Equity: परिभाषा, विशेषताएँ, लाभ , प्रकार और गणना !
जब भी हम निवेश (Investment) की बात करते हैं, तो Equity शब्द काफी सुनने को मिलता है। लेकिन इक्विटी आखिर है क्या? आसान शब्दों में कहें तो इक्विटी का मतलब किसी कंपनी में आपकी हिस्सेदारी (Ownership) से होता है। जब आप किसी कंपनी के शेयर (Shares) खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के एक हिस्सेदार (Shareholder) बन जाते हैं। कंपनी का मुनाफा बढ़ता है तो आपके शेयर की कीमत भी बढ़ती है, जिससे आपको अच्छा रिटर्न (Return) मिल सकता है। हालाँकि, इक्विटी में जोखिम (Risk) भी होता है, लेकिन सही रणनीति से निवेश करके लंबे समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। इस ब्लॉग में हम आपको इक्विटी के प्रकार, इसके फायदे, निवेश के सही तरीके और जोखिम प्रबंधन के बारे में आसान भाषा में समझाने वाले हैं। तो आइए, शुरुआत करते हैं!
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इक्विटी क्या है? | What is equity?
इक्विटी, जिसे आमतौर पर शेयरहोल्डर इक्विटी कहा जाता है, किसी कंपनी के कुल मूल्य को दर्शाता है। सरल शब्दों में, अगर किसी कंपनी की सभी संपत्तियों (Assets) को बेच दिया जाए और उसकी सभी देनदारियों (Debt) को चुका दिया जाए, तो जो राशि बचती है, वह शेयरधारकों (Shareholders) को मिलती है, इसे ही इक्विटी कहा जाता है।
इक्विटी को कंपनी के बैलेंस शीट (Balance Sheet) में दर्शाया जाता है और यह किसी भी निवेशक के लिए यह समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति कितनी मजबूत है।
आसान भाषा में कहें, तो इक्विटी वह राशि होती है, जिस पर किसी कंपनी के निवेशकों या शेयरधारकों का हक होता है। जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी के शेयर खरीदता है, तो वह उस कंपनी का आंशिक मालिक बन जाता है।
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, इक्विटी शेयर (Equity Share) वे शेयर होते हैं जिनका कोई निश्चित लाभांश (Fixed Dividend) निर्धारित नहीं होता, बल्कि शेयरधारकों को कंपनी के लाभ और हानि के अनुसार लाभांश प्राप्त होता है।
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इक्विटी की मुख्य विशेषताएँ | Key Features of Equity
इक्विटी शेयरों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. परिपक्वता अवधि (Maturity Period)
इक्विटी शेयरों के माध्यम से किसी कंपनी को दी गई पूंजी को तब तक वापस नहीं लिया जा सकता जब तक कंपनी चालू रहती है। अगर कोई निवेशक कंपनी के शेयर खरीदता है, तो वह अपनी पूंजी केवल तब ही वापस प्राप्त कर सकता है जब कंपनी का परिसमापन (liquidation) होता है और अन्य सभी दावों का भुगतान किया जा चुका होता है।
2. शेयरधारकों के मतदान अधिकार (Voting Rights)
किसी कंपनी के इक्विटी शेयर खरीदने वाला व्यक्ति उस कंपनी का एक वास्तविक हिस्सेदार बन जाता है। उसे कंपनी की बैठकों में भाग लेने और प्रबंधन से जुड़े निर्णयों पर अपनी राय देने का अधिकार मिलता है, जिससे वह कंपनी के संचालन में भागीदारी कर सकता है।
3. इक्विटी शेयरों से होने वाली आय (Income from Equity Shares)
इक्विटी शेयर में निवेश करने वाले व्यक्ति को कंपनी की आय में हिस्सेदारी का अधिकार मिलता है। अगर कंपनी को पर्याप्त मुनाफा नहीं होता, तो शेयरधारकों को कोई लाभ नहीं मिल सकता। लेकिन अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन करती है, तो शेयरधारकों को पूंजी में वृद्धि (capital appreciation) और उच्च लाभांश (dividends) प्राप्त हो सकता है।
4. कंपनी की संपत्ति पर दावा (Claim on Company’s Asset)
जो व्यक्ति किसी कंपनी के इक्विटी शेयर खरीदता है, उसे कंपनी की संपत्ति पर भी मालिकाना हक मिल जाता है। हालांकि, कंपनी के दिवालिया (Bankruptcy) होने की स्थिति में अन्य देनदारियों का निपटारा करने के बाद ही शेयरधारकों को संपत्ति पर दावा करने का अवसर मिलता है।
5. सीमित देनदारी (Limited Liability)
भले ही इक्विटी शेयरधारक कंपनी के मालिक होते हैं, लेकिन उनकी देनदारी सीमित होती है। इसका मतलब यह है कि अगर कंपनी को नुकसान होता है, तो शेयरधारकों को केवल उतना ही नुकसान होगा जितना उन्होंने निवेश किया है। उन्हें कंपनी के किसी अन्य ऋण या घाटे के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।
इक्विटी निवेश से संबंधित इन विशेषताओं को समझकर कोई भी व्यक्ति बेहतर निवेश निर्णय ले सकता है।
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इक्विटी शेयर में निवेश के फायदे | Benefits of investing in equity shares
इक्विटी शेयर में निवेश करने से निवेशकों को कई तरह के लाभ मिलते हैं। यह न केवल अच्छी कमाई का अवसर देता है बल्कि धन को बढ़ाने में भी मदद करता है। आइए जानते हैं इसके प्रमुख फायदे:
1. अधिक रिटर्न का मौका: इक्विटी शेयरों में निवेश करने से निवेशकों को अधिक रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। यह लाभ न केवल डिविडेंड (Dividend) के रूप में मिलता है, बल्कि शेयर की कीमत बढ़ने पर भी निवेशक अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
2. महंगाई से सुरक्षा: महंगाई (Inflation) के कारण समय के साथ पैसों की क्रय शक्ति घट जाती है। लेकिन इक्विटी में निवेश करने पर रिटर्न की दर अक्सर महंगाई दर से अधिक होती है। इससे निवेशकों की पूंजी का मूल्य घटने की संभावना कम हो जाती है और वे अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत बनाए रख सकते हैं।
3. आसान निवेश प्रक्रिया: शेयर बाजार में निवेश करना बहुत ही सरल है। कोई भी व्यक्ति स्टॉकब्रोकर या वित्तीय सलाहकार की मदद से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) जैसे प्लेटफॉर्म पर आसानी से निवेश कर सकता है। यदि किसी के पास डिमैट अकाउंट (Demat Account) है, तो वह कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन शेयर खरीद सकता है।
4. निवेश पोर्टफोलियो में विविधता: कई निवेशक केवल सुरक्षित विकल्पों जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि उनमें जोखिम कम होता है। लेकिन, इनसे मिलने वाला रिटर्न भी सीमित होता है। इक्विटी में निवेश करके व्यक्ति अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता ला सकता है और अधिक रिटर्न प्राप्त करने का अवसर बढ़ा सकता है।
इसी तरह, सही रणनीति और योजना के साथ इक्विटी शेयरों में निवेश करना वित्तीय सफलता के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
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इक्विटी अकाउंट के प्रकार | Types of Equity Accounts
इक्विटी एक ऐसा निवेश है जो बाजार से जुड़ा होता है और इसमें निश्चित रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसका रिटर्न पूरी तरह से कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इक्विटी अकाउंट के कई प्रकार होते हैं, जो मिलकर कुल शेयरधारकों की इक्विटी (Shareholders’ Equity) बनाते हैं। आइए, इन्हें आसान भाषा में समझते हैं—
1. कॉमन स्टॉक (Common Stock): कॉमन स्टॉक किसी कंपनी में निवेशकों की पूंजी का प्रतिनिधित्व करता है। यह शेयरधारकों को वोट देने का अधिकार प्रदान करता है और कंपनी की संपत्ति पर उनके हिस्से को दर्शाता है।
2. प्रेफरेंस स्टॉक (Preferred Stock): प्रेफरेंस स्टॉक, कॉमन स्टॉक से मिलता-जुलता होता है, लेकिन इसमें शेयरधारकों को वोटिंग अधिकार नहीं मिलते। हालांकि, यह एक निश्चित लाभांश (डिविडेंड) देने की गारंटी प्रदान करता है, जिससे इसे एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।
3. कंट्रीब्यूटेड सरप्लस (Contributed Surplus): इसमें उन अतिरिक्त राशियों को शामिल किया जाता है, जो निवेशकों द्वारा शेयरों की मूल कीमत (Par Value) से अधिक भुगतान करने पर आती हैं। इसे एडिशनल पेड-इन कैपिटल (Additional Paid-In Capital) भी कहा जाता है।
4. रिटेन्ड अर्निंग्स (Retained Earnings): यह कंपनी के उस लाभ (Net Income) को दर्शाता है, जिसे शेयरधारकों को लाभांश के रूप में नहीं दिया जाता, बल्कि कंपनी के विकास और भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखती है।
5. अन्य समग्र आय (Other Comprehensive Income): इसमें वे आय (Income) शामिल होती हैं, जो अभी तक कंपनी द्वारा वास्तविक रूप से प्राप्त नहीं हुई हैं। इसलिए, इसे कंपनी मुख्य आय विवरण (Income Statement) से अलग रखा जाता है।
6. ट्रेजरी स्टॉक (Treasury Stock): यह एक Contra-Equity Account होता है, जो उन शेयरों को दर्शाता है जिन्हें कंपनी खुद अपने निवेशकों से वापस खरीद लेती है। इसे कुल इक्विटी से घटाकर दिखाया जाता है।
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इक्विटी कैसे काम करती है? | How does equity work?
इक्विटी शेयरों में निवेश करना कई लोगों के बीच लोकप्रिय है क्योंकि यह अधिक रिटर्न देने वाला निवेश विकल्प माना जाता है। जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी के शेयर खरीदता है, तो उसे दो तरह से मुनाफा हो सकता है – पहला, शेयर की कीमत बढ़ने (Capital Gain) से, और दूसरा, कंपनी के अच्छे प्रदर्शन से मिलने वाले लाभ के माध्यम से।
इसके अलावा, किसी कंपनी के शेयरधारक बनने पर व्यक्ति को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स (Board of Directors) से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में मतदान करने का अधिकार भी मिलता है। हालाँकि, इक्विटी शेयर निवेश में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं। इसलिए, निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और आपकी निवेश रणनीति क्या होनी चाहिए।
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इक्विटी की गणना का फार्मूला | Formula for calculating equity
किसी कंपनी की इक्विटी (Equity) की गणना करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का उपयोग किया जाता है:
शेयरधारकों की इक्विटी (Shareholders Equity)= कुल संपत्तियाँ (Total Assets)- कुल देनदारियाँ (Total Liabilities)
इस जानकारी को बैलेंस शीट से प्राप्त किया जा सकता है। इक्विटी की गणना के लिए इन चार चरणों का पालन करें:
1. कुल संपत्तियों (Total Assets) की पहचान करें, जो बैलेंस शीट में दी गई होती हैं।
2. कुल देनदारियाँ (Total Liabilities) खोजें, जो बैलेंस शीट में अलग से सूचीबद्ध होती हैं।
3. इक्विटी निकालने के लिए कुल संपत्तियों में से कुल देनदारियाँ (Liabilities) घटा दें।
4. ध्यान दें कि कुल संपत्तियाँ हमेशा कुल देनदारियों और इक्विटी के योग के बराबर होती हैं।
कई बार शेयरधारकों की इक्विटी की गणना इस तरह भी की जाती है:
इक्विटी (Equity)= शेयर पूंजी (share capital)+ संचित लाभ (accumulated profits)- ट्रेजरी शेयर का मूल्य (treasury share value)
हालाँकि, यह तरीका कम प्रचलित है। आमतौर पर, कंपनी की कुल संपत्तियाँ और देनदारियाँ उसकी वित्तीय स्थिति का सही चित्रण करती हैं, इसलिए पहले वाला तरीका अधिक उपयोग में लिया जाता है।
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FAQs: Equity in Hindi
1. इक्विटी फंड और डायरेक्ट शेयर निवेश में क्या अंतर है?
- इक्विटी फंड: म्यूचुअल फंड के ज़रिए विभिन्न कंपनियों में निवेश किया जाता है।
- डायरेक्ट शेयर निवेश: निवेशक स्वयं कंपनी के शेयर खरीदता और बेचता है।
2. क्या इक्विटी निवेश छोटे निवेशकों के लिए सही है?
हाँ, छोटे निवेशक सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP Investment) के माध्यम से धीरे-धीरे इक्विटी फंड में निवेश कर सकते हैं।
3. इक्विटी निवेश का सही समय क्या होता है?
शेयर बाजार को समय देना मुश्किल होता है, इसलिए नियमित निवेश (SIP) या जब बाज़ार में गिरावट हो, तब निवेश करना अच्छा हो सकता है। लंबी अवधि के लिए निवेश करना हमेशा फायदेमंद रहता है।
4. क्या इक्विटी निवेश पर टैक्स देना पड़ता है?
हाँ, यदि आप एक साल से कम समय में शेयर बेचते हैं, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (STCG) 15% लगता है। एक साल से अधिक के निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) 10% लगता है (₹1 लाख तक का लाभ टैक्स-फ्री है)।
5. क्या इक्विटी निवेश जोखिम भरा होता है?
हाँ, इक्विटी निवेश में बाज़ार की अस्थिरता (Volatility) के कारण जोखिम होता है, लेकिन सही रणनीति और लंबी अवधि में निवेश करने से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
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निष्कर्ष | Conclusion
इक्विटी (Equity) निवेश एक लंबी अवधि की संपत्ति बनाने का शानदार तरीका है, जो निवेशकों को कंपनी के विकास में हिस्सेदार बनने का अवसर देता है। हालांकि, इसमें बाजार की अस्थिरता के कारण जोखिम भी होता है, लेकिन सही योजना और धैर्य के साथ निवेश करने से अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। इक्विटी में निवेश से महंगाई को मात देने, संपत्ति बढ़ाने और वित्तीय स्वतंत्रता पाने में मदद मिलती है। यदि कोई निवेशक समझदारी से निर्णय ले और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निवेश करे, तो इक्विटी एक फायदेमंद निवेश साधन साबित हो सकता है।