मामले।
  • हर साल 40 लाख लड़कियां इस प्रथा से प्रभावित होती हैं।
  • 2030 तक यदि कार्रवाई नहीं तेज हुई तो अतिरिक्त लाखों लड़कियां खतरे में पड़ सकती हैं।

अच्छी खबर यह है कि पिछले तीन दशकों में कई देशों में प्रथा में कमी आई है। कुछ देशों में 15-19 वर्ष की लड़कियों में प्रथा की दर आधी हो गई है। 20,000 से अधिक समुदायों ने सामूहिक रूप से FGM छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा की है। UNFPA-UNICEF संयुक्त कार्यक्रम ने 18 देशों में बड़े पैमाने पर काम किया है।

लेकिन प्रगति पर्याप्त नहीं है – 2030 के लक्ष्य को पाने के लिए गिरावट की दर को बहुत तेज करना होगा।

5. समुदाय और शिक्षा से ही FGM को समाप्त किया जा सकता है – हर व्यक्ति भाग ले सकता है

FGM को समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका सामुदायिक स्तर पर बदलाव है। जब पूरा समुदाय मिलकर इस प्रथा को छोड़ने का फैसला करता है, तो कोई एक परिवार या लड़की अकेली नहीं पड़ती।

स्थानीय कार्यकर्ता, विशेषकर प्रभावित महिलाएं और युवा, धार्मिक नेताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर मानदंड बदल रहे हैं। UNICEF ने 2019 से 3,000 से अधिक पहलों में पुरुषों और लड़कों को शामिल किया है, जिससे कई देशों में FGM के खिलाफ पुरुषों में विरोध बढ़ा है।

शिक्षा और जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण हैं। परिवारों को तथ्यों से अवगत कराना, युवाओं को सशक्त बनाना और कानूनी प्रतिबंधों को लागू करना जरूरी है। UNFPA-UNICEF कार्यक्रम के तहत कई देशों में कानून बनाए गए हैं और नीतियां लागू की गई हैं।

आप क्या कर सकते हैं?

  • जागरूकता फैलाएं – #EndFGM और #Invest2EndFGM हैशटैग का उपयोग करें।
  • स्थानीय संगठनों का समर्थन करें।
  • लड़कियों की शिक्षा और अधिकारों की वकालत करें।
  • इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं।

FAQs: Female Genital Mutilation 2026

प्रश्न 1: महिला जननांग विकृति (FGM) क्या है?

उत्तर: महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation) एक गैर-चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें महिलाओं या लड़कियों के बाहरी जननांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से काटा या क्षतिग्रस्त किया जाता है। यह शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत हानिकारक है।

प्रश्न 2: महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर: यह दिवस हर वर्ष 6 फरवरी को मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा महिला जननांग विकृति के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए मान्यता दी गई है।

प्रश्न 3: इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका उद्देश्य FGM के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों और मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा इस प्रथा को वैश्विक स्तर पर पूरी तरह समाप्त करना है।

प्रश्न 4: महिला जननांग विकृति किन देशों में अधिक प्रचलित है?

उत्तर: यह प्रथा मुख्य रूप से अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में पाई जाती है, लेकिन प्रवासन के कारण यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में भी मौजूद है।

प्रश्न 5: FGM के स्वास्थ्य पर क्या दुष्प्रभाव होते हैं?

उत्तर: इसके दुष्प्रभावों में तीव्र दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, प्रसव संबंधी जटिलताएँ, दीर्घकालिक शारीरिक दर्द और गंभीर मानसिक आघात शामिल हैं।

प्रश्न 6: क्या महिला जननांग विकृति कानूनी है?

उत्तर: कई देशों में FGM को कानूनन अपराध घोषित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों द्वारा इसे स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

प्रश्न 7: 2030 तक महिला जननांग विकृति को समाप्त करने का लक्ष्य क्यों रखा गया है?

उत्तर: यह लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 8: महिला जननांग विकृति को समाप्त करने में कौन-सी संस्थाएँ काम कर रही हैं?

उत्तर: यूएनएफपीए और यूनिसेफ का संयुक्त कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), स्थानीय एनजीओ और महिला अधिकार संगठन इस प्रथा के उन्मूलन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

प्रश्न 9: आम लोग इस अभियान में कैसे योगदान दे सकते हैं?

उत्तर: लोग जागरूकता फैलाकर, शिक्षा को बढ़ावा देकर, पीड़ितों का समर्थन करके और #EndFGM जैसे अभियानों से जुड़कर इस आंदोलन में योगदान दे सकते हैं।

प्रश्न 10: शून्य सहनशीलता का क्या अर्थ है?

उत्तर: शून्य सहनशीलता का अर्थ है कि महिला जननांग विकृति के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ सख्त सामाजिक, कानूनी और नैतिक कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष और कार्रवाई का आह्वान: Female Genital Mutilation 2026

महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation) केवल एक हानिकारक परंपरा नहीं, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकारों, स्वास्थ्य और गरिमा पर सीधा हमला है। दशकों की जागरूकता और प्रयासों के बावजूद आज भी करोड़ों महिलाएँ इसके दुष्परिणाम झेल रही हैं। यह स्पष्ट है कि बिना निरंतर प्रतिबद्धता, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, पर्याप्त निवेश और सामुदायिक सहभागिता के इस प्रथा का अंत संभव नहीं है।

अब समय आ गया है कि हम सिर्फ दर्शक न बने रहें, बल्कि बदलाव का हिस्सा बनें। सरकारों को सख्त कानून और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा, समुदायों को सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने के लिए आगे आना होगा, और नागरिक समाज व युवा नेतृत्व को अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी। हर व्यक्ति—चाहे वह शिक्षक हो, अभिभावक हो, स्वास्थ्यकर्मी हो या नीति-निर्माता—इस लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकता है।

आइए, महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहनशीलता को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे एक सतत आंदोलन बनाएं। जागरूकता फैलाएँ, पीड़ितों का समर्थन करें, और #EndFGM के लिए ठोस कदम उठाएँ। मिलकर ही हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जहाँ हर लड़की और महिला भय, दर्द और हिंसा से मुक्त जीवन जी सके।

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