Vithalbhai Patel Biography: जानिए स्वराज पार्टी के सह-संस्थापक की कहानी!

विठ्ठलभाई पटेल का जीवन परिचय: स्वराज पार्टी, केंद्रीय विधान सभा और संसदीय योगदान! | Vithalbhai Patel Biography | Biography of Vithalbhai Patel

Vithalbhai Patel Biography: विठ्ठलभाई पटेल एक प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, विधायक और राजनीतिक नेता थे। उनका जन्म 27 सितंबर 1873 को हुआ था और निधन 22 अक्टूबर 1933 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुआ। वे सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विठ्ठलभाई स्वराज पार्टी के सह-संस्थापक थे और केंद्रीय विधान सभा के पहले भारतीय अध्यक्ष बने। योगदान ने भारत की संसदीय परंपराओं को आकार दिया, जो आज भी प्रासंगिक हैं।

this is the image of Vithalbhai Patel contributions

विठ्ठलभाई पटेल का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे नेता के रूप में दर्ज है जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ संसदीय तरीके से संघर्ष किया। वे महात्मा गांधी के दर्शन से पूरी तरह सहमत नहीं थे, लेकिन फिर भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे। वाक्पटुता और हास्यपूर्ण भाषणों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। उन्होंने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी स्वतंत्रता संग्राम की लौ जलाए रखी। दिल्ली विधान सभा ने हाल ही में उनकी केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष बनने की 100वीं वर्षगांठ पर एक सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें अखिल भारतीय वक्ताओं ने भाग लिया। यह दिखाता है कि उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।

प्रारंभिक जीवन: Vithalbhai Patel Biography

विठ्ठलभाई पटेल का जन्म गुजरात राज्य के नाडियाड में 27 सितंबर 1873 को हुआ था। वे पांच पटेल भाइयों में तीसरे थे और सरदार वल्लभभाई पटेल से दो वर्ष बड़े थे। उनका पालन-पोषण करमसाद गांव में हुआ। उनके पिता झावेरभाई पटेल और माता लाडबाई पटेल वैष्णव हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय के कट्टर अनुयायी थे। इस संप्रदाय में व्यक्तिगत जीवन की पवित्रता को भक्तिमय जीवन के लिए आवश्यक माना जाता है। इस धर्म ने उनके माता-पिता में आदर्शवाद का भाव जगाया, जिसका विठ्ठलभाई और वल्लभभाई पर गहरा प्रभाव पड़ा।

कुछ आधुनिक लेखों में उनकी जन्मतिथि में त्रुटि दर्ज है। उनके अंतिम पासपोर्ट में जन्मतिथि स्पष्ट रूप से 27 सितंबर 1873 लिखी है, लेकिन मृत्यु के बाद शोक संदेशों में इसे गलत तरीके से 18 फरवरी 1871 दर्ज किया गया, जिससे भ्रम हुआ। वे अपने छोटे भाई से केवल दो वर्ष बड़े थे। विठ्ठलभाई ने नाडियाड और बंबई में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने गोधरा और बोरसाद की अदालतों में जूनियर वकील के रूप में काम किया। मात्र 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह दीवालीबा नामक लड़की से हुआ, जो दूसरे गांव की थीं।

इंग्लैंड में पढ़ाई करना दोनों भाइयों का सपना था। वल्लभभाई ने पर्याप्त धन बचाया और पासपोर्ट तथा यात्रा टिकट मंगवाए। लेकिन डाकिया ने उन्हें विठ्ठलभाई को दे दिया, क्योंकि पता श्री वी.जे. पटेल, वकील के नाम से था। विठ्ठलभाई ने जिद की और उन दस्तावेजों पर यात्रा की, जो वास्तव में वल्लभभाई के लिए थे। उन्होंने कहा कि बड़े भाई का छोटे भाई का अनुसरण करना सामाजिक रूप से निंदनीय होगा। वल्लभभाई ने अपने भाई का सम्मान किया और विठ्ठलभाई को इंग्लैंड जाने दिया, साथ ही उनके रहने का खर्च भी उठाया। विठ्ठलभाई को गुप्त रूप से भेजा गया, क्योंकि उनके समुदाय में समुद्र पार करना वर्जित था।

लंदन के मिडिल टेम्प्ल में दाखिला लेने के बाद, विठ्ठलभाई ने 36 महीने का कोर्स 30 महीनों में पूरा किया और अपनी कक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। 1913 में गुजरात लौटकर वे बंबई और अहमदाबाद की अदालतों में महत्वपूर्ण बैरिस्टर बने। हालांकि, 1915 में उनकी पत्नी दीवालीबा का निधन हो गया और वे जीवनभर विधुर रहे। वल्लभभाई ने भी स्वयं अध्ययन किया और वकील बने, लेकिन विठ्ठलभाई पहले ही राजनीति में प्रवेश कर चुके थे।

प्रारंभिक जीवन के प्रमुख बिंदु:

  • जन्म: 27 सितंबर 1873, नाडियाड, गुजरात।
  • परिवार: झावेरभाई और लाडबाई पटेल के पुत्र, स्वामीनारायण संप्रदाय के अनुयायी।
  • शिक्षा: नाडियाड, बंबई; इंग्लैंड में बैरिस्टर की पढ़ाई।
  • विवाह: 9 वर्ष की आयु में दीवालीबा से, 1915 में पत्नी का निधन।
  • भाई: सरदार वल्लभभाई पटेल से दो वर्ष बड़े, इंग्लैंड जाने में भाई का समर्थन।

यह प्रारंभिक जीवन ने उन्हें मजबूत चरित्र और आदर्शवाद दिया, जो बाद में राजनीति में दिखा।

राजनीतिक करियर की शुरुआत

विठ्ठलभाई पटेल ने राजनीति में प्रवेश वल्लभभाई से बहुत पहले किया। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रमुख नाम बन गए। हालांकि वे महात्मा गांधी के दर्शन और व्यवहार से पूरी तरह सहमत नहीं थे, फिर भी कांग्रेस में शामिल हुए और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष शुरू किया। उनके पास कोई क्षेत्रीय समर्थन आधार नहीं था, लेकिन जोशीले भाषणों और लेखों से संघर्ष को व्यापक बनाया।

समर्थकों की मदद से उन्होंने बॉम्बे विधान परिषद में सीट जीती। 1912 में बॉम्बे विधान परिषद और 1918 में इंपीरियल विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए। 1914 में उन्होंने बॉम्बे प्रांतीय विधान परिषद में दो विधेयकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: “बॉम्बे जिला नगर अधिनियम संशोधन विधेयक” और “नगर नियोजन विधेयक”। उनका सबसे प्रसिद्ध प्रस्ताव 1917 में बॉम्बे शहर के बाहर प्राथमिक शिक्षा के विस्तार का था। लंबे संघर्ष के बाद, कई संशोधनों के साथ विधेयक पारित हुआ।

विधान परिषद में उन्होंने चिकित्सा अभ्यास से संबंधित कई विधेयक पारित कराए। 1912 के बॉम्बे चिकित्सा अधिनियम में संशोधन के लिए डॉक्टरों को पंजीकृत करने और कदाचार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की, हालांकि आयुर्वेदिक चिकित्सकों को शामिल नहीं किया गया। वाक्पटुता और हास्य-व्यंग्य ने उन्हें लोकप्रिय बनाया, और वे राज के अधिकारियों को नीचा दिखाने में माहिर थे।

राजनीतिक करियर की शुरुआत के प्रमुख बिंदु:

  • प्रवेश: कांग्रेस में शामिल, गांधी से असहमति के बावजूद।
  • निर्वाचन: 1912 में बॉम्बे विधान परिषद, 1918 में इंपीरियल विधान परिषद।
  • विधेयक: प्राथमिक शिक्षा विस्तार (1917), चिकित्सा अधिनियम संशोधन (1912)।
  • शैली: जोशीले भाषण, हास्य-व्यंग्य, अधिकारियों पर जीत।

यह अवधि ने उन्हें संसदीय राजनीति में मजबूत आधार दिया।

स्वराज पार्टी की स्थापना

1922 में चौरी चौरा घटना के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया। इससे विठ्ठलभाई निराश हुए और उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) और मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की। पार्टी का मूल उद्देश्य संसदों में प्रवेश करके अंग्रेजों द्वारा संचालित सरकार को कमजोर करना और समाप्त करना था।

स्वराज पार्टी केंद्रीय विधानमंडल और अधिकांश प्रांतीय विधानसभाओं में सबसे बड़ी पार्टी बनी। विठ्ठलभाई पटेल गांधी के नेतृत्व के विरुद्ध विद्रोह करने वाले प्रमुख नेताओं में थे, जब राष्ट्र असहयोग के अंत से दुखी था। पार्टी ने ब्रिटिश राज को विफल करने के लिए विधानसभाओं में प्रवेश की रणनीति अपनाई। विठ्ठलभाई की वाक्पटुता ने पार्टी को लोकप्रिय बनाया।

स्वराज पार्टी के प्रमुख बिंदु:

  • स्थापना: 1922, चौरी चौरा के बाद कांग्रेस छोड़कर।
  • सह-संस्थापक: चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू, विठ्ठलभाई पटेल।
  • उद्देश्य: संसद में प्रवेश, सरकार को कमजोर करना, ब्रिटिश राज का अंत।
  • सफलता: केंद्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं में सबसे बड़ी पार्टी।
  • विरोध: गांधी के असहयोग समाप्ति के खिलाफ विद्रोह।

यह पार्टी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।

केंद्रीय विधान सभा में भूमिका

1923 में विठ्ठलभाई केंद्रीय विधान सभा के लिए चुने गए। 1924 में सदस्य बने और 1925 में विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) बने। वे इस पद पर पहले भारतीय थे, सर फ्रेडरिक व्हाइट की सेवानिवृत्ति के बाद पहले निर्वाचित अध्यक्ष। केंद्रीय विधान सभा सीमित शक्तियों वाला सदन था, जिसमें निर्वाचित और नियुक्त भारतीय-ब्रिटिश प्रतिनिधि थे।

अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने विधानसभा के कामकाज के लिए तौर-तरीके और प्रक्रियाएं निर्धारित कीं। 1928 में भारत सरकार से स्वतंत्र विधानसभा के लिए अलग कार्यालय बनाया। उन्होंने निर्णायक मत में यथास्थिति के पक्ष में प्रयोग किया और बहसों में अध्यक्ष की तटस्थता की परंपरा स्थापित की। योगदान ने आजाद भारत की विधायी संस्थाओं की नींव रखी।

केंद्रीय विधान सभा में भूमिका के प्रमुख बिंदु:

  • निर्वाचन: 1923, सदस्य 1924, अध्यक्ष 1925।
  • पहले भारतीय: विधानसभा अध्यक्ष के रूप में।
  • प्रक्रियाएं: कामकाज के नियम, तटस्थता की परंपरा।
  • स्वतंत्रता: अलग कार्यालय (1928), निर्णायक मत का प्रयोग।

यह पद ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी।

संसदीय योगदान

विठ्ठलभाई पटेल ने भारत की संसदीय परंपराओं को आकार दिया। उनके योगदान ने आधुनिक भारतीय संसद की जड़ें मजबूत कीं। उन्होंने संसद की सुरक्षा, स्वतंत्र सचिवालय और विधान सभा विभाग की स्थापना की।

  1. संसद की सुरक्षा:
    • वार्ड और वॉच सिस्टम शुरू किया, जिससे अध्यक्ष का नियंत्रण रहा, जो 2024 तक जारी है।
    • 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त के बम हमले के बाद ब्रिटिश प्रयासों का विरोध किया, अध्यक्ष के अधिकार संरक्षित रखे।
  2. स्वतंत्र संसद सचिवालय:
    • अध्यक्ष को रिपोर्ट करने वाला स्वायत्त सचिवालय स्थापित किया।
    • विधायी सलाह और प्रशासनिक कामकाज को कार्यपालिका से स्वतंत्र रखा।
  3. विधान सभा विभाग (1929):
    • विधायी मामलों के लिए अलग विभाग बनाया, प्रक्रियात्मक स्वायत्तता बढ़ाई।
    • इससे विधायी प्रक्रिया में निरंतरता और निष्पक्षता आई।

इन योगदानों ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूत किया। उन्होंने संवैधानिक प्रक्रियाओं, संसदीय मर्यादा और सिद्धांतों पर आधारित असहमति पर जोर दिया, जो कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।

संसदीय योगदान के प्रमुख बिंदु:

  • सुरक्षा: वार्ड सिस्टम, बम हमले के बाद विरोध।
  • सचिवालय: स्वायत्त, कार्यपालिका से अलग।
  • विभाग: विधान सभा विभाग (1929), स्वायत्तता।
  • प्रभाव: आधुनिक संसद की नींव, निष्पक्षता।

भाषण कला और लोगों पर प्रभाव

विठ्ठलभाई पटेल अपनी होशियारी, वाक्पटुता और हास्यपूर्ण भाषणों के लिए मशहूर थे। वे जनता को अपनी ओर खींचते और विधायकों को मना लेते। उनके सक्रियतावाद ने भारतीय स्वतंत्रता की लड़ाई को विश्व स्तर पर पहुंचाया, औपनिवेशिक अन्याय पर ध्यान आकर्षित किया।

भाषण कला के प्रमुख बिंदु:

  • शैली: हास्य-व्यंग्य, जोशीले भाषण।
  • लोकप्रियता: जनता और विधायकों में प्रभाव।
  • वैश्विक प्रभाव: स्वतंत्रता संग्राम की लौ विदेशों में प्रज्वलित।
  • प्रभाव: संवैधानिक शासन की रक्षा, भाई वल्लभभाई को प्रेरणा।

उनके भाषणों ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी।

मौत और विरासत

विठ्ठलभाई पटेल का निधन 22 अक्टूबर 1933 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में हुआ। उस समय वे लीग ऑफ नेशंस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उनकी विरासत में संसदीय लोकतंत्र के पहले व्यक्ति होना, विधायी स्वतंत्रता की मिसालें कायम करना और राजनीतिक नेताओं को प्रेरित करना शामिल है। उन्होंने अपने भाई वल्लभभाई को संवैधानिक शासन की रक्षा के लिए प्रेरित किया।

विरासत के प्रमुख बिंदु:

  • मौत: 22 अक्टूबर 1933, जिनेवा, लीग ऑफ नेशंस में।
  • विरासत: संसदीय लोकतंत्र, विधायी स्वतंत्रता, प्रेरणा स्रोत।
  • प्रभाव: राष्ट्रवादी सोच, कानूनी स्तर पर योगदान।

स्मरणोत्सव

हाल ही में दिल्ली विधान सभा में ‘विठ्ठलभाई पटेल: भारत में संविधान और विधायी संस्थाओं को आकार देने में उनकी भूमिका’ पर कॉन्फ्रेंस हुई। उनकी केंद्रीय विधान सभा अध्यक्ष बनने की 100वीं वर्षगांठ पर अखिल भारतीय वक्ताओं का सम्मेलन आयोजित किया गया। उनका जीवन संसद के कामकाज, संवैधानिक सुरक्षा और राष्ट्रवादी सोच समझने के लिए उपयोगी है।

स्मरणोत्सव के प्रमुख बिंदु:

  • सम्मेलन: दिल्ली विधान सभा, 100वीं वर्षगांठ।
  • विषय: संविधान और विधायी संस्थाएं।
  • महत्व: संसदीय इतिहास की समझ।

FAQs: Vithalbhai Patel Biography

Q1. विठ्ठलभाई पटेल कौन थे?

विठ्ठलभाई पटेल एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, स्वराज पार्टी के सह-संस्थापक और केंद्रीय विधान सभा के पहले भारतीय अध्यक्ष (स्पीकर) थे।

Q2. विठ्ठलभाई पटेल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उनका जन्म 27 सितंबर 1873 को गुजरात के नाडियाड में हुआ था।

Q3. विठ्ठलभाई पटेल का सरदार वल्लभभाई पटेल से क्या संबंध था?

विठ्ठलभाई पटेल, सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई थे।

Q4. क्या विठ्ठलभाई पटेल महात्मा गांधी के विचारों से सहमत थे?

वे गांधी जी का सम्मान करते थे, लेकिन उनकी रणनीति और कार्यशैली से पूरी तरह सहमत नहीं थे।

Q5. स्वराज पार्टी की स्थापना क्यों की गई थी?

1922 में असहयोग आंदोलन के निलंबन के बाद, ब्रिटिश सरकार को विधानसभाओं के भीतर चुनौती देने के उद्देश्य से स्वराज पार्टी बनाई गई।

Q6. स्वराज पार्टी की स्थापना किन नेताओं ने की थी?

चित्तरंजन दास, मोतीलाल नेहरू और विठ्ठलभाई पटेल ने मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की।

Q7. विठ्ठलभाई पटेल केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष कब बने?

वे 1925 में केंद्रीय विधान सभा के पहले भारतीय अध्यक्ष बने।

Q8. विठ्ठलभाई पटेल का संसदीय योगदान क्यों महत्वपूर्ण है?

उन्होंने संसद की निष्पक्षता, स्पीकर की स्वायत्तता और स्वतंत्र संसद सचिवालय की नींव रखी।

Q9. भारतीय संसद की सुरक्षा से उनका क्या संबंध था?

उन्होंने संसद की सुरक्षा को स्पीकर के नियंत्रण में रखने के लिए Ward and Watch System लागू किया।

Q10. भगत सिंह बम कांड के बाद उन्होंने क्या भूमिका निभाई?

1929 के बम कांड के बाद ब्रिटिश हस्तक्षेप का विरोध कर उन्होंने स्पीकर के अधिकारों की रक्षा की।

Q11. क्या विठ्ठलभाई पटेल ने इंग्लैंड में पढ़ाई की थी?

हाँ, उन्होंने लंदन के मिडिल टेम्पल से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी।

Q12. विठ्ठलभाई पटेल की मृत्यु कब हुई?

22 अक्टूबर 1933 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में उनका निधन हुआ।

Q13. उनकी विरासत को आज कैसे याद किया जाता है?

उन्हें भारतीय संसदीय लोकतंत्र के प्रारंभिक शिल्पकार के रूप में सम्मानित किया जाता है।

Q14. विठ्ठलभाई पटेल का इतिहास में स्थान क्या है?

वे भारत की संवैधानिक और संसदीय परंपराओं को मजबूत करने वाले अग्रणी नेताओं में गिने जाते हैं।

निष्कर्ष: Vithalbhai Patel Biography

विठ्ठलभाई पटेल का जीवन प्रेरणादायक है। उन्होंने जीवनभर स्वतंत्रता और संसदीय लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया। स्वराज पार्टी से लेकर केंद्रीय विधान सभा तक, उनके योगदान ने भारत को मजबूत बनाया। सरदार पटेल के बड़े भाई के रूप में वे परिवार और राष्ट्र दोनों के लिए आदर्श थे। उनका हास्य, वाक्पटुता और दृढ़ता आज भी याद की जाती है। हमें उनके जैसे नेताओं से सीखना चाहिए कि संसदीय तरीके से कैसे परिवर्तन लाया जाए। यह ब्लॉग सभी उपलब्ध जानकारी को कवर करता है और उम्मीद है कि पाठकों को स्पष्ट समझ मिलेगी।

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