सरकार की 50+ महिला कल्याण योजनाएँ – कौन-सी आपको मुफ्त मिल सकती हैं? | List of Women’s Empowerment Schemes in India | Government Schemes for Women’S Empowerment in India | Women’s Empowerment Programs in India
भारत में महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, और इसी बदलाव को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई प्रभावशाली पहल शुरू की हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि कौन-सी योजनाएँ वास्तव में महिलाओं के जीवन में बदलाव ला रही हैं, तो यह List of Women’s Empowerment Schemes in India आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आर्थिक स्वतंत्रता से लेकर शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य तक—इन योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मिशन शक्ति, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और उज्ज्वला योजना जैसी स्कीम्स कैसे काम करती हैं, यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे। पढ़ें पूरी जानकारी!
1. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY)
कब लॉन्च किया गया: 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई
मंत्रालय: वित्त मंत्रालय / महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- बालिकाओं के लिए शिक्षा और उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए एक कोष (Fund) तैयार करना।
- बेटी की शादी के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
- लैंगिक अनुपात में सुधार करना और बालिकाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाना।
- बेटियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर (Empowered) बनाना।
फ़ायदे
- उच्च ब्याज दर: वर्तमान में 8.2% की आकर्षक ब्याज दर (समय-समय पर संशोधित)।
- कर छूट (Tax Benefit): आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश पर छूट।
- खाता खोलना: बेटी के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र तक पोस्ट ऑफिस या बैंकों में खाता खोला जा सकता है।
- न्यूनतम जमा: सिर्फ ₹250 सालाना से शुरुआत की जा सकती है (अधिकतम ₹1.5 लाख)।
- सुरक्षा: मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम सीधे बेटी के खाते में जाती है, जिससे उसका भविष्य सुरक्षित होता है।
- खाता पात्रता और अवधि: यह खाता 10 वर्ष से कम उम्र की बेटी के लिए उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा खोला जा सकता है। यह योजना खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष बाद मैच्योर (परिपूर्ण) होती है, लेकिन 18 वर्ष की आयु के बाद शिक्षा के लिए 50% तक राशि निकाली जा सकती है।
2. मिशन इंद्रधनुष
कब लॉन्च किया गया: 25 दिसंबर 2014
मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय
उद्देश्य
- टीकाकरण कवरेज: उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करना जो छूट गए हैं या आंशिक रूप से प्रतिरक्षित हैं।
- 7 बीमारियों से सुरक्षा: डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, तपेदिक (TB), पोलियो, खसरा और हेपेटाइटिस B जैसी 7 जानलेवा बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण।
- बाल मृत्यु दर में कमी: टीकाकरण के माध्यम से शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करना।
- 90% पूर्ण टीकाकरण: राष्ट्रीय स्तर पर 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करना।
फ़ायदे
- पूर्ण टीकाकरण (Full Immunization): यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों को समय पर टीके लगें।
- महिलाओं का सशक्तिकरण: गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित करके, यह उन्हें स्वस्थ जीवन प्रदान करता है।
- निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण टीके मुफ्त में उपलब्ध कराए जाते हैं।
- जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा: यह बच्चों को घातक बीमारियों से बचाकर बाल मृत्यु दर को कम करता है।
3. मुद्रा योजना (प्रधानमंत्री मुद्रा योजना – PMMY)
कब लॉन्च किया गया: 8 अप्रैल 2015
मंत्रालय: वित्त मंत्रालय
उद्देश्य: छोटे व्यवसायों को बिना कोलेटरल (गारंटी) के आसान ऋण प्रदान करके स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
फ़ायदे
- योजना के अब तक के कुल लाभार्थियों में 68% महिलाएं हैं।
- महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें ग्रामीण और शहरी स्तर पर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना।
- बिना गारंटी के लोन (Collateral-free)।
- प्रोसेसिंग फीस न के बराबर या बहुत कम।
- महिला उद्यमियों के लिए आसान ऋण प्रक्रिया।
- जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा।
शिशु: ₹50,000 तक का ऋण।
किशोर: ₹50,000 से ₹5 लाख तक का ऋण।
तरुण: ₹5 लाख से ₹10 लाख तक का ऋण।
तरुण प्लस (नया): 10 लाख से 20 लाख रुपये तक का ऋण।
4. ट्रेड योजना (Trade Related Entrepreneurship Assistance and Development – TREAD)
कब लॉन्च किया गया: यह योजना 12वीं योजना (2012-2017) की अवधि के दौरान अधिक सुव्यवस्थित रूप में सामने आई, लेकिन यह पहल लंबे समय से महिलाओं के लिए कार्यरत है।
मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)
उद्देश्य
- महिला उद्यमियों को व्यावसायिक ऋण (Credit) और प्रशिक्षण प्रदान करना।
- गरीब महिलाओं को तकनीकी कौशल और उद्यमशीलता की क्षमताओं को विकसित कर स्थायी रोजगार देना।
- गैर-कृषि (non-farm) गतिविधियों के लिए 51% या अधिक महिलाओं की भागीदारी वाले उद्यमों को सहायता देना।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता (Subsidy): बैंक द्वारा स्वीकृत परियोजना लागत का 30% तक अनुदान (Grant/Subsidy) सरकार द्वारा दिया जाता है।
- प्रशिक्षण (Training): महिला उद्यमियों को कौशल विकास प्रशिक्षण, परामर्श और सूचना प्रदान की जाती है।
- सहज ऋण (Easy Loan): एनजीओ के माध्यम से आसान क्रेडिट-लिंक्ड सहायता।
- क्षमता निर्माण: महिलाओं के लिए आय सृजन गतिविधियों को बढ़ावा देना।
5. उज्ज्वला योजना (प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना – PMUY)
कब लॉन्च किया गया: 1 मई 2016
मंत्रालय: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG)
उद्देश्य: गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन (LPG) उपलब्ध कराना और पारंपरिक चूल्हे से मुक्ति।
फ़ायदे
- मुफ्त कनेक्शन: बीपीएल परिवारों की महिलाओं के नाम पर ₹1600 की वित्तीय सहायता के साथ एलपीजी कनेक्शन।
- स्वास्थ्य सुधार: धुएं से होने वाली बीमारियों में कमी (अस्थमा, आंखों की समस्या)।
- सशक्तिकरण: महिलाओं को सशक्त बनाना और ईंधन इकट्ठा करने में समय की बचत।
- पर्यावरण संरक्षण: स्वच्छ ईंधन के उपयोग से प्रदूषण में कमी।
- उज्ज्वला 2.0: अतिरिक्त 1 करोड़ कनेक्शन और प्रवासी परिवारों के लिए विशेष सुविधा।
6. स्टैंडअप इंडिया मिशन
कब लॉन्च किया गया: 5 अप्रैल 2016
मंत्रालय: वित्त मंत्रालय
उद्देश्य: जमीनी स्तर पर महिलाओं और SC/ST वर्ग में उद्यमिता को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन, और बैंकिंग ऋण तक पहुंच आसान बनाना
फ़ायदे
- विनिर्माण, सेवा या व्यापार क्षेत्र में नए उद्यम के लिए ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का लोन
- बैंक शाखाओं द्वारा कम-से-कम एक महिला और एक SC/ST उधारकर्ता को अनिवार्य ऋण
- क्रेडिट गारंटी फंड (CGFSI) के माध्यम से सुरक्षा
- 7 साल तक की पुनर्भुगतान अवधि और 18 महीने तक की छूट (Moratorium)
7. प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (PMAY – URBAN)
कब लॉन्च किया गया: 25 जून 2015.
मंत्रालय: आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA).
उद्देश्य: “सभी के लिए आवास” (Housing for All) – 2024-25 तक सभी पात्र लाभार्थियों को शौचालय, पानी, बिजली के साथ पक्का घर उपलब्ध कराना.
फ़ायदे
- अनिवार्य मालिकाना हक: घर परिवार की महिला मुखिया के नाम या संयुक्त रूप से (महिला के साथ) होना अनिवार्य है.
- वित्तीय सहायता: ‘साझेदारी में किफायती आवास’ (AHP) और ‘लाभार्थी-आधारित निर्माण’ (BLC) के तहत ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख तक की केंद्रीय सहायता (विभिन्न घटकों के आधार पर).
- क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी (CLSS): EWS/LIG/MIG श्रेणियों के लिए आवास ऋण पर ब्याज में सब्सिडी.
- आवास का आकार: ईडब्ल्यूएस (EWS) के लिए आवास का आकार 30 वर्ग मीटर तक.
8. प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (PMAY – GRAMIN)
कब लॉन्च किया गया: 1 अप्रैल 2016 से प्रभावी
मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय
उद्देश्य: 2024-25 तक ग्रामीण क्षेत्रों के बेघर और कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं (शौचालय, बिजली, पानी) के साथ सुरक्षित पक्का घर प्रदान करना। इस योजना में घर का स्वामित्व या तो घर की महिला मुखिया के नाम पर या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर दिया जाता है, जो महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता: मैदानी क्षेत्रों में ₹1.20 लाख और पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्रों में ₹1.30 लाख।
- अतिरिक्त लाभ: मनरेगा के तहत 90-95 दिनों की अकुशल मजदूरी, शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत ₹12,000, और पीएम उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन।
- आवास का आकार: घर का न्यूनतम आकार 25 वर्ग मीटर (रसोई सहित)।
- पारदर्शिता: लाभार्थियों का चयन SECC 2011 और आवास+ सर्वेक्षण के आधार पर किया जाता है, और धनराशि सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
9. महिला हेल्पलाइन – 181 (Toll-free)
कब लॉन्च किया गया: 1 अप्रैल 2015 (24×7 सेवा)
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य: निजी या सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा या संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता (पुलिस, एम्बुलेंस, परामर्श) प्रदान करना।
फ़ायदे:
- टोल-फ्री नंबर 181, सभी राज्यों में 24×7 उपलब्ध। कानूनी, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक मदद।
- तत्काल राहत: घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न या अन्य शारीरिक/मानसिक हिंसा के मामलों में तुरंत पुलिस या मेडिकल सहायता।
- परामर्श और कानूनी सहायता: मानसिक, सामाजिक या कानूनी समस्याओं पर परामर्श और कानूनी सहायता प्रदान करना।
- योजनाओं की जानकारी: केंद्र/राज्य सरकार द्वारा संचालित महिला कल्याण योजनाओं (जैसे- वन स्टॉप सेंटर) की जानकारी प्रदान करना।
- पहुंच: यह 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है (पश्चिम बंगाल को छोड़कर)।
10. STEP पहल (Support to Training and Employment Programme for Women)
कब लॉन्च किया गया: 1986-87 (दिसंबर 2014 में संशोधित)
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) प्रदान करना।
- पारंपरिक और आधुनिक क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार योग्य बनाना।
- महिलाओं को स्वरोजगार (Entrepreneurship) के लिए सक्षम बनाना।
- आय अर्जित करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- 16 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाएं (विशेषकर गरीब, संपत्तिहीन, ग्रामीण/शहरी क्षेत्र)।
फ़ायदे
- कौशल प्रशिक्षण: कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, कंप्यूटर, आईटी, सिलाई और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण।
- आर्थिक सशक्तिकरण: महिलाओं को उत्पादकता बढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना।
- वित्तीय सहायता: परियोजनाओं के लिए अनुदान, जहां भारत सरकार 90% तक लागत वहन करती है।
- सशक्तिकरण: महिलाओं को दिहाड़ी मजदूरी से ऊपर उठाकर उद्यमी बनने का अवसर देना।
- कार्यान्वयन: यह योजना गैर सरकारी संगठनों (NGOs), सहकारी समितियों और संस्थाओं के माध्यम से लागू की जाती है।
11. महिला ई-हाट योजना
कब लॉन्च किया गया: 7 मार्च 2016
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- महिला उद्यमियों को ऑनलाइन बाजार (E-marketing) उपलब्ध कराना।
- वित्तीय समावेशन को मजबूत करना और आत्मनिर्भर बनाना।
- बिना किसी बिचौलिए के सीधे खरीदार और विक्रेता के बीच संबंध स्थापित करना।
फ़ायदे
- आसान उपयोग: महिला उद्यमी मोबाइल के माध्यम से भी अपना व्यवसाय संभाल सकती है।
- विस्तृत पहुंच: घर बैठे ही देश भर में उत्पादों की मार्केटिंग।
- पंजीकरण: स्व-सहायता समूह (SHGs), एनजीओ और व्यक्तिगत महिला उद्यमी अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
- उत्पाद सूची: कपड़ों से लेकर हस्तशिल्प, घरेलू सामान और खाद्य पदार्थों तक की ऑनलाइन बिक्री।
12. महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र (MSSC) योजना
कब लॉन्च किया गया: 31 मार्च 2023
मंत्रालय: वित्त मंत्रालय
उद्देश्य
- महिलाओं को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और सशक्त बनाना।
- आकर्षक ब्याज दर के साथ बचत की आदत को बढ़ावा देना।
- अल्पकालिक (2 वर्ष) में सुरक्षित और उच्च रिटर्न प्रदान करना।
फ़ायदे
- ब्याज दर: 7.5% प्रति वर्ष, जो तिमाही आधार पर संयोजित (compounded) होती है।
- निवेश सीमा: न्यूनतम ₹1,000 और अधिकतम ₹2,00,000 (प्रति व्यक्ति)।
- अवधि: 2 साल की निश्चित अवधि।
- आंशिक निकासी: 1 वर्ष के बाद जमा राशि का 40% तक निकालने की सुविधा।
- अभिभावक सुविधा: अभिभावक अपनी नाबालिग बेटी के लिए भी खाता खोल सकते हैं।
- उपलब्धता: सभी डाकघर (Post Office) और अधिकृत सार्वजनिक/निजी क्षेत्र के बैंक।
13. प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र (PMMSK)
कब लॉन्च किया गया: 22 नवंबर 2017
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य: ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच प्रदान कर सशक्त बनाना।
फ़ायदे
- कौशल विकास: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण।
- डिजिटल साक्षरता: महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाना।
- जागरूकता: स्वास्थ्य, पोषण और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- सुरक्षा: महिला हेल्पलाइन और वन-स्टॉप सेंटर जैसी सुविधाओं से जोड़ना।
- 115 पिछड़े जिले: विशेष रूप से पिछड़े जिलों में सामुदायिक भागीदारी के जरिए काम करना।
- वर्तमान स्थिति: फरवरी 2022 से, पीएमएमएसके को मिशन शक्ति (Samarthya component) में शामिल कर दिया गया है।
14. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP)
कब लॉन्च किया गया: 2010-11 के बजट में (2011 से कार्यान्वित)
मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय (ग्रामीण विकास विभाग)
उद्देश्य
- महिला किसान की पहचान: महिला किसानों को ‘किसान’ के रूप में मान्यता देना और सशक्त बनाना।
- टिकाऊ खेती: सामुदायिक प्रबंधित टिकाऊ कृषि (CMSA) और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।
- आजीविका सृजन: स्थायी कृषि-आधारित आजीविका के अवसर पैदा करना।
- उत्पादकता में वृद्धि: महिलाओं की कृषि में भागीदारी और उत्पादकता बढ़ाना।
- संसाधनों तक पहुँच: उत्पादन के साधनों पर महिलाओं का नियंत्रण बढ़ाना।
फ़ायदे
- 36 लाख से अधिक लाभार्थी: 24 राज्यों में 84 से अधिक परियोजनाओं के माध्यम से 36 लाख से अधिक महिला किसानों को लाभ।
- क्षमता निर्माण: उन्नत कृषि तकनीकों और गैर-काष्ठ वन उत्पादों (NTFP) के लिए प्रशिक्षण।
- खाद्य सुरक्षा: घरेलू स्तर पर बेहतर पोषण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- पशु-सखी मॉडल: घर-घर पशु देखभाल सेवाओं के लिए पशु-सखी मॉडल को बढ़ावा।
- आर्थिक सशक्तिकरण: बीज, मिट्टी और पानी के प्रबंधन पर महिलाओं का नियंत्रण।
15. जननी सुरक्षा योजना (JSY)
कब लॉन्च किया गया: 12 अप्रैल 2005
मंत्रालय: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत
उद्देश्य
- संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देना।
- मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करना।
- गरीब गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता: संस्थागत प्रसव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1,400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 की नकद सहायता सीधे बैंक खाते में (DBT)।
- आशा (ASHA) प्रोत्साहन: प्रसव कराने वाली महिला के साथ आने वाली आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
- निःशुल्क प्रसव: जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) के तहत सिजेरियन सेक्शन सहित मुफ्त प्रसव की सुविधा।
- पात्रता: मुख्य रूप से गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाली गर्भवती महिलाएं, जो 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की हों।
16. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY)
कब लॉन्च किया गया: 1 जनवरी 2017
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पौष्टिक भोजन के लिए नकद प्रोत्साहन देना।
- वेतन की हानि की आंशिक भरपाई करना, ताकि महिलाएं प्रसव से पहले और बाद में आराम कर सकें।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देना।
फ़ायदे
- पहला बच्चा: तीन किश्तों में कुल ₹5,000 की सहायता।
- दूसरा बच्चा: यदि बच्ची का जन्म होता है, तो एकमुश्त ₹6,000 की सहायता।
- यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे आधार-सीडेड बैंक या डाकघर खाते में ट्रांसफर की जाती है।
- आवेदन प्रक्रिया: योग्य महिलाएं PMMVY पोर्टल या निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र/स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं।
- 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की गर्भवती महिलाएं।
- केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों में नियमित रोजगार न रखने वाली महिलाएं।
17. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP)
कब लॉन्च किया गया: 22 जनवरी 2015
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- लिंग-आधारित चयन (भ्रूण हत्या) को रोकना।
- बालिकाओं के अस्तित्व (survival) और सुरक्षा को सुनिश्चित करना।
- बालिकाओं की शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना।
- लिंगानुपात (SRB) में सुधार करना।
फ़ायदे
- बेहतर लिंगानुपात: देश में जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार (2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930)।
- शिक्षा में सुधार: माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 78% (2023-24) हुआ।
- स्वास्थ्य सुधार: संस्थागत प्रसव में वृद्धि (97.3%) और बालिकाओं के लिए बेहतर पोषण।
- जागरूकता: लैंगिक समानता के प्रति सामुदायिक दृष्टिकोण में बदलाव।
- आर्थिक सुरक्षा: सुकन्या समृद्धि खाते के माध्यम से शिक्षा और विवाह के लिए वित्तीय बचत।
18. वन-स्टॉप सेंटर (Sakhi Kendra)
कब लॉन्च किया गया: 1 अप्रैल 2015
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- एकीकृत सेवाएं (Integrated Services): हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर सहायता प्राप्त हो।
- त्वरित सहायता: पीड़ित महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा और कानूनी सहायता तुरंत मिले।
- सुरक्षित वातावरण: शारीरिक, यौन या भावनात्मक रूप से पीड़ित महिलाओं को अस्थायी आश्रय (Temporary Shelter) और मनो-सामाजिक परामर्श (Psychosocial Counselling) प्रदान करना।
- सशक्तीकरण: महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर जीवन जीने में मदद करना।
फ़ायदे
- एक ही छत के नीचे सहायता: पीड़ित महिला को विभिन्न सहायता के लिए अलग-अलग जगह नहीं जाना पड़ता।
- विभिन्न प्रकार की सेवाएं: यहाँ 24×7 आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध है।
- कानूनी और चिकित्सा परामर्श: एफआईआर दर्ज करने में सहायता, वकील की सुविधा और डॉक्टरों की टीम।
- मनोवैज्ञानिक और कानूनी सलाह: काउंसलिंग (Counseling) और कानूनी सलाह के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना।
- अस्थायी आश्रय (Temporary Shelter): सुरक्षित रहने की जगह प्रदान की जाती है।
- निःशुल्क और बिना भेदभाव: यह सेवा किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या वैवाहिक स्थिति के भेदभाव के बिना उपलब्ध है।
19. स्वयंसिद्धा योजना (Swayamsiddha Scheme)
कब लॉन्च किया गया: 2000-01 (महिला सशक्तिकरण वर्ष के दौरान शुरू की गई)
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय / ग्रामीण विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित करना।
- महिलाओं का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण करना।
- महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ाना।
- महिलाओं के लिए आय-सृजन (Income generation) के अवसर पैदा करना।
- कानूनी साक्षरता और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना।
फ़ायदे
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: समूह के माध्यम से छोटी बचत और ऋण की सुविधा।
- कौशल विकास: महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।
- आत्मविश्वास में वृद्धि: निर्णय लेने की क्षमता में सुधार।
- सामाजिक सशक्तिकरण: महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना।
- प्रमुख विशेषता: यह योजना इंदिरा महिला योजना (IMY) का ही एक सुधरा हुआ रूप है, जो ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के विकास पर केंद्रित है।
20. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
कब लॉन्च किया गया: अगस्त 2008
मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)
उद्देश्य
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से निरंतर और सतत रोजगार के अवसर पैदा करना।
- पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के माध्यम से पलायन को कम करना।
फ़ायदे
- सब्सिडी: सामान्य श्रेणी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 25% और शहरी क्षेत्रों में 15% सब्सिडी। महिलाओं सहित विशेष श्रेणियों के लिए यह सब्सिडी ग्रामीण क्षेत्रों में 35% और शहरी क्षेत्रों में 25% तक है।
- ऋण सीमा: विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक की परियोजना लागत के लिए ऋण उपलब्ध है।
- आवेदन: महिला उद्यमी 18 वर्ष से अधिक आयु की होनी चाहिए और नए उद्यम के लिए आवेदन कर सकती हैं (आय की कोई सीमा नहीं)।
- सहयोग: KVIC और DIC-के माध्यम से कार्यान्वयन।
21. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP)
कब लॉन्च किया गया: 2010-11 के बजट में
मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development)
उद्देश्य
- कृषि में महिलाओं की भागीदारी और उत्पादकता को बढ़ाना।
- स्थायी कृषि-पारिस्थितिकी (Agro-ecology) और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना।
- महिला किसानों के लिए सतत आजीविका के अवसर पैदा करना।
- उत्पादन संसाधनों और सरकारी सेवाओं तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाना।
- पशु-सखी मॉडल और गैर-काष्ठ वन उत्पादों (NTFP) के माध्यम से आय बढ़ाना।
फ़ायदे
- तकनीकी सहायता: महिला किसानों को टिकाऊ खेती की नई तकनीकों का प्रशिक्षण।
- वित्तीय सहायता: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से बीज, उपकरण और अन्य इनपुट तक आसान पहुँच।
- स्थायी आय: जैविक खेती, कीटनाशक-मुक्त प्रबंधन (NPM), और पशुपालन के माध्यम से आय में वृद्धि।
- क्षमता निर्माण: सामुदायिक पेशेवरों (Community Professionals) तैयार करना जो स्थानीय स्तर पर सहायता प्रदान करें।
22. महिला उद्यमिता मंच (WEP – Women Entrepreneurship Platform)
कब लॉन्च किया गया: 8 मार्च 2018 (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) को
मंत्रालय: नीति आयोग
उद्देश्य: भारत में महिला उद्यमियों के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना जहाँ उन्हें ‘इच्छा शक्ति’ (प्रेरणा), ‘ज्ञान शक्ति’ (कौशल), और ‘कर्म शक्ति’ (व्यावसायिक सहायता) मिल सके।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता: महिला उद्यमियों को ऋण, अनुदान और अन्य वित्तीय सहायता तक आसान पहुँच।
- मेंटरशिप (सलाह): अनुभवी सलाहकारों से मार्गदर्शन।
- नेटवर्किंग: अन्य महिला उद्यमियों के साथ जुड़ने का मौका।
- कौशल विकास: कार्यशालाओं और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से व्यावसायिक कौशल में वृद्धि।
- बाजार तक पहुँच: अपने उत्पादों को बाजार में स्थापित करने में सहायता।
23. पालना योजना (पूर्ववर्ती राष्ट्रीय क्रेच योजना)
कब लॉन्च किया गया: 1 अप्रैल 2022 (मिशन शक्ति के सामर्थ्य उप-योजना के तहत)
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी: कामकाजी माताओं को बच्चों की सुरक्षा का आश्वासन देकर उन्हें काम करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- गुणवत्तापूर्ण देखभाल: 6 महीने से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सुरक्षित, पौष्टिक और विकासात्मक वातावरण प्रदान करना।
- स्वास्थ्य और पोषण: टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और पौष्टिक भोजन (मिशन पोषण 2.0 के साथ) सुनिश्चित करना।
- शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास: बच्चों के समग्र विकास के लिए सुरक्षित और सुसज्जित केंद्र प्रदान करना।
फ़ायदे
- आंगनवाड़ी-सह-क्रेच (AWCC): आंगनवाड़ियों को क्रेच के रूप में अपग्रेड करना, जहां बच्चों के सोने, खेलने और स्वच्छता की सुविधा हो।
- आर्थिक सहायता: कामकाजी माताओं के लिए किफायती और सुलभ डे-केयर।
- सुरक्षित वातावरण: प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा बच्चों की देखरेख।
- निगरानी: डिजिटल माध्यम से केंद्रों की निगरानी।
- वित्त पोषण: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 (उत्तर-पूर्व और विशेष राज्यों में 90:10) का अनुपात।
24. यशस्विनी पहल
कब लॉन्च किया गया: 27 जून 2024
मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME)
उद्देश्य: महिला उद्यमियों को औपचारिक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से समर्थन देना और अनौपचारिक महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों को पंजीकृत करना।
फ़ायदे
- क्षमता निर्माण: कौशल विकास के जरिए 1 लाख महिलाओं को सक्षम बनाना।
- डिजिटल साक्षरता और ई-कॉमर्स: महिला उद्यमियों को डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स सिखाना।
- वित्तीय सहायता: सरकारी योजनाओं तक पहुँच आसान बनाना।
- सहायता अभियान: यह पहल ‘Empower Her Udan’ अभियान के तहत काम करती है।
25. आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायत पहल
कब लॉन्च किया गया: 5 मार्च, 2025
मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय
उद्देश्य
- देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायत (MWFGP) स्थापित करना।
- ग्रामीण विकास और शासन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देना।
- लैंगिक समानता सुनिश्चित करना और महिलाओं व लड़कियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाना।
फ़ायदे
- महिला-हितैषी डैशबोर्ड: प्रगति की निगरानी के लिए 35 संकेतकों (indicators) वाला एक विशेष डैशबोर्ड विकसित किया गया है।
- मास्टर ट्रेनर: ग्राम पंचायतों के क्षमता निर्माण के लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं।
- महिला ग्राम सभाएं: 8 मार्च, 2025 को राष्ट्रव्यापी महिला ग्राम सभाएं आयोजित की गईं, जो जमीनी स्तर पर इस पहल को मजबूती प्रदान करेंगी।
- स्थानीयकरण: यह पहल सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण के तहत आती है।
26. नई स्वर्णिमा योजना (New Swarnima Scheme for Women)
कब लॉन्च किया गया: दिसंबर 2023 के आसपास सक्रिय रूप से प्रचारित
मंत्रालय: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम – NBCFDC)।
उद्देश्य: सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) की महिलाओं को व्यवसाय के लिए कम ब्याज पर ऋण देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना।
फ़ायदे
- ऋण राशि: अधिकतम ₹2,00,000 (दो लाख रुपये)।
- ब्याज दर: बहुत कम, 5% प्रति वर्ष।
- स्व-निवेश की आवश्यकता नहीं: ₹2 लाख तक की परियोजनाओं के लिए महिला को अपनी ओर से कोई पैसा लगाने की आवश्यकता नहीं है।
- पुनर्भुगतान: ६ महीने की मोरेटोरियम अवधि के साथ 8 वर्षों में चुकाना।
27. महिला समृद्धि योजना (Mahila Samridhi Yojana)
कब लॉन्च किया गया: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत
मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
उद्देश्य: पिछड़े या गरीब पृष्ठभूमि की महिला उद्यमियों को सूक्ष्म वित्त प्रदान कर सशक्त बनाना।
फ़ायदे: स्वयं सहायता समूहों (SHG) या सीधे महिलाओं को ऋण। विशेष रूप से अनुसूचित जाति/जनजाति और आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं पर फोकस। आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण दोनों को बढ़ावा।
28. महिला वैज्ञानिक योजना (Women Scientists Scheme – WOS) – अब WISE-KIRAN के अंतर्गत माना जाता है
कब लॉन्च किया गया: वर्ष 2003-04 (12 अप्रैल 2018 को पुनर्गठित/संशोधित)
मंत्रालय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology)] (DST)
उद्देश्य: करियर ब्रेक (पारिवारिक कारणों से) ले चुकी योग्य महिलाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के अवसर प्रदान करना और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना।
फ़ायदे
- आर्थिक सहायता: महिला वैज्ञानिकों को शोध के लिए 3 साल तक की फेलोशिप और अनुसंधान अनुदान (Research Grant) प्रदान की जाती है।
- करियर वापसी: जो महिलाएँ पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नौकरी छोड़ चुकी हैं, उन्हें फिर से पेशेवर बनने का अवसर मिलता है।
- लचीलापन: इसमें घर से काम करने या शोध करने की सुविधा है, जिससे व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में संतुलन बना रहता है।
- उम्र सीमा: यह 27 से 57 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के लिए उपलब्ध है।
29. WISE (Women in Science, Engineering and Technology) (WISE) – WISE-KIRAN
कब लॉन्च किया गया: 2018
मंत्रालय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
उद्देश्य
- STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
- पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण करियर में ब्रेक लेने वाली महिलाओं को वापस शोध/नौकरी में लाना।
- लैंगिक रूढ़ियों को तोड़कर लड़कियों को करियर विकल्पों के रूप में विज्ञान को चुनने के लिए प्रोत्साहित करना।
प्रमुख कार्यक्रम/घटक
- WISE-PhD: पीएचडी करने वाली महिलाओं के लिए छात्रवृत्ति (27-45 वर्ष)।
- WISE-PDF (Post-Doctoral Fellowship): पीएचडी के बाद अनुसंधान के लिए 27-60 वर्ष की महिलाओं को फैलोशिप।
- WIDUSHI (WISE-Independent Project Grant): वरिष्ठ महिला वैज्ञानिकों को अनुसंधान के लिए।
- विज्ञान ज्योति: स्कूली छात्राओं (कक्षा 9-12) को STEM में करियर के लिए प्रोत्साहित करना।
- GATI (Gender Advancement for Transforming Institutions): STEM संस्थानों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता: शोध और शिक्षा के लिए 5 वर्षों तक की फेलोशिप (फेलोशिप राशि: ₹31,000 – ₹55,000+ प्रति माह)।
- करियर पुनरुद्धार: 27-60 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं के लिए अनुसंधान में वापसी।
- अकादमिक सहायता: विज्ञान ज्योति के तहत परामर्श (counseling), वैज्ञानिक संस्थानों का दौरा और कार्यशालाएं।
- सामाजिक सशक्तिकरण: ‘WIDUSHI’ और ‘SCOPE’ के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए शोध का अवसर।
30. स्वयं शक्ति सहकार योजना
कब लॉन्च किया गया: फरवरी 2026
मंत्रालय: सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार।
उद्देश्य: महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों और SHGs को मजबूत करना, वित्तीय सहायता (कार्यशील पूंजी/टर्म लोन) के माध्यम से आय उत्पन्न करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देना, और महिलाओं में उद्यमशीलता का विकास करना।
फ़ायदे
- आसान वित्तपोषण: महिला SHGs को सीधे कम ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा।
- क्षमता निर्माण: महिला सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रशिक्षण और सहायता।
- आर्थिक सशक्तीकरण: डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
31. नंदिनी सहकार योजना
कब लॉन्च किया गया: 2020-21 के वित्तीय वर्ष में
मंत्रालय: सहकारिता मंत्रालय के तहत NCDC द्वारा संचालित
उद्देश्य
- महिला सहकारी समितियों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना।
- कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
- महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना।
फ़ायदे
- आसान ऋण: महिला सहकारी समितियों को परियोजना लागत के लिए वित्तीय सहायता (क्रेडिट लिंकेज)।
- ब्याज में छूट: नई और अभिनव गतिविधियों के लिए NCDC द्वारा 2% और अन्य गतिविधियों के लिए 1% तक का ब्याज अनुदान।
- वित्त की कोई सीमा नहीं: परियोजना सहायता पर कोई निश्चित न्यूनतम या अधिकतम सीमा नहीं है।
- क्षमता निर्माण: महिला सदस्यों के लिए गुरुग्राम में LINAC या क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण।
- पात्रता: ऐसी सहकारी समितियां जिसमें कम से कम 50% सदस्य महिलाएं हों और जो कम से कम 3 महीने से काम कर रही हों।
32. साइबर सखी पहल
कब लॉन्च किया गया: मार्च 2026
मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) / राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)
उद्देश्य
- महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए सशक्त बनाना।
- साइबर अपराधों और ऑनलाइन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाना।
- सुरक्षित इंटरनेट प्रथाओं (जैसे कि सुरक्षित पासवर्ड, ऑनलाइन गोपनीयता) के बारे में शिक्षित करना।
फ़ायदे
- आत्मविश्वास में वृद्धि: महिलाएं आत्मविश्वास के साथ इंटरनेट का उपयोग करती हैं।
- साइबर खतरों की पहचान: फिशिंग, डिजिटल दुर्व्यवहार और धोखाधड़ी की पहचान और रिपोर्टिंग में मदद।
- डिजिटल सशक्तिकरण: महिलाओं को डिजिटल साक्षर और जागरूक बनाना।
33. नारी शक्ति वंदन अधिनियम
कब पारित किया गया: सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित (106वां संवैधानिक संशोधन)
मंत्रालय: विधि एवं न्याय मंत्रालय / संसदीय कार्य मंत्रालय
उद्देश्य
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना।
- विधायिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और राजनीतिक सशक्तिकरण।
फ़ायदे
- राजनीतिक भागीदारी: महिलाओं को सीधे निर्वाचित निकायों (लोकसभा, राज्य विधानसभा) में समान अवसर मिलेगा।
- नीति-निर्माण में भूमिका: महिलाओं से संबंधित मुद्दों (स्वास्थ्य, शिक्षा) को प्राथमिकता मिलेगी।
- समानता: ‘महिला विकास से महिला-नेतृत्व वाले विकास’ की ओर भारत को ले जाना।
- एससी/एसटी आरक्षण: इस 33% आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी उप-आरक्षण शामिल है।
34. उडान (UDAN) और विमानन में महिला पहल
कब लॉन्च किया गया: 21 अक्टूबर 2016
मंत्रालय: नागरिक उड्डयन मंत्रालय
उद्देश्य
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: महिला उद्यमियों को हवाई सेवाओं से जोड़कर सशक्त बनाना।
- रोजगार के अवसर: विमानन क्षेत्र में महिलाओं के लिए पायलट, केबिन क्रू, ग्राउंड स्टाफ, और तकनीकी भूमिकाओं में भागीदारी बढ़ाना।
- क्षेत्रीय जुड़ाव: दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को किफायती यात्रा की सुविधा प्रदान करना।
फ़ायदे
- उद्यमिता को बढ़ावा: महिला उद्यमियों को एयरलाइन, कार्गो, या जमीनी सेवाओं में स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहन।
- समावेशी विकास: हवाई अड्डों पर महिलाओं की भागीदारी से स्थानीय रोजगार में वृद्धि।
- सस्ती यात्रा: कम लागत वाली हवाई यात्रा तक पहुंच।
35. मिशन शक्ति (Mission Shakti)
कब लॉन्च किया गया: 1 अप्रैल 2022 से सक्रिय
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य: महिलाओं के लिए हिंसा मुक्त वातावरण बनाना, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाना, और उन्हें राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार के रूप में सशक्त बनाना।
फ़ायदे
- तत्काल सहायता: ‘वन स्टॉप सेंटर’ (OSC) के माध्यम से हिंसा से पीड़ित महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा, और कानूनी सहायता एक ही स्थान पर मिलती है।
- सुरक्षित निवास: ‘शक्ति सदन’ (पूर्ववर्ती स्वाधार गृह और उज्ज्वला योजना) के तहत बेसहारा और तस्करी से बचाई गई महिलाओं को आश्रय और पुनर्वास।
- कार्यस्थल सुरक्षा: ‘सखी निवास’ (Working Women Hostel) के माध्यम से कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास प्रदान करना।
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: कौशल विकास और सूक्ष्म ऋण तक पहुंच बढ़ाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
विशेष बिंदु: उत्तर प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2020 में अपना ‘मिशन शक्ति’ अभियान अलग से भी शुरू किया था, जो अब 5.0 चरण (सितंबर 2025) में है।
36. नारी शक्ति पुरस्कार
कब लॉन्च किया गया: 2016 (वार्षिक)
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य: शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कार्य, खेल, नेतृत्व और अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित करना।
फ़ायदे: राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार और मान्यता। इससे महिला सशक्तिकरण की भावना का जश्न मनाया जाता है और अन्य महिलाओं को प्रेरणा मिलती है।
37. स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) – SBM-G
कब लॉन्च किया गया: 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
मंत्रालय: पंचायती राज मंत्रालय / जल शक्ति मंत्रालय
उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच को समाप्त करना, जीवन की गुणवत्ता में सुधार, और ठोस/तरल कचरा प्रबंधन (SLWM) के माध्यम से ओडीएफ+ (ODF Plus) स्थिति प्राप्त करना।
फ़ायदे
- सुरक्षा और सम्मान: यूनिसेफ के अनुसार, 93% महिलाओं ने घर में शौचालय बनने के बाद सुरक्षित महसूस किया।
- स्वास्थ्य में सुधार: बीमारियों में कमी, विशेषकर डायरिया से होने वाली मौतों में गिरावट।
- आर्थिक बचत: ओडीएफ गांवों में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में कमी से सालाना बचत।
- सुविधा: घर में शौचालय होने से महिलाओं को रात या दिन में बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिली।
38. सौर चरखा मिशन
कब लॉन्च किया गया: 27 जून 2018
मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) – कार्यान्वयन एजेंसी: खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC)
उद्देश्य
- ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर चरखा क्लस्टर के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास सुनिश्चित करना।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना।
- कम लागत वाली, नवीन तकनीकों का उपयोग करके स्थायी रोजगार उत्पन्न करना।
- सोलर चरखा मिशन एक व्यवसाय-केंद्रित योजना है जिसका उद्देश्य कताई करने वालों, बुनकरों, सिलाई करने वालों और अन्य कुशल कारीगरों सहित 200 से 2042 लाभार्थियों के साथ ‘सोलर चरखा क्लस्टर’ बनाना है।
- प्रत्येक क्लस्टर को अधिकतम 9.60 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल सकती है, जो व्यक्तियों और एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के लिए पूंजी सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है, साथ ही कार्यशील पूंजी और क्षमता निर्माण के लिए ब्याज सबवेंशन भी शामिल है।
- ये सौर चरखे सौर ऊर्जा से चलेंगे, जो एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। इस पर्यावरण-अनुकूल कार्यक्रम का उद्देश्य हरित अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान देना और कारीगरों के लिए स्थायी रोजगार सृजित करना है।
फ़ायदे
- रोजगार सृजन: प्रत्येक क्लस्टर में 200 से 2042 कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं पर ध्यान दिया गया है।
- सब्सिडी और सहायता: प्रति क्लस्टर 9.60 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान।
- तकनीकी सहायता: 10 स्पिंडल वाले सौर चरखे प्रदान किए जाते हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है।
- पर्यावरण के अनुकूल: सौर ऊर्जा का उपयोग होने से यह हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
- आजीविका में वृद्धि: कारीगरों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका का साधन।
39. नई रोशनी योजना
कब लॉन्च किया गया: वर्ष 2012-13 से क्रियाशील
मंत्रालय: अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय
उद्देश्य: अल्पसंख्यक महिलाओं को सशक्त बनाना ताकि वे सरकारी संस्थानों, बैंकों और अन्य तंत्रों के साथ बातचीत कर सकें और नेतृत्व की भूमिका निभा सकें।।
फ़ायदे
- प्रशिक्षण: महिलाओं को नेतृत्व, स्वास्थ्य और स्वच्छता, कानूनी अधिकारों, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता पर प्रशिक्षण दिया जाता है।
- सशक्तीकरण: यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करता है।
- पात्रता: 18 से 65 वर्ष की आयु वाली अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी) की महिलाएं।
- कार्यान्वयन: यह योजना गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नागरिक समाजों और सरकारी संस्थानों के माध्यम से लागू की जाती है।
- विलय: अब इसे वित्त वर्ष 2022-23 से प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना के एक घटक के रूप में शामिल कर लिया गया है।
40. राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)
कब लॉन्च किया गया: 2014-15 (संशोधित: 2021-22)
मंत्रालय: पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार
उद्देश्य
- उत्पादकता वृद्धि: नस्ल सुधार के माध्यम से प्रति पशु दूध, मांस, अंडे और ऊन के उत्पादन को बढ़ाना।
- रोजगार सृजन: ग्रामीण क्षेत्रों में भेड़, बकरी, मुर्गी पालन और सुअर पालन जैसे सूक्ष्म उद्यम स्थापित करना।
- चारा विकास: चारे और फीड (पशु आहार) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- जोखिम प्रबंधन: पशुधन बीमा के माध्यम से पशुपालकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
फ़ायदे
- उद्यम स्थापित करने के लिए: 50% तक की पूंजीगत सब्सिडी (₹50 लाख तक)।
- मुर्गीपालन (Poultry): कम इनपुट तकनीक वाली मुर्गियों के लिए 50% सब्सिडी।
- भेड़/बकरी पालन: 50% सब्सिडी (500+25 यूनिट तक)।
- सूअर पालन (Piggery): 50% सब्सिडी (100+25 यूनिट तक)।
- फीड और चारा: चारा ब्लॉक बनाने वाली मशीनों और चारा प्रसंस्करण के लिए वित्तीय सहायता।
41. महिला उद्यमिता कार्यक्रम (स्वावलंबिनी (Swavalambini)
कब लॉन्च किया गया: फरवरी 2025 (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में), औपचारिक शुभारंभ मार्च 2025
मंत्रालय: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE)
उद्देश्य
- उच्च शिक्षा संस्थानों की छात्राओं में उद्यमिता (Entrepreneurship) की मानसिकता विकसित करना।
- व्यवसाय शुरू करने के लिए 40 घंटे का गहन प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करना।
- वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव और कानूनी सहायता प्रदान करना।
फ़ायदे
- संरचित प्रशिक्षण: 2-दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम (EAP) और 40 घंटे का EDP प्रशिक्षण।
- वित्तीय और तकनीकी सहयोग: स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, फंडिंग और कानूनी सहायता।
- महिला सशक्तिकरण: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत 1,200 छात्राओं को उद्यमी बनने के लिए सशक्त बनाना।
- नेटवर्किंग: उद्योग निकायों और वित्तीय संस्थानों तक पहुंच।
- यह कार्यक्रम वर्तमान में असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश (मेरठ) और तेलंगाना के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में लागू किया जा रहा है।
42. महिला उद्यम विकास योजना (WEDS)
कब लॉन्च किया गया: —
मंत्रालय: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)
उद्देश्य: महिला उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने/बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता, और कौशल विकास के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
फ़ायदे
- वित्तीय सहायता: परियोजना लागत का अधिकतम 75% सावधि ऋण के रूप में उपलब्ध है।
- कार्यशील पूंजी: 15 लाख रुपये तक की परियोजना लागत (कार्यशील पूंजी सहित) कवर की जाती है।
- योग्यता: 18-50 वर्ष की आयु के बीच की कुशल महिला उद्यमी (छोटे व्यवसाय/ट्रेड में) आवेदन कर सकती हैं।
- विस्तार: मौजूदा व्यवसायों के आधुनिकीकरण और विविधीकरण के लिए भी ऋण मिलता है।
- योग्य उद्यमी NEDFi (North Eastern Development Finance Corporation) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
43. शी-मार्ट्स (SHE-Marts) – नई पहल
कब लॉन्च किया गया: बजट 2026-27 में घोषणा (मार्च 2026 के आसपास कार्यान्वयन शुरू)
मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय (DAY-NRLM के अंतर्गत)
उद्देश्य
- उद्यमी बनाना: ग्रामीण महिलाओं को केवल ऋण लेने वाली (credit-seekers) श्रेणी से निकालकर उन्हें व्यवसाय की मालकिन (enterprise owners) बनाना।
- बाजार पहुंच: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा बनाए गए उत्पादों को सीधे बेचने के लिए एक स्थायी और संगठित रिटेल मंच प्रदान करना।
- बिचौलियों का अंत: उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुँचाकर बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना और महिलाओं का मुनाफा बढ़ाना।
फ़ायदे
- सामुदायिक स्वामित्व: ये ‘शी-मार्ट’ क्लस्टर स्तर के संघों (Cluster Level Federations) के भीतर समुदाय के स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट होंगे।
- ब्रांडिंग का अवसर: महिलाओं को अपने स्थानीय उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने और उनकी दृश्यता (visibility) बढ़ाने का मौका मिलेगा।
- स्थिर आय: संगठित बिक्री मंच मिलने से ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के स्थायी और सुरक्षित स्रोत बनेंगे।
- लखपति दीदी का अगला कदम: यह योजना ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को और अधिक मजबूत करेगी।
44. गर्ल्स हॉस्टल्स नेटवर्क (STEM शिक्षा के लिए)
कब लॉन्च किया गया: बजट 2026-27 में प्रमुख घोषणा
मंत्रालय: शिक्षा मंत्रालय
उद्देश्य
- STEM शिक्षा को बढ़ावा: विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाना।
- सुरक्षित आवास: दूर-दराज के इलाकों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित, किफायती और शिक्षा के अनुकूल आवास प्रदान करना।
- ड्रॉपआउट दर कम करना: विशेष रूप से हायर एजुकेशन में छात्राओं के ड्रॉपआउट (पढ़ाई छोड़ने) को रोकना।
- NEP 2020: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करना।
फ़ायदे
- हर जिले में सुविधा: देश के प्रत्येक जिले में नए गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण।
- लैब और रिसर्च तक आसान पहुंच: STEM छात्रों को प्रयोगशालाओं और रिसर्च सेंटर के पास आवास मिलने से पढ़ाई में आसानी।
- बेहतर शिक्षा का अवसर: सुरक्षित माहौल में उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद।
- वायबिलिटी गैप फंड (VGF): कम विकसित जिलों में भी हॉस्टल निर्माण के लिए VGF का उपयोग।
- सुरक्षा और पहुंच सुनिश्चित होगी। ग्रामीण और दूरदराज की लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी। इससे महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या बढ़ेगी।
45. लखपति दीदी योजना
कब लॉन्च किया गया: 15 अगस्त 2023
मंत्रालय: केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय
उद्देश्य: स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को सालाना 1 लाख रुपये से अधिक आय अर्जित करने योग्य बनाना।
फ़ायदे:
- प्रारंभ में 2 करोड़ और अब बढ़ाकर 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना।
- ब्याज मुक्त ऋण: स्वरोजगार शुरू करने के लिए ₹5 लाख तक का बिना ब्याज वाला लोन।
- कौशल प्रशिक्षण: महिलाओं को ड्रोन संचालन, एलईडी बल्ब मेकिंग, प्लंबिंग और सिलाई जैसे विभिन्न कौशल सिखाए जाते हैं।
- आत्मनिर्भरता: महिलाओं की आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना।
- नमो ड्रोन दीदी: इस योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
- सामाजिक सशक्तिकरण: महिलाओं का आत्मविश्वास और सामाजिक स्थिति में सुधार।
- 2025 तक 3 करोड़ से अधिक लक्ष्य हासिल हो चुके हैं।
- अब 2029-30 तक कुल 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य।
- 2026 में 3.07 करोड़ से अधिक महिलाएं पहले ही लखपति बन चुकी हैं।
46. नामो ड्रोन दीदी योजना
कब लॉन्च किया गया: 30 नवंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय (DAY-NRLM के तहत) की एक संयुक्त पहल
उद्देश्य: 15,000 महिला SHG को ड्रोन पायलट प्रशिक्षित कर कृषि सेवाएं (खाद, कीटनाशक छिड़काव) प्रदान करना।
फ़ायदे
- कुल बजट 1,261 करोड़ रुपये (2023-24 से 2025-26)। 2026 तक सैकड़ों ड्रोन वितरित हो चुके हैं।
- आय में वृद्धि: महिलाएँ ड्रोन किराए पर देकर प्रति वर्ष ₹1 लाख से अधिक की अतिरिक्त आय कमा सकती हैं।
- आधुनिक कृषि: ड्रोन के माध्यम से तरल उर्वरकों और कीटनाशकों का सटीक और सुरक्षित छिड़काव।
- आर्थिक सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना।
47. जेंडर बजट 2026-27
कब लागू: वित्तीय वर्ष 2026-27 (1 फरवरी 2026 (संसद में केंद्रीय बजट के साथ) – भारत में जेंडर बजटिंग की औपचारिक शुरुआत 2005-06 में हुई थी।
मंत्रालय: वित्त मंत्रालय (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का प्रमुख योगदान)
उद्देश्य
- लैंगिक समानता: सरकारी संसाधनों के आवंटन में जेंडर आधारित अंतर को कम करना।
- सशक्तिकरण: महिलाओं और बालिकाओं के लिए विशिष्ट योजनाओं के माध्यम से उनके आर्थिक और सामाजिक स्तर को सुधारना।
- निगरानी: यह सुनिश्चित करना कि बजट का लाभ महिलाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
- मुख्यधारा में लाना: विकास की सभी योजनाओं में महिलाओं की जरूरतों को शामिल करना।
फ़ायदे: शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता, सुरक्षा और कौशल विकास पर अधिक फोकस। इससे सभी महिला केंद्रित योजनाओं को मजबूत वित्तीय समर्थन मिलेगा।
48. कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास (Working Women Hostel – WWH) – Sakhi Niwas
कब लागू: 1972-73
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- कामकाजी महिलाओं (एकल, तलाकशुदा, विधवा या वैवाहिक रूप से अलग) को सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधा प्रदान करना।
- उनके बच्चों के लिए डे-केयर (Day Care) सुविधा उपलब्ध कराना।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर वाली जगहों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
फ़ायदे
- किफायती आवास: महानगरों और अन्य क्षेत्रों में उचित किराये पर कमरा।
- सुरक्षा: कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल।
- सुविधाएं: बच्चों के लिए डे-केयर, सुरक्षित स्थान।
- पात्रता: 50,000 रुपये तक (मेट्रो) और 35,000 रुपये तक (अन्य) मासिक आय वाली कामकाजी महिलाएं।
49. किशोरी शक्ति योजना (KSY)
कब लागू: 2000-01
मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
उद्देश्य
- पोषण में सुधार: कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए पौष्टिक आहार प्रदान करना।
- स्वास्थ्य जागरूकता: स्वच्छता, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और बाल देखभाल के प्रति जागरूक करना।
- कौशल विकास: व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना।
- सामाजिक सशक्तिकरण: जीवन कौशल (Life skills), साक्षरता और सामाजिक मुद्दों के बारे में शिक्षित करना।
- बाल विवाह रोकना: किशोरियों को जागरूक कर 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह को रोकना।
फ़ायदे
- पूरक पोषण: आंगनवाड़ी के माध्यम से 300 दिनों तक पौष्टिक भोजन।
- कौशल प्रशिक्षण: घरेलू और व्यावसायिक कौशल का विकास ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।
- स्वास्थ्य जांच: नियमित स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जांच।
- शिक्षा/साक्षरता: स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों के लिए अनौपचारिक शिक्षा और कार्यात्मक साक्षरता।
- आत्मविश्वास: सामाजिक मुद्दों और अधिकारों के प्रति जागरूकता से आत्म-विकास।
निष्कर्ष: List of Women’s Empowerment Schemes in India
भारत सरकार द्वारा 2026 तक शुरू की गई और जारी सभी योजनाएँ देश के समग्र विकास, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल प्रगति और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा देती हैं। मंत्रालयवार इन योजनाओं का उद्देश्य नागरिकों तक लाभ तेज़ी से पहुँचाना, पारदर्शिता बढ़ाना और जीवन स्तर में सुधार करना है। स्वास्थ्य से शिक्षा, रोजगार से डिजिटलाइजेशन और महिलाओं–बच्चों से लेकर किसानों तक—हर वर्ग के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। यह अद्यतन सूची दिखाती है कि सरकार की प्राथमिकता समावेशी विकास और सभी तक पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण हो सके। List of Women’s Empowerment Schemes in India
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