Semicon 2.0 Scheme 2026: ₹1.27 लाख करोड़ की योजना लागू, क्या बदला?

Last Updated: सितम्बर 7, 2026

Table of Contents

₹1.27 लाख करोड़ की Semicon 2.0 योजना क्या है और किसे लाभ मिलेगा? | Semicon 2.0 Notification | Semiconductor Manufacturing Subsidy in India | Union Cabinet Approved Semicon 2.0 | Semicon 2.0 Application Process | India Semiconductor Mission 2.0

भारत सरकार ने देश में चिप डिजाइन और निर्माण का संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करने के लिए Semicon 2.0 Scheme लागू कर दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को कार्यक्रम मंजूर किया था और इसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।

इसके बाद 31 अगस्त 2026 को योजना के सभी छह स्तंभों से जुड़ी अधिसूचनाएं जारी कर दी गईं। यानी यह कार्यक्रम अब केवल नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि आवेदन और क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुका है। Semicon 2.0 आधिकारिक पोर्टल

this is the image of Semiconductor Manufacturing Subsidy in India 2026

एक नजर में Semicon 2.0 की मुख्य बातें!

विषय आधिकारिक जानकारी
योजना का नाम Semicon India Programme 2.0
मंत्रिमंडल की मंजूरी 15 जुलाई 2026
अधिसूचनाएं जारी 31 अगस्त 2026
कुल वित्तीय परिव्यय ₹1,27,500 करोड़
प्रमुख स्तंभ डिजाइन, मशीनें एवं सामग्री, फैब, ATMP/OSAT, R&D और प्रतिभा
आवेदन अवधि शुरुआती तौर पर तीन वर्ष
परियोजना अवधि परियोजना के आधार पर सामान्यतः छह वर्ष तक
नोडल संस्था India Semiconductor Mission
पहला भारतीय फैब 2028 तक चालू होने की उम्मीद
प्रमुख लाभार्थी भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप, MSME, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान

Semicon का मतलब क्या है?

Semicon, semiconductor का संक्षिप्त रूप है। सेमीकंडक्टर ऐसी विशेष सामग्री होती है जिसकी विद्युत चालकता किसी सुचालक और कुचालक के बीच होती है।

सिलिकॉन जैसे सेमीकंडक्टर से छोटे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और माइक्रोचिप बनाए जाते हैं। ये चिप आज लगभग हर डिजिटल उत्पाद का दिमाग हैं—स्मार्टफोन, लैपटॉप, कार, ड्रोन, मेडिकल उपकरण, डेटा सेंटर, स्मार्ट मीटर और रक्षा प्रणालियों तक।

सरल शब्दों में, जिस तरह किसी मशीन को चलाने के लिए ऊर्जा चाहिए, उसी तरह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को नियंत्रित करने के लिए सेमीकंडक्टर चिप चाहिए।

Semicon 2.0 Scheme क्या है?

यह भारत सरकार का ₹1,27,500 करोड़ का semiconductor programme है, जो chip design, fabrication, packaging, equipment, R&D और talent development को सहायता देता है।

Semicon 2.0, दिसंबर 2021 में शुरू हुए Semicon India Programme 1.0 का अगला और अधिक व्यापक चरण है। इसका लक्ष्य केवल भारत में कुछ चिप संयंत्र स्थापित करना नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, मशीनों, सामग्री, अनुसंधान और प्रशिक्षित कर्मचारियों तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है।

सरकार इसे एक मजबूत, विश्वसनीय और रणनीतिक रूप से सुरक्षित semiconductor ecosystem के रूप में विकसित करना चाहती है।

सीधा उत्तर: Semicon 1.0 ने भारत में उद्योग की बुनियाद और शुरुआती परियोजनाएं तैयार कीं। Semicon 2.0 उस बुनियाद को गहरा करते हुए घरेलू तकनीक, ज्यादा फैब, उन्नत पैकेजिंग, उपकरण निर्माण और भारतीय चिप IP पर जोर देता है।

Semicon 2.0 Scheme की लॉन्च डेट क्या है?

इस योजना से जुड़ी तीन तारीखों को अलग-अलग समझना चाहिए:

  • दिसंबर 2021: ₹76,000 करोड़ के साथ Semicon 1.0 शुरू हुआ।
  • 15 जुलाई 2026: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1,27,500 करोड़ के Semicon 2.0 को मंजूरी दी।
  • 31 अगस्त 2026: इसके सभी छह स्तंभों की अधिसूचनाएं जारी की गईं।

इसलिए “Semicon 2.0 scheme launch date” खोजने वालों के लिए 15 जुलाई 2026 इसकी मंजूरी की तारीख और 31 अगस्त 2026 इसके अधिसूचित क्रियान्वयन की प्रमुख तारीख है।

Semicon 2.0 के छह प्रमुख स्तंभ कौन-से हैं?

1. भारतीय चिप डिजाइन और IP

योजना का पहला स्तंभ भारतीय कंपनियों को semiconductor IP, chips, System-on-Chips यानी SoCs और इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल विकसित करने में सहायता देना है।

इसके तीन प्रमुख क्षेत्र हैं:

  • राष्ट्रीय महत्व और रणनीतिक जरूरतों के लिए चिप डिजाइन
  • व्यावसायिक उत्पादों के लिए IP, चिप और SoC
  • भारतीय चिप के वास्तविक उपयोग को बढ़ाने के लिए Deployment-Linked Incentive

सरकार का उद्देश्य भारत को सिर्फ दूसरे देशों के लिए डिज़ाइन सेवाएं देने वाला देश नहीं, बल्कि अपनी बौद्धिक संपदा और उत्पादों वाला fabless design hub बनाना है।

2. मशीनें, सामग्री और विशेष रसायन

चिप फ़ैक्टरी को केवल सिलिकॉन वेफ़र की ज़रूरत नहीं होती। उसमें बेहद सटीक मशीनें, औद्योगिक गैसें, फोटोरेजिस्ट, विशेष रसायन और कई महत्वपूर्ण सामग्री इस्तेमाल होती हैं।

Semicon 2.0 इनके घरेलू निर्माण एवं अनुसंधान को बढ़ावा देगा। इससे भारत की विदेशी उपकरणों और संवेदनशील आपूर्ति शृंखलाओं पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है।

Semiconductor equipment के घरेलू निर्माण को विशेष PLI

Semicon 2.0 में semiconductor fabrication और packaging में इस्तेमाल होने वाले equipment, refurbished machines, components और sub-assemblies के घरेलू निर्माण को अतिरिक्त Production-Linked Incentive देने का प्रावधान है।

Domestic manufacturers से प्राप्त Bill of Materials यानी BOM value पर पांच वर्षों में क्रमशः:

  • पहले वर्ष 10%
  • दूसरे वर्ष 8%
  • तीसरे वर्ष 6%
  • चौथे वर्ष 4%
  • पांचवें वर्ष 2%

तक incentive मिल सकता है।

यह PLI वित्त वर्ष 2028-29 से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए प्रस्तावित है। कुल सरकारी सहायता eligible capital expenditure के 50% की overall limit के अधीन होगी।

3. भारत में ज्यादा फैब स्थापित करना

योजना सिलिकॉन फैब के साथ निम्न परियोजनाओं को आकर्षित करेगी:

  • कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब
  • डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब
  • डिस्प्ले फैब
  • विशेष और उन्नत तकनीक वाली निर्माण इकाइयां

सरकारी जानकारी के अनुसार भारत का पहला सेमीकंडक्टर फैब 2028 में चालू होने की उम्मीद है। हालांकि वास्तविक उत्पादन आरंभ होना परियोजना निर्माण, उपकरण स्थापना और क्वालिफिकेशन समयसीमा पर निर्भर करेगा।

4. ATMP और OSAT उद्योग

ATMP का अर्थ Assembly, Testing, Marking and Packaging है, जबकि OSAT का अर्थ Outsourced Semiconductor Assembly and Test है।

वेफर पर चिप बनने के बाद उसे काटना, पैकेज करना, कनेक्शन देना और गुणवत्ता की जांच करना आवश्यक होता है। Semicon 2.0 भारत में उन्नत पैकेजिंग तकनीकों और बड़े पैमाने की परीक्षण क्षमताओं को विकसित करेगा।

5. अनुसंधान एवं विकास

भारत की शुरुआती semiconductor manufacturing यात्रा 28nm से 110nm जैसे नोड से शुरू हुई है। अगला लक्ष्य देश और विदेश के अग्रणी अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर अधिक उन्नत नोड तथा नई तकनीक विकसित करना है।

इसमें AI-केंद्रित चिप, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, मेमोरी, रेडियो फ्रीक्वेंसी और नेटवर्किंग तकनीकों के लिए अनुसंधान महत्वपूर्ण होगा।

Advanced semiconductor R&D को 75% तक सहायता

Semicon 2.0 के अंतर्गत पात्र R&D project को Capex और Opex सहित project cost का 75% तक समर्थन दिया जा सकता है। इसमें राज्य सरकार के incentives भी शामिल होंगे।

प्रमुख research areas में शामिल हैं:

  • CMOS-based fabrication technology;
  • silicon photonics;
  • display fabrication;
  • chiplet-based advanced packaging;
  • semiconductor से जुड़ी अन्य emerging technologies।

Semiconductor companies अकेले या academic institutions और R&D organisations के consortium के रूप में प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती हैं। जरूरत के अनुसार परियोजना को Research, Development and Innovation Scheme से आंशिक funding भी मिल सकती है।

6. प्रतिभा और कौशल विकास

भारत के 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक Electronic Design Automation यानी EDA टूल का उपयोग किया जा रहा है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के समय उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 68,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका था।

आगे प्रशिक्षण को चिप डिजाइन के साथ क्लीन रूम संचालन, फैब निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग तक विस्तारित किया जाएगा।

विद्यार्थियों से लेकर fab operators तक तैयार होंगे विशेषज्ञ

Semicon 2.0 का talent programme केवल engineering students तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य undergraduate, postgraduate और doctoral researchers के साथ shop-floor technicians तथा fab operators को भी प्रशिक्षित करना है।

Eligible organisations में शामिल हैं:

  • भारतीय शैक्षणिक संस्थान;
  • R&D organisations और laboratories;
  • scientific institutions;
  • घरेलू training institutions।

इन projects को Capex और Opex सहित कुल लागत का 75% तक समर्थन मिल सकता है। सहायता का उपयोग advanced EDA tools, MPW fabrication, post-silicon verification, nanofabrication laboratories और practical fab-training infrastructure के लिए किया जा सकता है।

Semicon 2.0 के 6 स्तंभों में कौन-सी 10 श्रेणियां शामिल हैं?

Semicon 2.0 को छह व्यापक स्तंभों के अंतर्गत कुल 10 पात्र श्रेणियों में बांटा गया है। इससे चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, अनुसंधान और कौशल विकास तक पूरी semiconductor value chain को सहायता दी जा सकेगी।

स्तंभ पात्र श्रेणी
डिजाइन राष्ट्रीय और रणनीतिक महत्व के लिए semiconductor IP, chip, SoC एवं module design
डिजाइन व्यावसायिक क्षेत्र के लिए semiconductor IP, chip और SoC design
डिजाइन भारतीय chips और SoCs के deployment के लिए DLI
मशीन एवं सामग्री semiconductor equipment, raw materials, testing और characterisation
अधिक फैब silicon semiconductor wafer fab
अधिक फैब compound semiconductor, photonics, MEMS sensor और discrete semiconductor fab
अधिक फैब OLED, Micro-LED और LCD display fab
ATMP/OSAT advanced और legacy semiconductor packaging
अनुसंधान एवं विकास advanced semiconductor technologies की R&D
प्रतिभा विकास design, fabrication, packaging और shop-floor training

यह वर्गीकरण Semicon 2.0 को Semicon 1.0 की तुलना में अधिक व्यापक बनाता है। नई योजना केवल बड़े fabrication plants तक सीमित नहीं है, बल्कि equipment suppliers, material manufacturers, design startups, research institutions और training organisations को भी शामिल करती है।

Semicon 1.0 और Semicon 2.0 में क्या अंतर है? – Semicon 2.0 vs. Semicon 1.0

आधार Semicon 1.0 Semicon 2.0
शुरुआत दिसंबर 2021 जुलाई 2026 में मंजूरी
परिव्यय ₹76,000 करोड़ ₹1,27,500 करोड़
प्राथमिक लक्ष्य घरेलू निर्माण की आधारशिला संपूर्ण इकोसिस्टम की गहराई और विस्तार
प्रमुख फोकस फैब, डिस्प्ले, ATMP/OSAT और DLI डिजाइन से मशीन, सामग्री, R&D और प्रतिभा तक
डिजाइन सहायता शुरुआती Design Linked Incentive रणनीतिक, व्यावसायिक और deployment आधारित मॉडल
सप्लाई चेन निर्माण इकाइयों पर जोर घरेलू उपकरण, गैस और विशेष सामग्री भी शामिल
उद्योग चरण निवेश आकर्षित करना उत्पादन, क्षमता विस्तार और भारतीय IP विकसित करना

Semicon 1.0 की शुरुआत ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन ढांचे के साथ हुई थी। इसमें semiconductor fabs, display fabs, compound semiconductor तथा ATMP/OSAT इकाइयों और Design Linked Incentive को शामिल किया गया था। Semicon 1.0 आधिकारिक विवरण

Semicon 1.0 ने अब तक क्या हासिल किया?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार Semicon 1.0 के अंतर्गत ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्तावित निवेश वाली 12 निर्माण इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है।

इनमें शामिल हैं:

  • एक सिलिकॉन फैब
  • एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब
  • एक इंटीग्रेटेड गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-LED डिस्प्ले फैब
  • नौ पैकेजिंग इकाइयां

माइक्रोन, केन्स और CG Semi ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया था, जबकि एक अन्य इकाई का उत्पादन 2026 में आरंभ होने की उम्मीद बताई गई।

डिजाइन क्षेत्र में 24 स्टार्टअप एवं MSME परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मंजूर हुई। इसके अतिरिक्त 105 स्टार्टअप और MSME को उद्योग-मानक EDA टूल उपलब्ध कराए गए। ये कंपनियां ड्रोन, उपग्रह संचार, AI सिस्टम, स्मार्ट मीटर, कैमरा, IoT और दूरसंचार के लिए चिप एवं SoC विकसित कर रही हैं।

Semicon 2.0 में कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी?

सहायता की राशि और मॉडल संबंधित स्तंभ तथा परियोजना श्रेणी के अनुसार अलग हो सकते हैं। डिजाइन क्षेत्र में घोषित प्रमुख सहायता इस प्रकार है:

  • योग्य स्टार्टअप और MSME को परियोजना लागत का 50% या अधिकतम ₹15 करोड़ तक milestone-linked seed funding
  • VC या Private Equity निवेश जुटाने वाली कंपनियों के लिए equity co-investment
  • कुछ पात्र कंपनियों के लिए royalty financing
  • चिप के deployment पर पांच वर्ष तक net sales का 9% reimbursement
  • Deployment incentive की सीमा प्रति आवेदन ₹30 करोड़
  • समूह कंपनियों सहित प्रति कंपनी कुल सीमा ₹120 करोड़
  • पात्र संस्थानों के लिए EDA टूल, IP cores, MPW fabrication और post-silicon validation जैसी design infrastructure सुविधाएं

ये लाभ हर व्यक्ति या सामान्य विद्यार्थी के लिए प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं हैं। इनका उद्देश्य पात्र कंपनियों, स्टार्टअप, MSME, संस्थानों और औद्योगिक परियोजनाओं को सहायता देना है।

अलग-अलग semiconductor projects को कितनी सरकारी सहायता मिलेगी?

Semicon 2.0 में सभी परियोजनाओं को एक समान subsidy नहीं मिलेगी। सहायता की दर project category, technology, eligible capital expenditure और applicant की वित्तीय क्षमता के आधार पर तय होगी।

परियोजना श्रेणी केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता
Semiconductor equipment और material ecosystem eligible capital expenditure का 30%
Silicon semiconductor wafer fab eligible capital expenditure का 40%
Compound semiconductor, photonics, MEMS और discrete fab eligible capital expenditure का 35%
OLED, Micro-LED और LCD display fab eligible capital expenditure का 35%
Advanced ATMP/OSAT packaging eligible capital expenditure का 35%
Legacy ATMP/OSAT packaging eligible capital expenditure का 25%
Advanced semiconductor R&D project cost का 75% तक
Talent development project cost का 75% तक
Deployment-Linked Incentive पांच वर्ष तक net sales का 9%

सरकारी सहायता सामान्यतः pari passu basis पर दी जाएगी। इसका अर्थ है कि सहायता परियोजना की प्रगति applicant द्वारा किए गए आनुपातिक निवेश से जुड़ी होगी। वास्तविक सहायता संबंधित guidelines, eligible expenditure और approval conditions पर निर्भर करेगी।

स्टार्टअप और MSME को क्या सहायता मिलेगी?

Eligible semiconductor design startups और MSMEs को Product Design-Linked Incentive यानी P-DLI के अंतर्गत निम्न सहायता मिल सकती है:

  • project cost का 50% या अधिकतम ₹15 करोड़—जो भी कम हो—milestone-linked seed funding के रूप में;
  • ₹15 करोड़ से अधिक आवश्यकता होने पर VC या Private Equity investment के साथ equity co-investment;
  • EDA tools grid तक centralized access;
  • Multi-Project Wafer fabrication services;
  • semiconductor IP cores;
  • Compute Sub-Systems;
  • post-silicon validation facilities।

अन्य पात्र commercial design companies को royalty financing या equity co-investment मिल सकता है। Royalty financing प्राप्त करने वाली कंपनी को अपने उत्पाद या technology की net revenue का 5% तब तक देना होगा, जब तक सरकार दी गई सहायता का 1.5 गुना recover नहीं कर लेती।

Deployment-Linked Incentive कितना है?

Semicon 2.0 के बाद पहली बार launch किए गए पात्र Indian semiconductor IP, chip या SoC पर पांच वर्षों तक net sales का 9% reimbursement मिल सकता है।

इसकी अधिकतम सीमा:

  • प्रति आवेदन ₹30 करोड़;
  • group companies सहित प्रति कंपनी ₹120 करोड़।

इस incentive के लिए वही applicant पात्र होगा जो design की Category 1 या Category 2 की eligibility पूरी करता हो। योजना की घोषणा से पहले बेचे जा चुके उत्पाद इस category में पात्र नहीं होंगे।

Semicon 2.0 Scheme की पात्रता क्या है?

अलग-अलग स्तंभों के लिए अलग दिशानिर्देश लागू होंगे। डिजाइन श्रेणी के आधिकारिक नियमों में मुख्य पात्रता इस प्रकार है:

  • कंपनी भारत में निगमित और मुख्यालय वाली हो।
  • भारत में पर्याप्त संचालन और कर्मचारी मौजूद हों।
  • रणनीतिक डिजाइन श्रेणी में कंपनी भारतीय नागरिकों के स्वामित्व एवं नियंत्रण में हो।
  • व्यावसायिक डिजाइन श्रेणी में भारतीय नागरिकों या OCI के स्वामित्व वाली पात्र कंपनी शामिल हो सकती है।
  • कंपनी अकेले या वैश्विक कंपनी, R&D संस्था अथवा शैक्षणिक संस्थान के consortium में भाग ले सकती है।
  • संबंधित IP और design files को भारत में रखने की शर्त लागू हो सकती है।
  • कंपनी को सुरक्षा, निर्यात नियंत्रण और विदेशी नियंत्रण संबंधी सरकारी निर्देश मानने होंगे।

आवेदन से पहले आवेदक को अपने चुने गए स्तंभ की राजपत्र अधिसूचना और दिशानिर्देश अवश्य पढ़ने चाहिए।

Semiconductor projects के लिए न्यूनतम निवेश और राजस्व कितना होना चाहिए?

बड़े manufacturing projects के लिए सरकार ने न्यूनतम capital investment, revenue, technology ownership और production capacity निर्धारित किए हैं।

परियोजना न्यूनतम निवेश न्यूनतम राजस्व
Semiconductor equipment R&D facility ₹300 करोड़ ₹120 करोड़
Semiconductor-grade raw material facility ₹50 करोड़ ₹20 करोड़
Testing एवं characterisation facility ₹100 करोड़ ₹40 करोड़
Equipment, component और sub-assembly manufacturing ₹300 करोड़ ₹120 करोड़
Silicon wafer fab ₹20,000 करोड़ ₹7,500 करोड़
Compound semiconductor/MEMS/discrete fab ₹500 करोड़ ₹200 करोड़
OLED display fab ₹10,000 करोड़ ₹5,000 करोड़
Micro-LED display fab ₹1,500 करोड़ ₹600 करोड़
LCD fab ₹10,000 करोड़ ₹5,000 करोड़
ATMP/OSAT facility ₹1,000 करोड़ ₹200 करोड़

Revenue eligibility की जांच आवेदन जमा करने वाले वर्ष से पहले के तीन वित्तीय वर्षों में से किसी एक वर्ष के आधार पर की जा सकती है। इसमें group companies या joint venture का revenue भी संबंधित शर्तों के अनुसार शामिल हो सकता है।

Testing और characterisation facilities को छोड़कर अधिकांश manufacturing applicants के पास प्रस्तावित इकाई की production-grade technology का ownership या valid licence होना अपेक्षित है।

Silicon fab, display fab और packaging units की उत्पादन क्षमता

वित्तीय पात्रता के साथ applicants को न्यूनतम तकनीकी क्षमता भी पूरी करनी होगी।

1. Silicon wafer fab
  • wafer size: 300 mm
  • क्षमता: कम-से-कम 40,000 wafer starts प्रति माह
  • सरकारी सहायता: eligible capital expenditure का 40%
2. Compound semiconductor और sensor fab
  • MEMS sensor fab: 200 mm या अधिक wafer
  • compound और discrete semiconductor fab: 150 mm या अधिक
  • Photonics fab: 100 mm या अधिक
  • क्षमता: कम-से-कम 500 wafer starts प्रति माह
  • सरकारी सहायता: 35%
3. Display fab
  • OLED Gen-6 या अधिक: कम-से-कम 30,000 panels प्रति माह
  • Micro-LED: कम-से-कम 500 वर्गमीटर panel area प्रति माह
  • LCD Gen-8 या अधिक: कम-से-कम 60,000 panels प्रति माह
4. ATMP/OSAT

Advanced packaging में 2.5D/3D packaging, wafer-level chip-scale packaging, heterogeneous integration और advanced substrates शामिल हैं। इस category को 35% सहायता मिल सकती है, जबकि legacy packaging को 25% तक सहायता दी जा सकती है।

Semicon 2.0 के लिए आवेदन कैसे करें? Semicon 2.0 Scheme Online Apply

चरण 1: सही श्रेणी चुनें

पहले तय करें कि परियोजना design, fab, ATMP/OSAT, मशीन एवं सामग्री, R&D या talent development में से किस स्तंभ के अंतर्गत आती है।

चरण 2: ISM पोर्टल पर पंजीकरण करें

कंपनी और अधिकृत प्रतिनिधि की जानकारी देकर India Semiconductor Mission के आवेदन पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।

चरण 3: Detailed Project Report तैयार करें

DPR में सामान्यतः तकनीक, प्रस्तावित उत्पाद, निवेश, वित्तीय क्षमता, स्थान, रोजगार, समयसीमा, IP ownership और बाजार रणनीति बतानी होगी।

चरण 4: आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें

कंपनी पंजीकरण, shareholding, beneficial ownership, वित्तीय विवरण, तकनीकी साझेदारी और परियोजना से संबंधित दस्तावेज तैयार रखें।

चरण 5: आवेदन शुल्क जमा करें

श्रेणी के दिशानिर्देशों के अनुसार आवेदन शुल्क देना होगा। पोर्टल के अनुसार शुल्क में GST शामिल होगा, लेकिन transaction charges अलग से आवेदक को वहन करने होंगे।

चरण 6: मूल्यांकन और स्वीकृति

तकनीकी व्यवहार्यता, राष्ट्रीय महत्व, व्यावसायिक संभावना, निवेश क्षमता और सुरक्षा संबंधी पहलुओं के आधार पर प्रस्ताव का मूल्यांकन होगा।

योजना को शुरुआती रूप से तीन वर्ष तक आवेदन के लिए खुला रखा गया है। समर्थित परियोजना की अवधि project-to-project आधार पर सामान्यतः छह वर्ष तक हो सकती है।

परियोजनाओं को मंजूरी कौन देगा?

Design और talent-development projects के लिए approval authority परियोजना लागत के आधार पर तय होगी:

परियोजना लागत मंजूरी देने वाला प्राधिकरण
₹100 करोड़ से कम MeitY Secretary
₹100 करोड़ से अधिक और ₹500 करोड़ तक Electronics एवं IT, Minister
₹500 करोड़ से अधिक Union Cabinet

अन्य manufacturing categories में ISM द्वारा recommended proposals को MeitY के माध्यम से केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

स्वीकृत projects के लिए budgetary provision MeitY करेगा और approval conditions के अनुसार nodal agency वित्तीय सहायता जारी करेगी।

भारत को व्यापक semiconductor ecosystem की जरूरत क्यों है?

1. राष्ट्रीय सुरक्षा

रक्षा उपकरण, अंतरिक्ष मिशन, पावर ग्रिड और दूरसंचार नेटवर्क में सुरक्षित एवं भरोसेमंद चिप्स आवश्यक हैं। घरेलू क्षमताएं hardware tampering और supply-chain जोखिम कम कर सकती हैं।

2. आयात निर्भरता में कमी

इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के सबसे बड़े आयात क्षेत्रों में शामिल है। स्थानीय चिप निर्माण से आयात बिल कम करने और देश में अधिक value addition बनाए रखने में मदद मिलेगी।

3. EV, AI और 5G की बढ़ती मांग

इलेक्ट्रिक वाहन में battery management system, inverter, motor controller और safety systems के लिए semiconductor जरूरी हैं। इसी तरह AI servers, 5G/6G, industrial automation और medical devices की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

4. वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अवसर

अमेरिका-चीन तकनीकी तनाव और महामारी के दौरान चिप संकट ने कंपनियों को supply chain diversify करने के लिए प्रेरित किया। भारत भरोसेमंद विनिर्माण और डिजाइन केंद्र के रूप में इस अवसर का लाभ उठा सकता है।

5. तकनीकी साझेदारी

मजबूत घरेलू इकोसिस्टम भारत की अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, सिंगापुर और अन्य तकनीकी साझेदारों के साथ semiconductor cooperation बढ़ा सकता है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग की वर्तमान स्थिति

पिछले लगभग 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना बढ़कर ₹13 लाख करोड़ से अधिक और निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक हो गया। यह क्षेत्र लगभग 25 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का समर्थन करता है।

मोबाइल फोन निर्माण में करीब 12 लाख लोगों को रोजगार मिला है। उच्च-सटीकता वाले कई विनिर्माण क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी लगभग 70% तक पहुंचने की बात सरकार ने कही है।

यह प्रगति बताती है कि भारत assembly में मजबूत हुआ है। Semicon 2.0 का असली लक्ष्य देश को डिजाइन, components, equipment और chip manufacturing जैसे अधिक मूल्य वाले चरणों में आगे ले जाना है।

स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर क्यों महत्वपूर्ण हैं?

स्वदेशी प्रोसेसर का विकास भारत की डिजिटल संप्रभुता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। C-DAC, IIT और अन्य संस्थानों के माध्यम से भारत processor design, RISC-V architecture और रणनीतिक computing solutions पर काम कर रहा है।

ऐसे प्रोसेसर दूरसंचार, रक्षा, अंतरिक्ष, परिवहन और औद्योगिक प्रणालियों में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम कर सकते हैं। हालांकि स्वदेशी डिजाइन को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन और वास्तविक उपकरणों में उपयोग तक पहुंचाना अगली बड़ी चुनौती होगी।

Semicon 2.0 के लाभ और सीमाएँ!

संभावित लाभ प्रमुख चुनौती
आयात निर्भरता में कमी फैब में कई अरब डॉलर का निवेश
भारतीय चिप IP का विकास अत्याधुनिक मशीनों का आयात
उच्च-कौशल वाले रोजगार विशेषज्ञ इंजीनियरों की कमी
EV, AI और टेलीकॉम उद्योग को समर्थन निरंतर बिजली और ultrapure water की जरूरत
मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन शुरू होने में लंबा समय
वैश्विक निवेश आकर्षित होने की संभावना वैश्विक तकनीक तेजी से बदलना
घरेलू आपूर्ति शृंखला लागत और yield प्रतिस्पर्धा

सरकारी funding से बाहर निकलने पर क्या शर्तें लागू होंगी?

Semiconductor design company funding mechanism से बाहर निकल सकती है, लेकिन उसे सरकार को निर्धारित राशि लौटानी पड़ सकती है।

  • Seed funding या equity co-investment लेने वाली company को दी गई seed funding तथा सरकारी equity की prevailing market value के बराबर रकम, या कुल सहायता का 1.5 गुना—जो अधिक हो—चुकाना पड़ सकता है।
  • Royalty financing से अंतिम disbursement के चार वर्ष के भीतर बाहर निकलने पर सहायता का 1.5 गुना लौटाना होगा।
  • चार वर्ष के बाद exit करने पर सहायता का दो गुना भुगतान करना पड़ सकता है।

इसलिए applicants को funding model चुनने से पहले equity dilution, royalty obligation और exit liability का वित्तीय आकलन करना चाहिए।

आवेदकों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां!

  • Semicon 2.0 को सामान्य नागरिक सब्सिडी समझना
  • गलत योजना श्रेणी में आवेदन करना
  • अस्पष्ट या अधूरी DPR जमा करना
  • IP ownership और beneficial ownership स्पष्ट न करना
  • पानी, बिजली और लॉजिस्टिक्स की जरूरत कम आंकना
  • केवल निर्माण पर ध्यान देकर ग्राहकों की मांग साबित न करना
  • अधिसूचना के बजाय पुराने Semicon 1.0 नियमों पर निर्भर रहना
  • सुरक्षा और export-control compliance की अनदेखी करना

Expert Insight from GYANSKY

Semicon 2.0 की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि भारत में कितनी फैक्ट्रियां बनीं। असली कसौटी यह होगी कि उनमें उत्पादन कितनी जल्दी शुरू हुआ, yield कितनी प्रतिस्पर्धी रही और भारत में बना chip design कितने वास्तविक उत्पादों में इस्तेमाल हुआ।

स्टार्टअप और MSME को केवल अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय शुरुआती ग्राहक, मजबूत IP strategy और परीक्षण योग्य prototype विकसित करना चाहिए। राज्यों को भी जमीन की पेशकश से आगे बढ़कर uninterrupted power, ultrapure water, skilled manpower और fast-track approvals का भरोसेमंद मॉडल तैयार करना होगा।

भारतीय नागरिकों, विद्यार्थियों और व्यवसायों पर क्या असर पड़ेगा?

सामान्य उपभोक्ता को इस योजना के तहत सीधे नकद लाभ नहीं मिलेगा। इसके प्रभाव अप्रत्यक्ष लेकिन व्यापक हो सकते हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन उद्योग की supply chain मजबूत होगी।
  • chip shortage से होने वाली उत्पादन रुकावट कम हो सकती है।
  • इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए VLSI, chip design और packaging में अवसर बढ़ेंगे।
  • MSME को मशीन, सामग्री, परीक्षण और component supply में नया बाजार मिलेगा।
  • भारत में डिजाइन किए गए सुरक्षित डिजिटल उत्पाद विकसित हो सकेंगे।
  • लंबी अवधि में कुछ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत और उपलब्धता बेहतर हो सकती हैं।

विद्यार्थियों के लिए केवल coding पर्याप्त नहीं होगी। VLSI, embedded systems, electronics, material science, clean-room processes और EDA tools जैसे कौशल महत्वपूर्ण बनेंगे।

People Also Ask

क्या Semicon 2.0 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है?

हां। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को Semicon 2.0 मंजूर किया। कार्यक्रम का कुल वित्तीय परिव्यय ₹1,27,500 करोड़ है।

क्या Semicon 2.0 की सभी छह अधिसूचनाएं जारी हो चुकी हैं?

हां। 31 अगस्त 2026 को सभी छह स्तंभों की अधिसूचनाएं जारी की गईं। इनमें डिजाइन, मशीन एवं सामग्री, अधिक फैब, ATMP/OSAT, R&D और talent development शामिल हैं।

क्या कोई विद्यार्थी Semicon 2.0 के लिए आवेदन कर सकता है?

एक सामान्य विद्यार्थी प्रत्यक्ष औद्योगिक प्रोत्साहन के लिए आवेदन नहीं कर सकता। हालांकि शैक्षणिक संस्थानों, डिजाइन प्रोग्राम और EDA प्रशिक्षण के माध्यम से उसे लाभ मिल सकता है।

क्या विदेशी कंपनियां योजना में भाग ले सकती हैं?

कुछ श्रेणियों में पात्र भारतीय कंपनी वैश्विक कंपनी, अनुसंधान संगठन या शैक्षणिक संस्थान के साथ consortium बना सकती है। अंतिम पात्रता संबंधित अधिसूचना पर निर्भर करेगी।

भारत का पहला semiconductor fab कब शुरू होगा?

सरकार के अनुसार पहले fab के 2028 में चालू होने की उम्मीद है। यह अनुमान है; वास्तविक निर्माण तारीख, मशीन installation और production qualification पर निर्भर करेगी।

क्या Semicon 2.0 से चिप सस्ती हो जाएगी?

तुरंत नहीं। फैब और supply chain विकसित होने में कई वर्ष लगते हैं। लंबे समय में स्थानीय उत्पादन से उपलब्धता, आपूर्ति सुरक्षा और कुछ श्रेणियों में लागत बेहतर हो सकती है।

Semicon 2.0 में स्टार्टअप को कितना पैसा मिल सकता है?

Design category में पात्र startups और MSMEs को milestone के आधार पर परियोजना लागत का 50% या अधिकतम ₹15 करोड़ तक seed funding मिल सकता है। अन्य सहायता शर्तों के अनुसार equity co-investment, royalty financing या deployment incentive के रूप में उपलब्ध हो सकती है।

Semicon 2.0 Scheme 2026—FAQs

1. Semicon 2.0 का कुल बजट कितना है?

कार्यक्रम के लिए ₹1,27,500 करोड़ का वित्तीय परिव्यय मंजूर किया गया है।

2. Semicon 1.0 कब शुरू हुआ था?

Semicon India Programme 1.0 दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।

3. आवेदन कहां करना होगा?

आवेदन India Semiconductor Mission के आधिकारिक portal पर संबंधित application window के दौरान जमा करना होगा।

4. आवेदन कितने समय तक खुले रहेंगे?

आधिकारिक पोर्टल के अनुसार योजना को प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष की अवधि के लिए आवेदन हेतु खोला जाएगा।

5. क्या योजना केवल बड़ी कंपनियों के लिए है?

नहीं। संबंधित श्रेणी के नियम पूरे करने वाले भारतीय स्टार्टअप, MSME, कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान और R&D संगठन भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

6. ATMP और OSAT में क्या अंतर है?

ATMP चिप की assembly, testing, marking और packaging प्रक्रिया को दर्शाता है। OSAT उन स्वतंत्र कंपनियों को कहा जाता है जो दूसरी semiconductor कंपनियों के लिए assembly और testing सेवाएं देती हैं।

Semicon 2.0 की समीक्षा और आगे की समयसीमा

समर्थित projects की अवधि project-to-project basis पर तय होगी और सामान्यतः छह वर्ष तक हो सकती है।

योजना के implementation के तीन वर्ष बाद या जरूरत पड़ने पर mid-term impact assessment किया जाएगा। इस समीक्षा के आधार पर सरकार योजना को जारी रखने, संशोधित करने या प्रोत्साहन संरचना में बदलाव करने का फैसला कर सकती है।

इसके अतिरिक्त India Semiconductor Mission 2026 से Semiconductor Deep Tech Award शुरू कर सकता है। इसका उद्देश्य indigenous semiconductor innovation और deep-tech research को प्रोत्साहित करना होगा।

निष्कर्ष: Semicon 2.0 Scheme 2026

Semicon 2.0 Scheme: ₹1.27 लाख करोड़ की योजना लागू, क्या बदला? इसका सबसे स्पष्ट उत्तर है—भारत की semiconductor policy अब चुनिंदा निर्माण इकाइयों से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन बनाने पर केंद्रित हो गई है।

₹1,27,500 करोड़ का परिव्यय, छह अधिसूचित स्तंभ, भारतीय chip IP, घरेलू मशीन एवं सामग्री, advanced packaging, R&D और talent development इस योजना को Semicon 1.0 से अधिक व्यापक बनाते हैं।

फिर भी वास्तविक सफलता निवेश घोषणाओं से नहीं, समय पर उत्पादन, भारतीय technology ownership, प्रतिस्पर्धी manufacturing yield और घरेलू चिप के व्यावसायिक उपयोग से मापी जाएगी।

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